रेवांचल टाईम्स - मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है। राजनीतिक दलों में टिकट चयन की प्रक्रिया जारी है। इन दलों के नेताओं की आदिवासी बाहुल्य पश्चिम निमाड़ के खरगोन-बड़वानी जिले की दस विधानसभा सीटो पर खास नजर है। ऐसा माना जाता है कि इन दो जिलों की दस विधानसभा सीटों में अधिकांश जिस दल के पाले में गयी। प्रदेश की सत्ता पर उसी दल का कब्जा माना जाता है। 2018 में इस जिले की दस में से आठ पर कांग्रेस, एक पर भाजपा तथा एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने विजय हासिल की थी। काँग्रेस को मिली इस विजयी से प्रदेश में कमलनाथ के नैतृत्व में कांग्रेस की सरकार काबिज हुई थी। वर्ष 2018 में बनी कांग्रेस सरकार का 15 माह बने रहने के बाद तख्ता पटल होना एक अलग कहानी का हिस्सा है। कहने का आशय साफ है। पश्चिम निमाड़ की चाबी से मध्यप्रदेश की सत्ता का ताला खुलता है। मध्यप्रदेश की सत्ता को प्राप्त करने के लिए अब सम्पूर्ण प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पड़ताल शुरू कर दी है। कहीं-कहीं तो उम्मीदवारों के नामो पर हाईकमान की मोहर भी लग गयी है। भाजपा द्वारा प्रदेश में घोषित 39 उम्मीदवारों में इस जिले के दो उम्मीदवार भी घोषित किये गए है। निमाड़ की इन दस विधानसभा सीटों पर अब क्या हलचल है। क्या कांग्रेस 2018 का परिणाम दोहरा पाएगी ? मौजूदा विधायकों में किन चेहरों पर परिवर्तन की गाज गिरने वाली है ? कौनसे चेहरे फिर से दोहराए जा सकते है ? प्रदेश की सत्ता तक पहुचाने वाले पश्चिम निमाड़ के खरगोन-बड़वानी जिलों की दस विधानसभा सीटों का हाल जानना मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिहाज से बेहद आवश्यक जान पड़ता है। पश्चिम निमाड़ का महत्व जानने के लिए आपको इस क्षेत्र के उन ख्यातनाम चेहरों को जानना जरूरी है जो न सिर्फ मध्यप्रदेश की राजनीति में ऊंचाइयों को छू सके है। इन नामो ने राष्ट्रीय राजनीति में भी निमाड़ का नाम रोशन किया। उन शिखर पुरुषों में पूर्व सासंद स्व.रामचन्द बडे जो दो बार लोकसभा सभा सदस्य रहे, इन नामों में स्व.सुभाष यादव का नाम लंबे समय तक निमाड़ की राजनीति में चर्चित रहा है। वें दो बार सांसद रहे, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सहित अनेको पदों पर काबिज रहे है। पूर्व सांसद स्व.रामेश्वर पाटीदार ने इस लोकसभा क्षेत्र का पांच बार नैतृत्व किया है। ताराचंद पटेल, कृष्णमुरारी मोघे, सुभाष पटेल, मकनसिंह सोलंकी भी लोकसभा के सदस्य रह चुके है। अरुण यादव लोकसभा सदस्य के साथ मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे, विजयलक्ष्मी साधौ राज्यसभा सदस्य के पद पर काबिज रही, कैबिनेट मंत्री का दायित्व भी एक से अधिक बार वहन कर चुकी है, वर्तमान में महेश्वर से विधायक है, बाला बच्चन कमलनाथ सरकार में गृहमंत्री रहे है, उन्होंने विपक्ष के नेता सहित एक से अधिक बार कैबिनेट मंत्री का दायित्व निभाया है। गजेंद्र पटेल मौजूदा लोकसभा के सदस्य है, सुमेरसिंह सोलंकी राज्यसभा सदस्य है। अंतरसिंह आर्य ने तीन बार कैबिनेट मंत्री का दायित्व संभाला है। सचिन