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Friday, January 14, 2022

मकर संक्रांति और उससे जुड़ी कथाएं...



रेवांचल टाइम्स - आज 14 जनवरी 2022 दिवस शुक्रवार 'यूं तो भारतवर्ष विभिन्न सामाजिक धार्मिक और राष्ट्रीय पर्व की भूमि है ' इन्हीं में से एक मकर संक्रांति का पर्व भी है । जो नेपाल सहित संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है |

कहा जाता है कि इस दिन अखिल विश्व को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि की मकर राशि में प्रवेश करते हैं । भारत भूमि के अनेकानेक ज्योतिर्विदों  ने इस रहस्य पर प्रकाश डाला है | यह भी कहा जाता है 'कि इस दिन भगवान श्री हरि ने हजारों वर्षो से चल रहे देवासुर संग्राम को रोक कर मानव जाति को शांति का संदेश दिया था । इसके अतिरिक्त एक मान्यता यह भी है ' कि महाभारत कालीन पितामह भीष्म ने अपनी इच्छा मृत्यु के वरदान के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही अपने नश्वर शरीर का परित्याग कर माता गंगा की शरण को प्राप्त किया था |इसी के साथ जुड़ी है इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व | इससे जुड़ी एक वैदिक मान्यता जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है |

            एक बार ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती आकाश मार्ग से मकर संक्रांति काल में जा रहे थे ,तभी लाखों लोगों की भीड़ दिखाई दी यह देखकर पार्वती ने शिव जी से पूछा -  कि प्रभु यह सब क्या हो रहा है ?इतने लोग कहां जा रहे हैं ? तभी शिव जी ने बताया कि आज मकर संक्रांति का पर्व है यह सब गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं । जो सच्चे मन - कर्म से इस दिन गंगा स्नान करता है वह मोक्ष को पाता है । पार्वती ने उत्सुकता से पूछा - कि इतने सभी को मोक्ष की प्राप्ति होगी ना प्रभु ।शिव जी ने कहा नहीं पार्वती इनमें से कोई विरला ही होगा जिसे मोक्ष की प्राप्ति होगी |पार्वती ने कहा वह कैसे ? तब शिवजी ने कहा चलो परीक्षा ले लेते हैं 1 शिव जी ने वृद्ध दुर्बल और कोढी काया का रूप लिया पार्वती ने अति मोहनी स्वरूप नवविवाहित  युवती का रूप लेकर गंगा किनारे एक वृक्ष के नीचे बैठ गए |देखते ही देखते हजारों और लाखों लोग उनके पास से गुजरे किसी को भी कोई तरस ना आया | जिसने भी देखा तो पार्वती को पाने की लालच से देखा । सुबह से शाम हो चली कितने लोगों ने गंगा घाट पर मल मूत्र का त्याग किया उसकी पवित्रता को नष्ट किया। रोगी को देखकर थूथू किया 'और नवविवाहिता से प्रेम प्रसंग की बात की ।अंत में एक बूढ़े व्यक्ति ने आकर पूछा - बेटी यह कौन है ? और यहां चुप क्यों बैठे हो ? युवती ने उत्तर दिया -  पिता जी यह मेरे पति हैं मैं इन्हें गंगा स्नान कराने लाई हूं । तभी उस बूढ़े ने हाथ पकड़ कर उस रोगी को गंगा स्नान कराया उन दोनों को भोजन कराया और उन्हें विदा किया | अपने असली स्वरूप में आकर  शिवजी ने पार्वती से कहा देखा पार्वती गंगा मैया की कृपा से उस बूढ़े को ही मोक्ष की प्राप्ति हुई |

       आज मानव जाति ऐसे ही लोभी लालची और स्वार्थी होते जा रही है । 

युगों युगों से प्रवाहित होने वाली नदियों की पवित्रता पर प्रदूषण का संकट गहरा रहा है । वन्य जीव और वन संपदा का अस्तित्व खतरे में है |मानव अब प्रकृति का सहयोगी ना होकर उसका शत्रु बनते जा रहा है |प्रकृति से विमुख होकर अट्टालिकाओं  में कितना सुखी है मानव यह देखा जा सकता है ।

   

 रेवांचल टाइम्स मवई से मदन चक्रवर्ती |

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