रेवांचल टाईम्स डेस्क :- एक खबर आई है कि देश में गिद्धों की संख्या लगातार कम होती जा रही है इसलिए 'भारतीय वन्य जीव संस्थान" देहरादून के सहयोग से अपने प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वैज्ञानिक लोग गिद्धों की संख्या पता करने और उन्हें कॉलर पहनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उस "जीपीएस कॉलर टेनिंग" से उनकी लोकेशन का पता लग सके, इतना ही नहीं वैज्ञानिक लोग इन गिद्धों की जनसँख्या बढ़ाने के लिए भी तरह तरह के जतन करनें में लगे हुए हैं l अपने को तो समझ से बाहर है कि इन वैज्ञानिकों को किसने बतला दिया कि देश में गिद्धों की कमी हो गयी है, आज की तारिख में जिस तरफ नजर डालो गिद्ध ही गिद्ध नजर आ रहे हैं l जब से देश में कोरोना का प्रकोप फैला है एकाएक इंसान रुपी गिद्धों की भरमार हो गयी है, बेचारे गिद्ध तो मरे हुए लोगों की लाशों को चीथ कर अपना पेट भरते है लेकिन ये इंसान रुपी गिद्ध तो जिन्दा इंसानों को नोचे ले रहे हैं lआप कोरोना से पीड़ित है तो समझ लो आप गिद्धों के झुंड के बीच में फंस गए हो, निजी अस्पताल जाओगे तो तो एक बेड का पच्चीस हजार चार्ज होगा, एक हजार रूपये रोज खाने का बिल जुड़ जाएगा, जितनी बार डाक्टर आपको आकर देखेगा हर बार के हजार दो हजार कंसल्टेशन फीस के रूप में बिल में चस्पा हो जाएंगे जांच, पड़ताल, दवाइयां , इंजेक्शन अलग यानि जब आप कोरोना से मुक्त होंगे तब तक आपके "गहने लत्ते" बिक जाएंगे और तब आपको पता लगेगा कि असली गिद्ध कौन है, यदि आपको रेमेडीसीवीर इंजेक्शन लगना हैं तो ये इंसानी गिद्ध पांच हजार का इंजेक्शन बीस हजार में आपको बेच देंगे, इनकी तो बात तो छोडो यंहा तक कि साधारण गुटका जो दस रुपये में मिलता है वो यदि चहिये तो तीस रूपये अदा करने होंगेl कहते है कोरोना में नारियल पानी बड़ा फायदा करता है तो जो नारियल तीस से चालीस रूपये में मिलता था वो अब सौ रूपये में मिलेगा l एम्बुलेंस चाहिए तो वो भी आपको पूरी तरह नोचने पर उतारू होगा, जबलपुर से नागपुर जाना हो या और कंही तीस से चालीस हजार लगेंगे तब कंही आप एम्बुलेंस में बैठ पाएंगे , यदि "डेडबॉडी" घर ले जाना हो तो फिर तो कहना ही क्या, पांच दस किलोमीटर के पांच हजार से काम नहीं लेंगे ये एम्बुलेंस वाले, अब डेड बॉडी घर तो ले जाना ही पड़ेगा, मरघटाई में लकड़ी के लिए वंहा बैठे लोग गिद्ध बन कर आपको नोच लेंगे, शव को जलाना है तो उनकी मर्जी के दाम देना पड़ेंगें तब मुर्दे को लकड़ियां नसीब होंगी l ऑक्सीजन चाहिए तो दलाल रुपी गिद्ध से कांटेक्ट करो यंहा तक कि अस्पताल में बैड चाहिए तो दलाल सक्रिय हैं दलाली दो और बैड पाओl अब ऐसी स्थिति में ये वैज्ञानिक लोग बेफालतू में गिध्दों की आबादी बढ़ने की कोशिश में लगे हुए हैं हुए हैं गिद्धों की फ़ौज आपके सामने है उनकी ही गिनती कर लो लाखों तक पंहुच जाएगी l गिद्ध तो बेचारा व्यर्थ ही बदनाम है कि वो लाशों को चीथ लेता है यंहा तो ये गिद्ध न केवल इंसान बल्कि पूरी इंसानियत को चीथने में लगे हुए हैं हमने तो 'जटायु' और 'संपात्ति' जैसे गिद्ध राजाओं के बारे में पढ़ा था जिन्होंने भगवान राम की मदद की थी, जटायु तो माता सीता की रक्षा करते करते शहीद भी हो गए थे ये गिद्ध उन्ही के वंशज है पर इन इंसानी गिद्धों ने इन गिद्धों की पूरी बिरादरी को ही बदनाम कर दिया l
आधी छोड़ पूरी को धावे
अच्छे खासे विधायक थे अपने राहुल लोधी जी, ठीक है कमलनाथ की सरकार चली गई थी लेकिन क्या हुआ विधायक की गद्दी तो बरकरार थी, लेकिन पता नहीं किसने दिमाग दे दिया कि बीजेपी में शामिल हो जाओ वंहा सत्ता की मलाई खाने मिल जाएगी, और कल तक कांग्रेस तो मेरे खून में हैं कहने वाले एक ही झटके में कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में चले गए , बीजेपी ने भी कह दिया कि तुम अपनों का साथ छोड़कर हमारे साथ आये हो तो तुम्हेँ ही दमोह से टिकिट देंगे और अपना वादा पूरा भी किया, पुराने कद्दावर नेता नेता जयंत मलैया और उनके युवा बेटे सिद्धार्थ मलैया को किनारे कर राहुल को अपना उम्मीदवार बना दिया l पूरी फ़ौज मैदान में उतार दी क्या मुख्य मंत्री, क्या प्रदेश अध्यक्ष, क्या केंद्रीय मंत्री, क्या प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक, दमोह में डेरा डाल कर बैठ गए, कोरोना गया भाड़ में ऐसी ऐसी रैलियां की जिसमेँ हजारों लोग इकठ्ठे हो गए, मामाजी ने मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा भी कर दी लेकिन बीजेपी ये भूल गयी कि "घर का भेदी" लंका ढा सकता है जयंत मलैया को मना तो लिया ऐसा भले ही कहते रहे बीजेपी के लोग पर अंदर ही अंदर क्या चल रहा था कोई नहीं समझ पाया, स्थिति ये बनी कि अपने राहुल भैया मलैया जी के बूथ से ही हार गए, दूसरी तरफ सिद्धार्थ मलैया जिनके कन्धों पर शहरी इलाके का भार था उसमें भी राहुल लोधी गच्चा खा गए, अब रो रहे हैं कि जयंत मलैया के परिवार के कारण वे हार गए l किसने कहा था हुजूर कि अच्छी भली कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाओ इसलिए बड़े बूढ़े कह गए है "आधी छोड़ पूरी को धावे, आधी जावे न पूरी पावे" याने आधी को छोड़कर पूरी के चक्कर में दौड़ोगे तो आधी भी हाथ से जाएगी और पूरी तो मिलने से रही इसलिए अब घर में बैठो और ये गाना गाओ
"क्या से क्या हो गया भाजपा तेरे प्यार में, चाहा था क्या मिला भाजपा तेरे प्यार में"
सुपर हिट ऑफ़ द वीक
श्रीमान जी के दोस्त को कोरोना होने वाला था, श्रीमाजी ने उसे निजी न्यूज़ चैनल बंद कर डीडी न्यूज़ देखने का सुझाव दिया
अब श्रीमान जी का दोस्त पूरी तरह सुरक्षित हैं और खाद बनाने की विधि सीख रहा है l
चैतन्य भट्ट

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