रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला जहां तकरीबन ग्रामीण क्षेत्रों मे गरीब एवं सीधे साधे लोग निवासरत है, जो यहां के क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सकारात्मक सोच और शासन की प्रति कार्य मे इक्षा शक्ति की कमी या लापरवाही से जिला का विकास प्रदेश के सबसे नीचे पायदान मे स्थापित होते नजर आ रहा है, यह नहीं की हम किसी एक योजना पर बात नही कर रहे जिस भी योजना पर नजर दौड़ाई जाए तो वहां केवल भ्रष्टाचार या लापरवाही ही नजर सामने नजर आती है, हां योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों मे दर्शाते हुए,आला अधिकारी वाहवाही लूटने से नही चूक रहे हैं। इन्ही सब बातों को लेकर कलेक्टर आकस्मिक निरीक्षण के दौरान उन्हें भी जिले की सच्चाई समझ मे आ रही होगी, इसलिए लापरवाही को संज्ञान मे लेकर कार्यवाही करने मे नही चूक नहीं है जो काबिले तारीफ है, अभी हाल मे शासकीय भवनों के निर्माण कार्यों पर उनकी विशेष नजर है। फिर भी जिले के आला अधिकारी सफाई के साथ कागजों मे फर्जी जानकारी देने मे नही चूक रहे, पर सच्चाई की पोल मीडिया द्वारा समाचार प्रकाशन या कलेक्टर के आकस्मिक दौरा के दौरान सामने निकल कर आ जाती है। विभाग की कार्यशैली पर आश्चर्य तो तब होता है की विभाग के जिम्मेदारों ने जिले की आंगनवाड़ियों की बाउंड्री वाल बनाने की पहल और आदेश के पहले - (पानी और भवन विहीन एवं जर्जर कक्षों में संचालित आंगनवाड़ियों) की जानकारी जिला विभागीय अधिकारियों को क्यों नहीं दी?
मण्डला/निवास -जिला महिला बाल विकास विभाग के जिम्मेदारों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों की बदहाल व्यवस्था को नजरअंदाज कर शासन के निर्देशों को लेकर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, 16 जनवरी 2023 को जिला कार्यक्रम अधिकारी-महिला एवं बाल विकास जिला मण्डला के पत्र क्रमांक 2023/301 में उल्लेख के अनुसार जिले सहित निवास विकासखंड की 64 आंगनवाड़ी जो बॉउंड्री विहीन हैं इनमें बॉउंड्री वाल का निर्माण किया जाना था लेकिन सूखे के महीने छोड़कर बरसात के एक माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद देखने में यह कार्य धरातल में नहीं नजर आ रहा? वहीँ आज भी कई आंगनवाड़ी भवन विहीन होने से रंगमंच में और दशकों पुराने कमरों में संचालित हो रहीं हैं, अतः विभाग पहले उस कार्य को प्राथमिकता क्यों नहीं देता जिसकी पहले जरुरत है, वहीं कुछ आंगनवाड़ी की हालत तो इतनी जर्जर है कि बरसात में कार्यकर्ता/सहायिका सहित नन्हे बच्चों को छाता लगाकर बैठने की नोबत बनी हुई है। इतना ही नहीं विभागीय मिलीभगत से ग्रामपंचायत पद्दीकोना द्वारा पाँच वर्ष पूर्व बनाई गयी आंगनवाड़ी भवन का विभाग ने रंगरोगन कर नया निर्माण बताकर शासकीय राशि को खुर्दबुर्द किये जाने का संदेह नजर आ रहा है जो निःपक्ष जाँच में सामने आ जायेगा।
पूर्व में आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना मे हुआ भ्रष्टाचार -
बतादें कि इसके पूर्व मे जिले की आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना पर हर विकासखण्ड मे करीबन नौ आंगनवाड़ी केन्द्रों को आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र बनाने हेतु हर केन्द्र के लिए लगभग 50-50 हजार दी गई थी, जिसमे आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवनों का विकास किया जाना था किन्तु जिम्मेदारों ने हल्के फुल्के कार्य कराकर पूरी राशि कार्य कराये जाने मे दर्शा दिया, और भ्रष्टाचार को बड़ी ही सफाई से अंजाम दिया गया। जिसका जीता जागता उदाहरण आदर्श आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक दो रामनगर विकास खण्ड बिछिया और निवास विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पद्दीकोना का है, यही हाल जिले की और भी कई आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों का है। फर्जी बिल लगाकर निकाली गई थी राशि शिकायत होने पर नही की गई कार्यवाही। इन फर्जी बिलों की जांच होने पर हो सकता है बड़ा खुलासा?
