रेवांचल टाईम्स :- चैत्र नवरात्रि का सनातन धर्म शास्त्रों में विशेष महत्व है। इसी दिन से हिंदू नव वर्ष या नव संवत्सर का प्रारंभ होता है ।इसे शक्ति की उपासना का महापर्व माना जाता है ।वर्ष की दोनों ही नवरात्रि ऋतु परिवर्तन काल में मनाई जाती है |चैत्र मास की नवरात्रि को वासंती पर्व के रूप में मनाने की मान्यता है |
दिवस मंगलवार को प्रारंभ होने वाला नव वर्ष नव संवत्सर सभी के जीवन में मंगल ही मंगल करें 'माता आदिशक्ति सभी अमंगल का सर्वनाश कर विश्व कल्याण एवं विश्व शांति की स्थापना करें |रेवांचल परिवार इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आदि शक्ति से प्रार्थना करता है |
आदि शक्ति की उपासना के इस महापर्व में ग्राम के सभी मंदिरों देवी स्थानों में रंग - रोगन ' साज - सज्जा एवं सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई ।बड़ चौराहा स्थित विंध्यवासिनी मंदिर 'बस स्टैंड स्थित दुर्गा मंदिर 'सारस डोली रोड स्थित महाकाली मंदिर 'ग्राम के मध्य स्थित खेरमाई मंदिर 'खुर्सीपार स्थित खेरमाई मढ़िया एवं भजन दास पंडा की मढ़िया सहित सभी स्थानों मेंज्योति कलश एवं जवारे की स्थापना की जाती है ।नवरात्रि का प्रथम दिवस माता शैलपुत्री की पूजा का दिवस माना जाता है | यूं तो चैत्र नवरात्रि को अध्यात्म साधना एवं तंत्र साधना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है |

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