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बेलगाम महंगाई, बिगड़ा आम आदमी का बजट, फल-सब्जियों से लेकर तेल और दाल तक के दाम में बेतहाशा इजाफा - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Thursday, June 17, 2021

बेलगाम महंगाई, बिगड़ा आम आदमी का बजट, फल-सब्जियों से लेकर तेल और दाल तक के दाम में बेतहाशा इजाफा

 



रेवांचल टाइम्स :- मौजूदा महामारी के बीच अब बढ़ती महंगाई भी आम आदमी की कमर तोड़ रही है. हालत यह है कि खाने के तेल, दाल, अंडे से लेकर साबुन तक के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है. चिंता की बात है कि आने वाले समय में भी इनसे राहत मिलते नहीं दिखाई दे रही है.

जिस दौर में कम से कम रोजमर्रा की सबसे जरूरी चीजों की कीमतों को नियंत्रण में रखने की जरूरत है, वैसे में आखिर वे कौन-सी नीतियां लागू हो रही हैं, जिनमें महंगाई पर लगाम लगने के बजाय इसमें और ज्यादा इजाफा होता जा रहा है!


पिछले कुछ समय से लगातार जिस तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, उसे देखते हुए यह आशंका पहले ही जताई जा रही थी कि इसका असर बाजार में मौजूद सभी जरूरत के सामान पर पड़ेगा ही। अब खुदरा महंगाई का जो ताजा आंकड़ा आया है, उससे साफ है कि न सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतें लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही हैं, बल्कि खाने-पीने के सामान की खरीदारी को लेकर भी बहुतों को सोचना पड़ रहा है।


खाने-पीने के सामान की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। खासतौर पर रोजमर्रा के खाने-पीने में उपयोग की सबसे जरूरी चीजों के दाम भी बेलगाम होते जा रहे हैं। सच यह है कि इस साल बीते कुछ महीनों से थोक और खुदरा महंगाई की रफ्तार में जिस तरह की तेजी आई है, उसने आम लोगों के माथे पर शिकन पैदा कर दी है।

यह किसी से छिपा नहीं है कि पिछले लगभग डेढ़ साल से ज्यादातर लोग गंभीर आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं। खासतौर पर समाज का वैसा तबका, जो असंगठित क्षेत्र में रोजगार या दिहाड़ी के भरोसे अपनी रोजी-रोटी चलाता है, उसके सामने जिंदगी के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती हो गई है। पूर्णबंदी के चलते लंबे समय से रोजगार के ज्यादातर व्यापार या तो ठप पड़े हुए हैं या फिर किसी तरह घिसटते हुए चल रहे हैं।


वेतन, मजदूरी या किसी तरह के आर्थिक आय के अभाव में बहुत सारे लोग केवल खाने-पीने की सबसे जरूरी चीजें ही खरीद पाते हैं। इनमें से भी बहुतों को तो पेट भरने के लिए भी दूसरों की मदद पर निर्भर होना पड़ा है। यहां तक कि मध्यवर्ग की क्रयशक्ति भी पहले की अपेक्षा काफी कमजोर हुई है। ऐसी स्थिति में महंगाई की चौतरफा मार झेलना सबके लिए आसान नहीं है। जाहिर है, अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह बाजार में महंगाई के स्तर को कम करने से लेकर लोगों की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए क्या करती है।


✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट ✒️

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