सावन का महीना पूजा-पाठ के लिए बेहद ही खास माना गया है और इस माह आने वाले सभी व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है. कहते हैं कि सावन में आने वाले व्रत-त्योहारों के दिन यदि विधि-विधान से पूजन किया जाए तो भगवान शिव समेत सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. (Somvati Amavasya 2023) पंचांग के अनुसार आज यानि 17 जुलाई को सावन माह की अमावस्या तिथि है जिसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. वहीं कुछ जगहों पर इसे हरियाली अमावस्या नाम भी दिया गयाय है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान की परंपरा है. कहते हैं कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. साथ ही सोमवती अमावस्या के दिन व्रत भी रखा जाता है और सुहागिनों के लिए इस व्रत की विशेष महिमा है. (Somvati Amavasya Vrat Katha: आज यानि 17 जुलाई को सावन माह की अमावस्या तिथि है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व माना गया है.) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन पूजा के बाद व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए.
सेामवती अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक प्रतापी राजा थे. उनका एक बेटा और एक बहू थे. एक दिन बहू ने चोरी से मिठाई खा ली और नाम चूहे का लगा दिया. जिसकी वजह से चूहे को बहुत गुस्सा आ गया. उसने मन ही मन निश्चय किया कि चोर को राजा के सामने लेकर आऊंगा. एक दिन राजा के यहां कुछ मेहमान आए हुए थे. सभी मेहमान राजा के कमरे में सोये हुए थे. बदले की आग में जल रहे चूहे ने रानी की साड़ी ले जाकर उस कमरे में रख दी. जब सुबह मेहमानों की आंखें खुली और उन्होंने रानी का कपड़ा देखा तो हैरान रह गए. जब राजा को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी बहू को महल से निकाल दिया.
रानी रोज शाम में दिया जलाती और ज्वार उगाने का काम करती थी. रोज पूजा करती गुड़धानी का प्रसाद बांटती थी. एक दिन राजा उस रास्ते से निकल रहे थे तो उनकी नजर उन दीयों पर पड़ी. राजमहल लौटकर राजा ने सैनिकों को जंगल भेजा और कहा कि देखकर आओ वहां क्या चमत्कारी चीज थी- सैनिक जंगल में उस पीपल के पेड़ के नीचे गए. उन्होंने वहां देखा कि दीये आपस में बात कर रहे थे. सभी अपनी-अपनी कहानी बता रहे थे. तभी एक शांत से दीये से सभी ने सवाल किया कि तुम भी अपनी कहानी बताओ. दीये ने बताया वह रानी का दीया है. उसने आगे बताया कि रानी की मिठाई चोरी की वजह से चूहे ने रानी की साड़ी मेहमानों के कमरें में रख दी और बेकसूर रानी को सजा मिल गई. यह सारी बातचीत सैनिकों ने महल में आकर राजा को बताई जिसके बाद राजा ने रानी को माफ कर दिया और महल वापस बुला लिया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. रेवांचल टाईम्स इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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