रेवांचल टाइम्स :- इस मौसम में तापमान में काफी उतार-चढ़ाव होने के कारण क्षेत्र में वायरल फीवर फ्लू के ट्रेसेस में तेजी से वृद्धि हो रही है।
इसमें सर्दी, खांसी, बुखार, सिर दर्द, आंखों में जलन होना, और आंखों से पानी आना मुख्य लक्षण होने के साथ-साथ थकान, शरीर या जोड़ों में दर्द, होना और दस्त लगना, पेट दर्द, त्वचा के ऊपर रैसेज होना, आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
जानकार डॉ का मानना है कि इस प्रकार का सामान्य फ्लू वायरल बुखार में हल्का इंफेक्शन होता है। यदि गले में खराश या बलगम है। तो यह पेट साफ ना होने, तली हुई चीजें खाने से, दूषित पानी पीने से,भी हो सकता है।
वहीं कोविड-19 में सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ, और तेज बुखार आना, प्रमुख लक्षण है। चिकित्सक कहते हैं कि आम जनता में वायरल फीवर की सही जानकारी ना होने के कारण सामान्य मौसमी बुखार को भी लोग कोरोना बुखार समझ रहे हैं। जो उचित नहीं है।
इस भ्रम को दूर करना जरूरी है कहा कि मौसम में परिवर्तन ठंडा गर्म होने से वातावरण में मौजूद वायरस तेजी से सक्रिय होकर मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं। मौसमी बुखार या वायरल फीवर की अवधि अधिक से अधिक 1 सप्ताह होती है और 1 सप्ताह के बाद उपचार या बगैर उपचार के यह वायरल फीवर ठीक हो जाता है।
वहीं अगर बात कोरोनावायरस से होने वाले बुखार की करें तो इसकी अवधि 14 दिन रहती है मौसमी बुखार में किसी विशेष औषधियों की आवश्यकता नहीं होती है। मरीज का घर पर ही रह कर आराम करना, गर्म पानी पीना, पोस्टिक भोजन लेना, फलों का अधिक सेवन करना, बुखार आने पर पेरासिटामोल की गोली लेना, तथा इसके साथ-साथ सर्दी जुखाम होने पर गर्म पानी की भाप लेना, कुनकुने पानी में चुटकी भर नमक डालकर उससे कुल्ली करना,अदरक की चाय एवं हल्दी का दूध पीने से लाभ होता है।
कोरोना वायरस की दहशत और मौसम में आने वाले बदलाव से साथ नैनपुर नगर में वायरल फीवर के मामले बढ़ने लगे हैं। बच्चों से लेकर बड़े भी वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में हर रोज बुखार, जुकाम व खांसी से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार बीते एक सप्ताह से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इस से डरने की जरूरत नहीं है लेकिन, भयभीत लोग वायरल फीवर को कोरोना वायरस समझ रहे हैं और डॉक्टरों से पूछ रहे हैं कि कहीं उन्हें कोरोना वायरस तो नहीं हो गया? ऐसे मैं वह कोरोना डेथ करवा रहे हैं जिसमें कुछ रैपिड टेस्ट और कुछ आरटी पीसीआर के माध्यम से टेस्ट हो रहे हैं जिसमें अधिकतर रिपोर्ट कभी-कभी चौंकाने वाली भी होती हैं जिसमें लोगों को लक्षण नजर ना आने पर भी रिपोर्ट पॉजिटिव हो जाती है ऐसे में अकसर लोग घबराकर दिमाग में सायकोलॉजी बैठा लेते हैं जिससे वह अधिक घबराहट में अपना संयम खो बैठते हैं।
मौसम बदलाव से वायरल फीवर के मामले बढ़ जाते हैं। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, नाक बंद होने, खांसी व गले में इंफेक्शन जैसी समस्या होती है। तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाती है। इसे नजरअंदाज करने पर अवस्था गंभीर हो सकती है। ऐसे मौसम में छोटे बच्चों व बुजुर्गो के लिए ज्यादा खतरा रहता है इसलिए उनका विशेष ध्यान रखें।
वायरल फीवर के लक्षण
सर्दी, जुकाम, बुखार, गले में दर्द, खांसी, सिरदर्द, लंबे समय तक बुखार, मांसपेशियों या शरीर में दर्द होना, आंखों में लाली और जलन होना आदि वायरल फीवर के लक्षण हैं।
ऐसे करें बचाव
-इस बदलते मौसम में सुबह-शाम सेहत का खास ध्यान रखें।
-एकदम से गर्म कपड़े पहनना बंद न करें।
-पौष्टिक आहार खाएं।
-छींकते या खांसते समय मुंह व नाक पर रूमाल रखें।
-घर में किसी को जुकाम या बुखार हो तो उनसे दूरी बनाए रखें।
-वायरल फीवर होने पर आराम करें।
-ज़्यादा बुखार होने पर ही डॉक्टर के पास जाऐं।
नोट- रेवांचल टाइम्स किसी भी तरह का चिकित्सीय दावा नहीं करता है यह सिर्फ जानकारी के लिए है चिकित्सा के लिए डाक्टर से जरुर सलाह लेवें

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