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Wednesday, June 2, 2021

"सुख में सुमिरन सब करें, दुख में करे न कोई" इस कहावत को सत्य करते नैनपुर नगर के जनप्रतिनिधि



रेवांचल टाइम्स :- मंडला जिले में कुछ दिनों पहले कोरोना के कहर से जनता त्राहिमाम कर रही थी. बढ़ते संक्रमण के आगे स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दम तोड़ चुकी थीं. अस्पतालों में बेड नहीं, ऑक्सीजन नहीं, श्मशान में लाशों के ढ़ेर लगे थे.

वक्त मुश्किल था और इस मुश्किल वक्त में जनता की उम्मीद प्रशासन और अपने जनप्रतिनिधियों से थी. 

लेकिन नैनपुर नगर के जनप्रतिनिधि क्या अपने क्षेत्र में सक्रिय थे ?

क्या वे जनता की मदद कर रहे थे? 


देखिए रेवांचल टाइम्स की एक खास रिपोर्ट


नैनपुर नगर में 15 वार्ड है एवं जनता के बीच नगर के 15 वार्ड पार्षद और एक नगर पालिका अध्यक्ष एवं सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता और विपक्ष के पदाधिकारी मौजूद हैं। 


नैनपुर नगर में हमने देखा कि कोराना का कहर अपने चरम पर था, रोजाना किसी न किसी परिवार का कोई अपना साथ छोड़ रहा था। श्मशान घाट में लाशों की लाइन लग रही थी लेकिन इससे लड़ने के लिए नगर सरकार, प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की तैयारी सवालों के घेरे में रही है. सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व ने कोरोना प्रभारी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की जनता के प्रति समर्पित होकर हर विषम परिस्थिति में मैदान में उतरने के आदेश दिए थे. जिनका काम संबंधित क्षेत्रों में जनता की हर विषम परिस्थिति में मदद करना था. लेकिन क्या ये जनप्रतिनिधि जनता के प्रति हर विषम परिस्थिति में सफल साबित हो पा रहे थे. 


इसका जवाब है नहीं. आपको बता दें कि मोदी सरकार के सत्ता में 2 साल पूरे हो जाने के उपलक्ष में पूरे देश में जनसेवा महाअभियान का कार्यक्रम चलाया गया है। जिसमें नैनपुर नगर के सभी जनप्रतिनिधि अपने घरों से निकलकर अपने अपने क्षेत्र में लोगों तक पहुंच रहे हैं। एवं उन्हें मास्क एवं सैनिटाइजर वितरण कर रहे हैं, 


लेकिन सवाल यह उठता है कि, यह जनप्रतिनिधि केवल पार्टी के दिशा निर्देश पर ही अपने घरों से निकलते हैं। लेकिन उस समय यह अपने घरों में कैद क्यों हो जाते हैं, जब जनता को इनकी जरूरत होती है।

नैनपुर में संकट के समय जनता ने अपने जनप्रतिनिधियों से काफी उम्मीदें लगाई थी। लेकिन नगर के इन जनप्रतिनिधियों ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। संकट की विषम परिस्थिति में जनता के बीच पहुंचने के बजाय यह प्रतिनिधि अपने घरों में दुबक कर बैठे रहे।

उन्होंने जनता की किसी प्रकार से भी सुध नहीं ली।


नगर में ऑक्सीजन की कमी, फ्लोमीटर की कमी, एंबुलेंस की कमी, तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लचर व्यवस्था के चलते, लोगों ने अपने परिजनों को गवाया है।

क्षेत्र की जनता के त्राहिमाम करने की स्थिति होने के बावजूद ये नगर के सत्ताधारी जनप्रतिनिधि अपने घरों में आराम फरमा रहे थे. जो जनप्रतिनिधि फील्ड में जनता के बीच नजर आ रहे थे, वे कुछ ही नाम हैं जो उंगलियों पर गिने जा सकते हैं.


ऐसा ही एक उदाहरण हमें कल देखने को मिला जब वार्ड नंबर 8 की पार्षद संगीता लारेशवर लंबे समय बाद अपने घर से बाहर निकली एवं मोदी जी के कार्यकाल के 2 साल पूरे होने की खुशी में पार्षद संगीता लारेशवर ने महा सेवा अभियान के तहत अपने वार्ड में लोगो के घर पहुंचकर मास्क एवं सैनिटाइजर बांटे एवं मोदी जी के कार्यकाल के 2 साल पूरे होने का उत्साह मनाया।


आपको बता दें की केवल वार्ड नंबर 8 में ही कोरोना संक्रमण से लगभग 10 लोगों की जान गई है। और वार्ड नंबर 8 में संक्रमण का अधिक खतरा देखा जा चुका है ऐसी विषम परिस्थिति में पार्षद महोदया जनता के बीच से नदारद नजर आईं, जिससे वार्ड की जनता में अधिक आक्रोश है लोगों का कहना है की संकट के समय पार्षद महोदय घर में कैद रहे और अब जब संकट कम हो गया है तो मोदी जी के 2 साल पूरे होने की खुशी में घर से निकल कर सैनिटाइजर और मास्क बांट रहीं हैं। इनका समर्पित भाव केवल पार्टी के लिए ही दिखाई देता है जनता के प्रति यह समर्पित दिखाई नहीं देतीं। क्या यही कर्तव्य है जनप्रतिनिधि का जनता के प्रति।


संकट के समय पार्षद महोदया नदारद रहीं लेकिन आज भाजपा सरकार के 2 साल पूरे होने पर सेवा के महा अभियान कार्यक्रम के तहत वार्ड की जनता को सैनिटाइजर और मांस्क बांट रहीं हैं


लेकिन कोई पार्षद महोदय से भला यह भी पूछे कि जब वार्ड में संक्रमण से लोग अपनों को खो रहे थे तब यह कहां थीं ?


जब पूरे वार्ड में संक्रमण तेजी से फैल रहा था तब यह वार्ड के लोगों का सहारा क्यों नहीं बन पाईं ?


जब वार्ड के जरूरतमंद लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे तब इन्होंने लोगों की मदद के लिए हाथ क्यों नहीं बढ़ाया ?


क्या इनका कर्तव्य सिर्फ पार्टी के लिए समर्पित होना है जनता के दुख दर्द से इन्हें कोई सरोकार नहीं है ?


क्या यही एक प्रतिनिधि का जनता के प्रति कर्तव्य होता है ?


✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट ✒️

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