रेवांचल टाइम्स :- नैनपुर में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है. आलम यह है कि सरकारी अस्पतालों के बजाय मरीजों को बीमारियों के लिए प्राइवेट अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ता है. हालत यह है कि एडवांस स्वास्थ्य व्यवस्था की सुविधा नैनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से कोसों दूर है. ऐसे हालातों में लोगों के पास नागपुर या जबलपुर जाकर इलाज करवाना ही एकमात्र विकल्प रहता है. नगर में आर्थिक दृष्टि से मजबूत लोग तो बाहर जाकर इलाज करवाने में सक्षम है लेकिन गरीब मजदूर वर्ग का व्यक्ति तो सरकारी अस्पतालों के भरोसे ही है अच्छे इलाज के अभाव में मजदूर, गरीब वर्ग के परिवार अनेकों बार अपने लोगों को खो चुके हैं। चिंता की बात यह है कि कई बीमारियों को लेकर यहां सरकारी अस्पताल असहाय दिखाई देते हैं।
जैसा कि हमें प्रतीत है आज हमारा पूरा देश कोरोना महामारी जैसी घातक बीमारी से लड़ाई लड़ रहा है ऐसे में नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्थाओं का ना होना यह नगर वासियों के लिए बहुत बड़ा दुर्भाग्य है यहां कहने को तो नेताओं की जमात मौजूद है लेकिन जब नगर की स्वास्थ्य व्यवस्था की बात आती है तो सभी नेता असहाय दिखाई पड़ते हैं जिले की बात करें तो हमें दो सांसदों की सौगात प्राप्त है जिसमें एक केंद्र सरकार में मंत्री भी है और पूर्व में केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं लेकिन मंडला जिले के स्वास्थ्य स्तर की बात की जाए तो एकदम 0% है।
इसके साथ ही नैनपुर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल उपकरणों की कमी भी देखी जा सकती है. कोरोना वायरस के गंभीर मामलों को देखते हुए वेंटिलेटर की व्यवस्था नैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कितनी आवश्यक है यह किसी से छुपा नहीं है.जिसे हम विषम परिस्थितियों में एहसास कर चुके हैं। क्योंकि वेल्टीनेटर ना होने का दंश नगर के अनेकों परिवार ने झेला है जिस की कमी के चलते नगर के कई परिवारों नें अपने परिवारजनों को गवाया है।
इस कोरोना कॉल में मरीज़ को वेंटिलेटर की अधिक ज़रूरत है. ऐसे में वेंटिलेटर फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाता है. वेंटिलेटर में ह्यूमिडीफायर भी होता है जो हवा में गर्माहट और नमी शामिल करता है और उससे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। लेकिन नैनपुर नगर में अनेकों बार वेंटिलेटर के अभाव में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।
लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी हमारे नगर एवं जिले के जनप्रतिनिधियों की आंखों में पानी नहीं आया। यह सभी लाज शर्म भूल चुके हैं। और बेशर्मी का चोला इन्होंने पहन रखा है इन्हें जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है जब जनमानस का अपना कोई भी गुजर जाता है तो मुंह उठाकर पहुंच जाते हैं उनके घर ढाडस बांधने।
नगर में वैक्सीन लगाने का कार्य प्रगति पर है,जिसमें अव्यवस्थाएं चरम सीमा पर है। लोगों को वैक्सीनेशन केंद्र में वैक्सीन तो लगाई जा रही है लेकिन कोरोना गाइडलाइन को ताक पर रखते हुए। यहां हर उम्र का व्यक्ति वैक्सीन लगाने पहुंच रहा है। वृद्धजनों के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधक के द्वारा नहीं की गई है जिससे परिजनों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक छोटा कर्मचारी भी अपने आप को बीएमओ से कम नहीं समझता मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वह इंसान ही नहीं है बल्कि कीड़े मकोड़े हैं।
हां यदि कोई रसूखदार या फिर किसी बड़ी पार्टी का नेता, या आर्थिक दृष्टि से मजबूत ,इनके समक्ष आता है तो फिर यह जी हुजूरी करने में पीछे नहीं हटते।
आज कोरोना संकट से नैनपुर नगर भी जूझ रहा है कुछ ही दिनों में काफी लोग संक्रमित हो गऐ हैं। बाजारों में अधिक भीड़ देखी जा रही है, लोग मास्क का उपयोग कम कर रहे हैं, कोरोना गाइडलाइन का मजाक बनाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि नगर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना वायरस के संकट को किस तरह रोकने में सक्षम होंगे। क्योंकि आव्यवस्थाएं और आसुविधाओं को देखते हुए नगर वासियों का विश्वास प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से उठ चुका है। और स्वयं की सुरक्षा को ही लोग अब अधिक महत्व दे रहे हैं। घर पर ही घरेलू उपचार करते हुए लोग सुरक्षा बरत रहे हैं।
शर्म आना चाहिए हमारे मंडला जिले एवं नैनपुर नगर के जनप्रतिनिधि और प्रशासन को जिनकी वजह से नैनपुर नगर बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का दंश झेल रहा है और यह स्वयं एवं इनके परिवार के लोगों को देश के बड़े-बड़े उच्च टेक्नोलॉजी वाले अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं वह भी जनता के पैसे से।
नैनपुर से रेवांचल टाइम्स शालू अली की रिपोर्ट

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