रेवांचल टाईम्स - संविधान के अनुच्छेद- 40 में राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करने के लिए कदम उठाएगा और उनको ऐसी शक्तियां एवं अधिकार प्रदान करेगा जो उन्हे स्वायत शासन की इकाईयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने हेतु आवश्यक हों।पंचायतीराज व्यवस्था को एकरुपता प्रदान करने के उद्देश्य से म.प्र. पंचायत अधिनियम 1962 बनाया गया।इस अधिनियम के तहत 1965,1970 तथा 1978 में पंचायतीराज चुनाव कराए गए। अनुभव एवं व्यवहार के आधार पर मध्यप्रदेश पंचायत अधिनियम 1981 और फिर संशोधन कर अधिनियम 1990 बनाया गया।सन् 1992 में संविधान में 73 वां संशोधन हुआ। उसमें पंचायतों के चुनाव और उनके अधिकारों के लिए ढांचा बना।इस तरह संविधान के भाग- (9) में पंचायतों के लिए अलग व्यवस्था की गई। भाग-(9) के यही प्रावधान पंचायतों के उपबंध कहलाए।
मध्यप्रदेश देश का सबसे पहला राज्य है जिसने भारतीय संविधान के 73 वें संशोधन अधिनियम 1992 के अनुरूप मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 तैयार कर प्रदेश की विधानसभा से पारित किया।दिनांक 25 जनवरी 1994 को महामहिम राज्यपाल महोदय की स्वीकृति प्राप्त होने पर इसे 26 जनवरी 1994 से प्रदेश में इसे प्रभावशील किया गया।संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के अनुच्छेद 243(छ) की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों से सबंधित ग्रामीण क्षेत्र में चलाई जा रही योजनाओ/ कार्यक्रमों को त्रिस्तरीय पंचायतों को हस्तांतरित किया गया।पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश को पंचायतीराज व्यवस्था देकर गांवों को मजबूत करने के महात्मा गांधी के सपने को पूरा किया।
डॉक्टर अशोक मर्सकोले विधायक निवास, मंडला

No comments:
Post a Comment