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मुरकूटा में सावन की अंतिम सोमवार पर निकाली गई कांवर पदयात्रा - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Wednesday, August 30, 2023

मुरकूटा में सावन की अंतिम सोमवार पर निकाली गई कांवर पदयात्रा

 



दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है। इस साल पूरे 19 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है कि सावन कुल 59 दिनों का हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण अधिक मास का होना है। सावन में कावड़ यात्रा का बहुत अधिक महत्व है। इसमें लोग भगवा वस्त्र धारण करके पवित्र  नर्मदा के जल को एक कांवर में बांधकर पैदल चलते हुए शिवलिंग पर उस जल को चढ़ाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त परशुराम ने पहली बार इस कांवड़ यात्रा को सावन के महीने में ही शुरू किया था। ऐसी ही एक और मान्यता है कि श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उनको कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार लाए थे। इसके साथ ही श्रवण कुमार वापस आते वक्त गंगाजल भी लेकर आए थे और इसी जल से उन्होंने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया था। जिसमें भाई बहन नाला से भारी सख्या मे भक्तों की टोली कावड़ यात्रा भाई बहननाला से 26 की रात को माँ नर्मदा जी गये थे जिसमें श्रद्धालु की सख्या अधिक तादात मे रहा है। इसकी के साथ कांवड़ यात्रा भी शुरू हो चुकी है। सावन माह में शिव भक्त गंगातट यानि माँ नर्मदा पर कलश में गंगाजल भरते हैं और उसको कांवड़ पर बांध कर कंधों पर लटका कर अपने अपने इलाके के शिवालय में लाते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं। कांवड़ यात्रा को लेकर शिवभक्तों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा करने से भगवान शिव सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं और जीवन के सभी संकटों को दूर करते हैं। पुराणों में बताया गया है कि कांवड़ यात्रा भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सहज रास्ता है।यात्रा में मुखरूप से
जिस मे दीपक बंजारा नारायण बंजारा सुनील शिवहारे संतोस राय  रमन बंजारा नरेश बंजारा गणेश बंजारा लक्ष्मी राय  सुशील बंजारा   सहित भारी संख्या मे सम्लित रहे शिव भक्त


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