इंदौर: शहर के छावनी स्थित श्रद्धानंद मार्ग पर रहने वाले दंपती मनीष और नेहा की 20 नवंबर 2003 को शादी हुई. दंपती का एक बेटा और बेटी हैं. दोनों 13 साल साथ रहने के बाद पति ने 7 अक्टूबर 2016 को परिवार न्यायालय में एक अर्जी दायर की, जिसमें पति ने तलाक लेना चाहा, और करीब साढ़े चार साल से केस चल रहा था. हालांकि पत्नी तलाक लेना नहीं चाहती थी, और लगातार काउंसलिंग गृहस्थी फिर पटरी पर लौटती दिख रही थी. लेकिन दंपति को कोरोना ने चपेट में ले लिया और पति की असमय मौत हो गई.
पत्नी दर्द सहम नहीं कर पाई
आखरी सुनवाई से पहले दंपति साथ जिंदगी बिताने को तैयार हो गए थे, लेकिन कोरोना की वजह से पति की मौत का सदमा पत्नी भी सहन नहीं कर पाई, और पत्नी भी गुजर गई. दोनों बच्चों की उम्र 17 साल और 14 साल थी.
परिवार की कीमत समझाने में सफल हो गए थे
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नेहा के वकील अमरसिंह राठौर काउंसलिंग में समझा रहे थे कि इस कठिन समय में जब परिवार ही सबसे बड़ी पूंजी है. बच्चों को सुरक्षित रखना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है. माता-पिता का साथ सबसे ज्यादा जरूरी है. इसके बाद वे दोनों साथ रहने को राजी होने लगे थे.
पति का दर्द सहन नहीं कर सकीं पत्नी
पत्नी नेहा ने अधिवक्ता अमरसिंह राठौर के जरिए तलाक से बचने अपना पक्ष रखा था. केस अंतिम पड़ाव पर आ रहा था कि अप्रैल की शुरुआत में मनीष को संक्रमण हो गया, जो फेफड़ों में काफी बढ़ गया था. नेहा अपनी चिंता किए बगैर पति के पास चली गई. इस बीच वह भी संक्रमित हो गई. 16 अप्रैल को मनीष और 20 अप्रैल को नेहा की भी मृत्यु हो गई. फैमिली कोर्ट में तलाक की फाइल खुली ही रह गई.

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