रेवांचल टाइम्स - वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए अनेक राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता एवं वरिष्ठ नागरिक बड़े व्यवसाई बुद्धिजीवी अनेक लोगों द्वारा लॉक डाउन की अपील की गई थी मगर इस लॉक डाउन के दुष्परिणामों के बारे में भी कुछ विचार किया जाता तो अच्छा होता कोरोना महामारी से व्यक्ति वैसे भी मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस कर रहा है ऊपर से छोटे व्यापारियों का व्यवसाय बंद हो जाने से उनकी आर्थिक हालत भी खराब हो गई है और वह मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया है चूंकि यह लॉक डाउन जिला स्तर पर लगाया गया है इसलिए इस lock-down से किसी प्रकार की कोई आर्थिक मदद होने की भी कोई उम्मीद नहीं है ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं जिन्होंने शादी का सीजन देखते हुए अनेक समूहों से और बाजार से ब्याज से पैसा उठाकर अपनी दुकान में सामान भर लिया और सीजन के आने से पहले लॉकडाउन लग गया उनके पास अब उनके पास ना घर चलाने के लिए पैसे हैं और ना जो समूह से लोन लिया है उसको पटाने के लिए पैसे हैं लेकिन प्राइवेट कंपनी अब अपने किस्त के पैसे उनसे मांगने के लिए दबाव बना रही है अब जिन व्यक्तियों ने समूह से पैसा लिया है मार्केट से पैसा उठाया है वे लोग पैसे कहां से दे इसलिए लॉकडाउन की अपील करने वालों को एक बार इन सवालों में भी विचार करके बैंक वालों से भी किस्त के लिए परेशान ना करने की अपील करना चाहिए नहीं तो बहुत सारे लोग लॉकडाउन बाद अपना आपा खो सकते हैं या यूं कहें कि कोरोनावायरस से निकलने के बाद लोग आर्थिक महामारी से भी जूझते नजर आएंगे ऐसे ही कुछ लोगों की आपबीती आपको आगे बताई जाएगी जो इस समय की समस्या से जूझ रहे है और परेशान हैं और जिला प्रशासन और अपील करता से उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।
विनोद दुबे के साथ रेवांचल टाइम्स की एक रिपोर्ट

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