रेवांचल टाइम्स न्यूज़ .. डिंडोरी जिला मुख्यालय सहित बजाग विकासखंड मे बेपरवाह अधिकारी कर्तव्य से नदारद- एक ओर जहां मौसम विभाग ने कई दिन पहले से ही मौसम के खराब होने और धान खराब होने की संभावना जताई थी वहीं सरकार और उच्चाधिकारी भी इस बात को लेकर नियम और निर्देश दिए थे जिसका धरातल पर किसी भी तरह से पालन नहीं किया गया। आखिरकार किसानों का धान पानी में भीग रही है वहीं धान खरीदी केन्द्रों में धान को बरसात से बचाने के लिए किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं की गई।
आपको बता दें कि आज सुबह से ही किसानों के द्वारा खरीदी केंद्र में अपने मेहनत की कमाई को सुपुर्द करने के लिए बहुत आवाज उठाई पर किसी ने भी उनकी ना सुनी नतीजा किसानों से उनकी मेहनत की कमाई को गीला होने और भींगने के लिए छोड़ दिया गया है। दौड़ दौड़ कर किसानों के द्वारा अपनी धान को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद चल रही है। जिस धान को कमाने के लिए किसानों को कितनी मुश्किल और मेहनत का सहारा लेना पड़ता है।इसके लिए दिनभर किसानों ने धान को बचाने और देने के लिए काफी गुहार लगाई गई लेकिन अधिकारियों ने ना तो उनकी धान को सुरक्षित ढकने के लिए व्यवस्था की और ना ही पानी को भगाने के लिए नालियां बनाई गई बेचारे किसान दिन भर से भूखे प्यासे यहां पर लगे रहे कि हमारी धान की बिक्री हो जाए पर बिक्री नहीं हो पाई देखते ही देखते शाम तक उनका धान गीला हो गया जहां पर देखो पानी ही पानी भरा नजर आ रहा था। किसानों के द्वारा धान को सुरक्षित रखने के लिए यहां से वहां कई जगह रखा भी गया परंतु सुरक्षित नहीं रहा उनका धान पूरे ग्राउंड में पानी भर गया। जिसके कारण किसानों का अनाज हजारों क्विंटल की तादाद पर गीला हो गया बेचारे किसान हफ्तों यहां पर गुजारे पर उनकी धान रखी की रखी रह गई। अपना दर्द बयां करते किसानों की आंखों में आंसू भी आ गए, आज आसमान के साथ किसान भी रो दिए बस नहीं रोया तो खाद्यान विभाग का दिल। अब बेचारे किसान हाथ में हाथ रखकर बैठे हुए हैं कुछ लोगों का कहना है कि जिस दिन से हमारे पास मैसेज आया है उसी दिन से हम यहां पर धान लेकर आ गए हैं। किसी को 3 दिन किसी को 4 दिन हो गए पर उनकी धान नहीं खरीदी गई। अब बेचारे किसान क्या करें उनकी समझ में नहीं आ रहा किसानों का मानना है कि इससे बेहतर तो साहूकार को दे दें जिससे कि समय की भी बचत होगी और इतना मेहनत भी नहीं करना पड़ता। ठंडी के कारण बिचारे रात में सो भी नहीं पाते ऐसी कोई व्यवस्था भी नहीं यहां पर जिससे कि रात काटी जा सके। अब तो बरसात होने से अपनी फसल को तकने के लिए गीले में ही सोना पड़ेगा। क्योंकि आज भी रहने,खाने ठंडी छाया की व्यवस्था भी नहीं है। जिससे कि किसान आराम से बिस्तर लगा कर भी सो सकें।
किसानों की स्थिति अब कुछ इस प्रकार हो गई है कि जैसे घर का ना घाट का। बेचारी किसान अपनी धान को खराब होते देखकर उनकी आंखों में आंसू भी आ गए कि हम इतनी कड़ी मेहनत करके रात दिन एक कर के फसल को तैयार करते हैं और यहां पर लाने के बाद खराब होते देखकर आंखों से आशु निकलने लगते हैं अधिकारी इतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं कि मौसम को देखते हुए भी किसानों के धान को सुरक्षित नहीं करा सके बेचारे किसान आखिरकार गुहार लगाएं तो किसके सामने लगाएं। उनकी बातें सुनने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा खरीदी केंद्र में किसानों के अलावा अधिकारी भी नहीं दिख रहे अपने अपने ठिकानों पर जा करके बैठ गए बेचारे किसान को किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं कहां पर रुके ठंडी का इतना ज्यादा प्रकोप उनके पास किसी प्रकार की व्यवस्था भी नहीं दिखाई दे रही। अब हुक्मरानों से सवाल यह है कि इतनी ज्यादा मात्रा में धान खरीदी में लापरवाही और खरीदी हुई धान की परिवहन और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। किसानों की खराब हुई धान को विभागीय अमला कैसे खरीदेगा जिससे किसानों को नुक्सान ना वो।
मेरी धान तौल और सिलाई हो गई है पर गिनती और उठाई ना होने के कारण गीली हो गई है अब हम क्या करें - माखन सिंह, किसान, ग्राम बिलाईखार
मेरी अस्सी कट्टी धान लाईट बंद होने के कारण लेट से सिलाई हुई है, और अब पानी आने से भींग गई है- भौरू सिंह, किसान ग्राम बिलाईखार
लाईट बंद होने से सिलाई नहीं होता, हम तो खुद बोरा भरने और ढोने का काम किया की जल्दी हो सके पर आज तक धान नहीं उठ पाया और हम लोग अब धान भींगने से परेशान हैं- महेंद्र सिंह, किसान ग्राम पथरिया
छः तारिख से धान लेकर आया हूं आज तक मेरी धान खरीदी नहीं हो पाई है, पूरी धान गीली हो गई है मैदान में पानी भरने से धान की बोरी डूब गई है- केसलाल, किसान ग्राम पंडरिया डोंगरी
बरसात ने अपनी जान बचाने तर बतर किसान
विभागीय अधिकारी की मनमानी के चलते परिवहन में लापरवाही से भींगी पूरे जिले की धान
रेवांचल टाइम्स प्रमोद से पड़वार की खास रिपोर्ट सच के साथ
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