कोरोना की दूसरी लहर ने भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को पस्त कर दिया है। बड़ी तादाद में लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत पड़ रही है। लिहाजा लोग बदहवासी में तरह-तरह के नुस्खे आजमा रहे हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए कई तरह के नुस्खों के इस्तेमाल को प्रचारित किया जा रहा है। इनमें से कई नुस्खे कोरोना से बचाव या संक्रमित मरीज को राहत देने के कतई काम नहीं आते। चलिए जानते हैं ऐसे नुस्खों का सच।
1. नेबुलाइजर से नहीं मिलती ऑक्सीजन
अफवाह : वातावरण में पर्याप्त ऑक्सीजन है और नेबुलाइजर इसे शरीर के अंदर पहुंचाकर ऑक्सीजन की कमी पूरी हो सकती है।
तथ्य : मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा है यह तकनीक अतिरिक्त ऑक्सीजन मुहैया कराने में बिल्कुल कारगर नहीं है, मरीज की जान जा सकती है।
2. कपूर-अजवाइन का तेल कारगर नहीं
अफवाह : कपूर, अजवाइन और यूकेलिप्टस के तेल का मिश्रण कोविड के मरीजों में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में काफी कारगर है।
तथ्य : अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, कपूर की भाप शरीर के अंदर जाकर विषाक्त हो सकती है, यह बाहरी उपयोग की सामग्री है।
3. नींबू का इस्तेमाल कोरोना से नहीं बचाता
अफवाह : हाल में दावा किया कि नाक में दो बूंद नींबू का रस डालने से शरीर में ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल बढ़ जाता है।
तथ्य : यह अफवाह पूरी तरह से निराधार है। अबतक कोई वैज्ञानिक दावा नहीं किया गया है इसे लेकर।
4. एंटीबायोटिक वायरस को नहीं हरा सकती
अफवाह : कोरोना से बचाने में एंटीबायोटिक दवाएं कारगर हैं, साथ ही कोरोना संक्रमित मरीज के जल्द उपचार के लिए उसे ये दवा देनी चाहिए।
तथ्य : हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया जनित रोगों से सुरक्षा देती हैं जबकि कोविड-19 एक वायरस जनित रोग है। कुछ कोरोना संक्रमित मरीजों में यह देखा गया है कि उनके शरीर में कुछ बैक्टीरियल बीमारियां भी हो जाती हैं, जिनके उपचार के लिए ही इन दवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए।
5. रोज गरारे करना कोरोना का बचाव नहीं
अफवाह : रोज नमक के गुनगुने पानी से गरारे करने से अथवा नाक में कोई सिलाइन डालकर उसकी रोज सफाई करने से संक्रमण से बचा जा सकता है।
तथ्य : हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अनुसार, इस बात के कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है कि रोज गरारे करने या नाम में कोई द्रव्य डालकर सफाई करने से कोविड-19 से बचा जा सकता है।

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