रेवांचल टाइम्स :- नैनपुर कोरना काल में ऑक्सीजन तो कभी पल्स ऑक्सीमीटर कोविड इलाज में उपयोग आने वाले उपकरणों की कमीं बढ़ गई। हालात यह हैं, ऑक्सीजन तो दूर की बात, अब तो उस पर लगने वाला फ्लो मीटर भी अस्पताल से गायब हो गया है । इसका विकल्प नैनपुर में समाजसेवी ओम चौरसिया और उनकी टीम ने निकाला है। इन्होंने जुगाड़ का फ्लो मीटर तैयार किया है,
जिसका खर्च काफी कम है। उन्होंने मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन में काम आने वाले होल सिरिंज की मदद से फ्लो मीटर तैयार किया है। इसकी मदद से मरीज को ऑक्सीजन दी जा रही है और लोगों की जान बचाई जा रही है।
रहवासियों का कहना था, ऑक्सीजन सिलेंडर तो जुटा लिए हैं, लेकिन मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए फ्लो-मीटर की किल्लत पैदा हो गई है। पेटू जंक्शन के संचालक एवं समाजसेवी ओम चौरसिया का कहना है , कि वर्तमान में इंजेक्शन सिरिंज एक ऐसा इक्विपमेंट हैं, जो फ्लो मीटर के काम में आ रहा है।
दुकानें बंद हैं, लेकिन कुछ लोग जो घर से व्यवसाय कर रहे हैं। आपातकाल में इस विधि की सहायता से मेडिकल दुकान से इंजेक्शन खरीद कर काफी हद तक मरीज को ऑक्सीजन देने की समस्या दूर की जा सकती है। इस जुगाड़ से इस समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन देने का काम चल रहा हैं। ओम चौरसिया और उनकी टीम ने इसका वीडियो भी बनाया है और सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे लोगों तक पहुंचा कर जागरुक करने का कार्य कर रहे हैं तथा इसे इन्होंने अपना नाम दिया है ओम फ्लो मीटर।
बता दें कि काफी दिनों से समाजसेवी ओम चौरसिया और उनकी टीम लगातार लोगों की मदद के लिए प्रतिदिन कार्य कर रही है। कुछ दिन पहले इनके द्वारा ऑक्सीजन बैंक भी प्रारंभ किया गया है। जिसमें नगर में होने वाली ऑक्सीजन की कमी की पूर्ति लगातार की जा रही है। जिसमें नगर के कई बुद्धिजीवी और रसूखदार अपनी क्षमता के अनुसार राशि दान कर इस ऑक्सीजन बैंक की सहायता कर रहे हैं।
कुछ दिनों पहले ओम चौरसिया ने एक वीडियो वायरल किया, जिसमें यह दर्शाया गया कि किस तरह फ्लो मीटर की कमी होने पर इस प्रयोग के द्वारा मरीज को तत्काल में ऑक्सीजन देकर उसकी जान बचाई जा सकती है।
ऑक्सीजन सिलेंडर से मरीज के मास्क तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए उपयोग आने वाला फ्लो-मीटर बाजार में उपलब्ध न होने पर यह जुगाड़ बनाया गया है। उन्होंने देशी जुगाड़ का फ्लोमीटर बनाया है।
ओम चौरसिया एवं उनकी टीम लगातार किसी ना किसी तरह इस विषम परिस्थिति में अपनी जान को जोखिम में डालकर लोगों की मदद कर रहे हैं। इनके द्वारा आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के घरों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है और आर्थिक रूप से भी लगातार लोगों की मदद की जा रही है।
ऑक्सीजन नली की कीमत बड़ी
ऑक्सीजन फ्लोमीटर नली 150 से 160 रुपए में मिलती थी, जबकि इसकी वास्तविक कीमत 120 रु. ही है। अब यह नली 100 रु. ऊपर में मिल रही है। दवाई दुकानदारों का कहना है कि मुनाफा हमारा नहीं बढ़ा है होलसेल से ही महंगी आ रही है। इस समस्या को देखते हुए ओम चौरसिया एवं उनकी टीम ने यह सस्ता जुगाड़ किया है जिससे आसानी से लोगों को फ्लो मीटर उपलब्ध हो रहा है और ऑक्सीजन मरीज तक पहुंचा कर उनकी जान बचाई जा रही है।
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट

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