सुभाष यादव कसरावद के वर्तमान विधायक भी कैबिनेट मंत्री रह चुके है। प्रेमसिंह पटेल बड़वानी जिले के एकमात्र भाजपा विधायक है, जो प्रदेश की शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद संभाल रहे है। निमाड़ की खरगोन-बड़वानी लोकसभा लगातार तीसरी बार भाजपा के पक्ष में गयी है। इस संसदीय क्षेत्र के वर्तमान लोकसभा सदस्य गजेंद्र पटेल है। भाजपा द्वारा 2009 एवं 2014 के लोकसभा चुनावों में चेहरे बदलकर जीत दर्ज की थी। पश्चिम निमाड़ इन नेताओं के माध्यम से प्रदेश एवं राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रभावी पहिचान रखता है। भाजपा-कांग्रेस से जुड़े इन चेहरों के नाम से प्रदेश की राजनीति अब भी चल रही है। जनसंघ के पूर्व सांसद स्व. रामचन्द विट्ठल बड़े द्वारा निमाड़ के आदिवासी किसानों के साथ वन अधिकार पट्टों के लिए दिल्ली तक की गई पदयात्रा, एमपी के किसानों की समस्याओं के लिए पूर्व सांसद, मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व.सुभाष यादव द्वारा अपनी ही सरकार के विरुद्ध राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऐतिहासिक चक्का जाम अब भी निमाड़ के जहन में बसा हुआ है। स्व.सुभाष यादव निमाड़ की राजनीति के बड़े चेहरे रहे है। एमपी कांग्रेस राजनीति में उनका लंबे समय तक निर्यायक हस्तक्षेप रहा है। इस निमाड़ में वर्ष 2008 एवं 2013 के विधानसभा चुनाव में अधिकांश सीटों पर भाजपा विजयी रही। प्रदेश में भाजपा सरकार का परचम लहराया था। जैसे ही निमाड़ के रुख में परिवर्तन आया कांग्रेस के कमलनाथ प्रदेश की सरकार के मुखिया बने। प्रदेश में दलबदल से सरकार का परिवर्तन इस प्रक्रिया में अपवाद माना जा सकता है। वर्तमान में खरगोन विधानसभा से रवि जोशी, महेश्वर से विजयलक्ष्मी साधौ, कसरावद से सचिन सुभाष यादव, भीकनगांव से झूमा सोलंकी, बड़वाह से सचिन बिरला जो कांग्रेस से विजयी हुए थै, खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी। भगवान पूरा से निर्दलीय केदार डावर, बड़वानी से प्रेमसिंह पटेल, राजपुर से बाला बच्चन, सेंधवा ग्यारसीलाल रावत,पानसेमल विधानसभा क्षेत्र से चंद्रभागा एमएलए है। कांग्रेस का 2018 के प्रदर्शन को दोहरा पाना अब उतना आसान नहीं है। निमाड़ के मतदाताओं ने भाजपा-कांग्रेस को समय-समय पर मौका दिया है। विधानसभा और लोकसभा में इस क्षेत्र के लोगो की पंसद अलग-अलग है। लोकसभा के तीन चुनाव में लगातार भाजपा यहां से विजयी रही है। जिले की भीकनगांव और बड़वाह विधानसभा खंडवा लोकसभा में शामिल है। विधानसभा चुनाव 2023 में निमाड़ की इन विधानसभा सीटों में किसे बहुमत हासिल होगा। कहना मुश्किल है। भोपाल-दिल्ली से मिल रही सूचनाओं के आधार पर यह कयास लगाए जा रहे है कि मौजूदा विधायको में 6 से 7 पुनः टिकिट प्राप्त कर सकते है। इनमें केदार डावर भगवानपूरा निर्दलीय से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हो सकते है। सचिन बिरला भाजपा के टिकिट पर चुनाव लड़ सकते है। विजय लक्ष्मी साधौ, सचिन यादव, झूमा सोलंकी, रवि जोशी, बाला बच्चन को कांग्रेस से टिकिट मिलने की पूर्ण संभावना दिखाई दे रही