बर्षो बाद भी मासूम बच्चों को नही मिल सका नया भवन-
जानकारी अनुसार विकास खण्ड निवास अंतर्गत ग्राम पंचायत भानपुर बिसौरा मे आंगनबाड़ी केंद्र के भवन निर्माण हेतु बर्ष 2014 मे राशि 10 लाख की स्वीकृत हुई थी और निर्माण का दायित्व ग्राम पंचायत को सौंपा गया था किन्तु पंचायत की घोर लापरवाही और भृष्ट नेता ठेकेदारों ने मनमाने ढंग से कार्य करते हुये अमानक मैटेरियल से बना भवन आज भी अपने अपूर्ण निर्माण की कहानी बंया करते खण्डहर होते जा रहा है।
इतना ही नहीं आज दिनांक तक ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियो ने न ही स्थानीय नेताओं ने इस भवन का संपूर्ण कार्य कराकर विभाग को सौप सका, यही कारण है कि ग्राम के बच्चों को असुविधाओं के बीच रंगमंच मे बैठाकर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। और निवास महिला बाल विकास के अधिकारी और सुपरवाइजर सब खामोश रहकर शासन की मंशा को धता बता रहे हैं।
निवास तहसील जनपद निवास में ऐसे दर्जनों आंगनबाड़ी केन्द्र मिल जाएंगी जिनका संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा अगर अवलोकन किया जायेगा तब हकीकत स्वतः सामने सामने आ जायेगी निवास मुख्यालय से पाँच किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत अमगवां में बना आंगनवाड़ी भवन तो इतना जीर्ण शीर्ण हो चुका है कि कक्ष में महज चार बच्चों के बैठने लायक सीलनभरी जगह ही बची है, पूरा छत टपक ही नहीं रहा बल्कि फर्श भी जगह 2 से उधड़ गया है और लाचार आशा कार्यकर्ता/सहायिका लगभग दिनभर खड़े होकर बच्चों का मनबहलाव करने मजबूर हैं। वहीं जिल्हटी पंचायत के चौदस ग्राम की आंगनवाडी है जो अधूरेपन की कहानी बंता कर रही है। उक्त सभी की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत थीं।वहीं भोजन के समय और भी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
जलजीवन मिशन योजना के द्वारा बनाया गया पेयजल प्लेटफार्म बिना जल और टोंटियों के साथ दिखावे के लिये रखी पानी की टंकी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पानी फेर रहीं हैं।
इनका कहना है -
सरकार की मंशा अनुसार आंगनवाड़ियों में शिक्षा के साथ नन्हे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास सहित कुपोषण बीमारी आदि से बचाने के लिये आंगनवाड़ियां संचालित हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही कहें या जिम्मेदारों की भृष्ट कार्यशैली कि आज भी जिले में कई दर्जनों आंगनवाड़ियों का संचालन किसी के घर या बदहाल हो चुके केंद्रों में हो रहा है, विभाग द्वारा इनका जीर्णोद्धार समय पर न कराकर जिस कार्य की (बॉउंड्री वाल) तत्काल आवश्यकता नहीं है उस पर राशि खर्च करना न्याय संगत नहीं लगता।
उदय सिंह चौधरी
बसपा जिलाध्यक्ष मण्डला


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