वन विभाग की लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण बना कान्हा नेशनल पार्क सरही गेट
रेवांचल टाइम्स। कान्हा नेशनल पार्क के सरही गेट में ऐसा लगता है कि शासन द्वारा बनाए गए कोरोना गाइडलाइन(मास्क,सोशल डिस्टेंसिंग) सिर्फ पर्यटकों के लिए बना है। वन विभाग के कर्मचारियों के लिए नही है आये दिन देखने को मिल रहा है कि कान्हा नेशनल पार्क सरही गेट वन विभाग कर्मचारियों द्वारा कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ा रहे है। यही नहीं इसके अलावा प्रवेश द्वार गेट के अंदर वन कर्मचारी व अधिकारियों की मौजूदगी में प्रतिदिन गांव के पालतू पशु (गाय,भैंस) प्रवेश द्वार के अंदर घूमते नज़र आते है, जो कान्हा नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार की शोभा को प्रभावित करता है। साथ नेशनल पार्क में आने वाले सैलानी भी प्रभावित होते है किंतु वन कर्मचारियों को तो सिर्फ अपनी वेतन से मतलब है दैनिक मजदूरी पूरी होनी चाहिए उसके बाद फिर जंगल में आग लगे, पेड़ो को कटाई हो, पालतू पशु और ग्रामीण वन में प्रवेश करे। कर्मचारियों को कोई मतलब नहीं हैं वन विभाग सरही गेट के सामने यदि ऐसी लापरवाही लगातार हो रही है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रवेश गेट के अंदर जगंल में लापरवाही का स्तर क्या होगा और इन्ही कुछ वजहों से पर्यटकों के मन में सरही गेट के प्रति गलत भ्रांतिया होती जा रही है और सिर्फ सरही गेट कर्मचारी व अधिकारियों के इन्ही अनदेखी व लापरवाही के कारण है पर्यटक इस गेट में आने में अधिक रुचि नहीं ले रहे है।


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