है। प्रेमसिंह पटेल बड़वानी से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते है। भाजपा ने कसरावत से आत्माराम पटेल और महेश्वर से राजकुमार मेव को अपना उम्मीदवार बनाया है। बड़वानी से कांग्रेस मकनसिंह सोलंकी, रमेश पटेल या राजन मण्डलोई में से किसी एक को अपना उम्मीदवार बना सकती है। राजपुर में बाला बच्चन कांग्रेस के सामने पूर्व भाजपा उम्मीदवार अंतरसिंह पटेल की उम्मीदवारी की चर्चा है यहां पूर्व सांसद सुभाष पटेल भी दौड़ में शामिल है। सेंधवा में कांग्रेस के वर्तमान विधायक ग्यारसीलाल रावत को टिकिट प्राप्ति में खासी मशक्कत करना पड़ रही है। यहां पोरलाल खरतें, मोंटू सोलंकी, सुभद्रा परमार दौड़ में शामिल है। भाजपा अंतरसिंह आर्य, विकास आर्य रेलास सेनानी में से किसी एक पर दांव लगा सकती है। अंतरसिंह आर्य इस विधानसभा से 6 से अधिक बार भाजपा के उम्मीदवार रहे है। पानसेमल में चन्द्रभागा किराड़े को भी टिकट प्राप्ति में परिश्रम करना पड़ रहा है। राजू पटेल, प्रकाश खेड़कर, राजेश कनोजे, गजांनाद ब्राह्मणे, जितेश्वर जाधव दौड़ में शामिल है। भाजपा नया चेहरा मैदान में उतार सकती है। जिनमे श्याम बरडे, प्रोपेसर प्रकाश सोलंकी शामिल है टीम में दीवानसिंह पटेल का नाम भी सम्मिलित है। खरगोन से रवि जोशी को काँग्रेस से टिकिट मिल सकता है। भाजपा से लंबी सूची है खास नामो में बालकृष्ण पाटीदार, बाबूलाल महाजन, राजेन्द्र राठौड़, कैलाश अग्रवाल के नाम शामिल है। भीकनगांव से कांग्रेस की मौजूदा विधायक झूमा सोलंकी का टिकिट लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा से गुलाब वास्कले, सरदार रावत, नंदा ब्रह्मणे का नाम टीम में शामिल है। बड़वाह सचिन बिरला भाजपा से तय उम्मीदवार मॉने जा रहे है। यहां कांग्रेस नरेंद्र पटेल , इंदर बिरला में से किसी एक को अपना उम्मीदवार बना सकती है। इस तरह निमाड़ में कांग्रेस-भाजपा दोनों में टिकिट चयन को लेकर गहन मंथन जारी है। दोनों प्रमुख राजनतिक दलों ने अपने सर्वे स्वयं कराए है। एजेंसियों से भी सर्वे कराया है। दोनों प्रमुख दल जनप्रतिधियों एवं आमजनों से भी चर्चाकर फीडबैक निकाल रहे है। उम्मीदवारों के चयन में जीत पहली प्राथमिकता बन गयी है। यहीं कारण है कि मौजूदा विधायको एवं वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटकर जीत की संभावना वाले उम्मीदवार को टिकट देने पर विचार किया जा रहा है। निमाड़ याने नीम की आड़। नीम अपने कड़वे एवं स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण जाना जाता है, यह छायादार भी बहुत होता है। निमाड़ का जनादेश भी प्रदेश की सेहत को ठीक रखने वाला होगा। वर्ष 2023 के अंत मे होने जा रहे विधानसभा चुनाव में निमाड़ का फैसला खासा मायने रखता है। मध्यप्रदेश की सत्ता का ताला निमाड़ की चाबी से ही खुलता है। इस चाबी को प्राप्त करने के लिए दोनों प्रमुख दल हर सम्भव प्रयास कर रहे है। टिकिट चयन के बाद निमाड़ के रुख का अनुमान लगाया जा सकता है।
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नरेंद्र तिवारी पत्रकार

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