रेवांचल टाईम्स :- कोरोना संक्रमण से मौत के आंकड़ों का बड़ा खुलासा सोशल मीडिया में वायरल हो रहा ऑडियो में एक नया खुलासा देखिए रेवांचल टाइम्स की रिपोर्ट...
मंडला जिले में कोरोना काल में मौत के आंकड़ों का घोटाला सामने आया है. अब कोरोना से मरने वालों के रिकॉर्ड में भी घोटाला सामने आ रहा है, मंडला में जिला प्रशासन के अनुसार कोरोना से पूरे मंडला जिले में 17 मौत हुई हैं. वहीं अगर मौत के आंकड़ों की बात की जाए तो पूरे मंडला जिले के मौत के आंकड़े एवं मंडला जिले की नैनपुर तहसील में मौत के आंकड़ों में तालमेल नजर नहीं आ रहा है नैनपुर नगर के बीएमओ सुरेंद्र वरकडे एवं समाजसेवी ओम चौरसिया का एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें डॉक्टर सुरेंद्र वरकडे द्वारा कोरोना से लगभग 36 लोगों की मौत बताई जा रही है। जोकि मध्य प्रदेश सरकार की मौत के आंकड़ों में मंडला जिले कि मात्र 17 मौतें दर्ज कराई गई हैं। जिसे संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल मध्य प्रदेश की लिस्ट में देखा जा सकता है। इस लिस्ट में साफ नजर आ रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा पूरे मंडला जिले में केवल 17 मौतें होना बताया गया है। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। केवल मंडला जिले की नैनपुर तहसील में 36 मौतें कोरोना संक्रमण से होना बीएमओ डॉ सुरेंद्र वरकड़े द्वारा बताया जा रहा है।
कोरोना के कारण हुई मौत के आंकड़ों को लेकर मंडला जिला प्रशासन और नैनपुर तहसील प्रशासन में ताल-मेल नहीं बैठ रहा है. दोनों की रिपोर्ट्स में भारी अंतर देखने को मिल रहा है. नैनपुर में बीएमओ डॉ सुरेंद्र वरकडे द्वारा कोरोना के कारण 36 लोगों की मौत होना बताया गया है. वहीं मंडला जिला प्रशासन की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 17 मरीजों की ही मौत दर्ज है. दोनों रिपोर्ट्स में 19 मरीजों का अंतर है.
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है. वहीं ये गड़बड़ी तब हो रही है जब सभी डाटा ऑनलाइन हैं एवं राज्य सरकार के आंकड़ों में दर्ज हो चुका है.
बता दें कि अगर मध्य प्रदेश सरकार अपने डाटा में इन 19 मरीजों की संख्या को नहीं जोड़ती है, तो उनके परिवार को मुख्यमंत्री अनुग्रह राशि नहीं मिलेगी. इस राशि में कोरोना से मृत व्यक्ति के परिवार को राज्य सरकार द्वारा एक लाख रुपए मुआवजा मिलना है. जिसकी घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज ने की है।
वही इस घोटाले को लेकर जिले में राजनीति तेज हो गई है कांग्रेस का कहना है की, "राज्य स्तर की रिपोर्ट में कोरोना मृतकों के आंकड़ों में अंतर नहीं होना चाहिए. यह कैसे हुआ और इसकी जांच की जाए"
वहीं इस पूरे घोटाले को उजागर करने वाले नगर के समाजसेवी ओम चौरसिया ने कहा है कि, वह किसी भी तरह इस घोटाले का सच जनता के सामने लाकर रहेंगे।
इस मामले की उचित जांच के लिए वह कोर्ट तक जाने को तैयार है। इनका कहना है कि, यह जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। एवं मरीजों की मौत का मजाक उड़ाना है। जो कि कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वह संक्रमण से मरे लोगों को इंसाफ दिला कर रहेंगे एवं उनके परिजनों को 1 लाख की सहायता राशि का लाभ पहुंचा कर रहेंगे।
बता दें कि जहां इस संकट के समय नैनपुर नगर के प्रतिनिधियों ने जनता का साथ छोड़ दिया था एवं स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई थी वही समाजसेवी ओम चौरसिया एवं उनकी टीम ने लगातार अपना सहयोग कोरोना मरीज एवं उनके परिजनों को दिया।
इनके द्वारा नगर के दानदाताओं के सहयोग से ऑक्सीजन की व्यवस्था, फ्लो मीटर की व्यवस्था, 100 जांच किट की व्यवस्था, भोजन की व्यवस्था, एंबुलेंस की व्यवस्था, एवं हर संभव प्रयास कर उन्होंने लोगों की मदद की है। इनके इस कार्य कि नगर के सभी लोगों ने सराहना की है।
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट


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