रेवांचल टाईम्स - मण्डला आदिवासी बाहूल्य जिले में मध्यप्रदेश सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ऐंडी-चोटी का जोर लगा रही हैं, वहीं विपक्षी दलों ने भी कदम से कदम मिलाकर अपना सिक्का मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। वहीं सरकार एवं शासन-प्रशासन ने राज्य तथा जनता के विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से 29 हजार करोड़ रुपए लोन ले चुकी है,परन्तु शासन-प्रशासन की योजनाओं की धज्जियां उड़ाते हुए मण्डला जिले की लोक निर्माण विभाग ने सरकार को खुली चुनौती देकर स्पष्ट किया कि वह सरकार के मंसूबे पर पानी फेरते हुए आवंटन राशियों का बंदरबांट कर निर्माण एवं विकास कार्यों को ठेकेदारों के बुल्डोजर के नीचे नस्तनबूत कर दिया गया। वही मामले को लेकर जिम्मेदारों से सवाल-जवाब हेतु दैनिक समाचार पत्र की ओर से अजीत पटेल द्वारा लोक निर्माण विभाग कार्यपालन यंत्री शारदा सिंह की व्यस्तता एवं अभद्रतापूर्वक स्वभाव को देखते हुए समाचार पत्र द्वारा आमजनता के सवालों का जवाब मांगने हेतु प्रतिनिधि स्वरुप 03/07/2023 को कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग मण्डला, जिला कलेक्टर महोदय मण्डला एवं पत्रकार संगठन को पत्र लिखकर लोक निर्माण विभाग से सवाल-जवाब का समय मांगा गया जो आज एक महिने से अधिक हो गया, परन्तु जिम्मेदारों की उदासीनता एवं भ्रष्टाचारी का स्तर इस कदर हावी हो चुका है कि जिम्मेदार सच्चाई बताने से छुप रहे हैं कभी प्रशासनिक कार्य की व्यस्तता बताकर, कभी टीएल, जनसुनवाई, वीसी, कभी मनमानी बैठक तो कभी कोरोना जैसी वैश्विक बिमारी का सहारा लेकर याददाश्त कमजोर होने का बहाना बताकर।
याददाश्त कमजोर होने के बाद भी जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई
जिले में लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी बहुत ही गंभीर एवं अहम होती है।
मण्डला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां जिले में निर्माण एवं विकास कार्यों का सैंकड़ों कार्य अधर में लटका हुआ है,फिर चाहे मण्डला-जबलपुर मार्ग, चुटका मार्ग, बहंगा मार्ग, जन्तीपुर सड़क मार्ग, पुरवा मार्ग ऐंसे सैकड़ों मार्ग और भवनों का निर्माण कार्य है जो अधर पर लटके हुए हैं। नजदीकी जिला डिण्डोरी भी इसी बिमारी से ग्रसित है जहां आज तक कोई भी निर्माण कार्य समय-सीमा पर पूर्ण नहीं हो सका और इन दोनों जिलों के निर्माण एवं विकास कार्यों की जिम्मेदारी बारी-बारी से कार्यपालन यंत्री शारदा सिंह को सौंपी जा चुकी है नतीजा दिए तले अंधेरा और आवाज उठाने वाले पत्रकारों को धमकी,अब तो पत्रकारों पर दहसत इतना हावी हो चुका है कि लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों द्वारा खुलेआम धमकी दी जा रही है।लोक निर्माण विभाग द्वारा आज दिनांक तक आवेदन का जवाब और ना ही जनता के सवालों का जवाब के लिए समय से संबंधित आवेदक को कोई पत्र दिया गया ना ही जनसम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित किया गया।
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा वीसी,टीएल एवं प्रशासनिक बैठकों के दौरान जिले की निर्माण एवं विकास कार्यों का ब्यौरा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जिले से संभागीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रस्तुत करना होता है,वहीं जिम्मेदारों द्वारा याददाश्त कमजोर होने वाली बात आखिर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को कैसे कार्यान्वयन कर सकती हैं। आखिर कौन वापस लाएगा इन जिम्मेदारों की याददाश्त, जो उन्हें याद दिलाए कि विभाग की लापरवाहियों, भ्रष्टाचार, उदासीनता और मनमानी रवैया को लेकर आमजनता के सवालों का जवाब कोई आपसे जानना चाहता है, आज जिम्मेदारों की अभद्रता तथा पुलिस प्रशासन के नाम की धमकी के डर से पत्रकारों की स्थिति यह हो चुकी है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करने से कतरा रहा है, डिण्डोरी जिले की जनता द्वारा भी जिले की मौजूदा अधिकारियों का मनमानी रवैया तथा लापरवाही का क़िस्सा बताया गया है।जिले की जनता पर शासन-प्रशासन को कब दया आयेगी ताकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को उनकी याददाश्त वापस दिलाए और जिले की निर्माण एवं विकास कार्यों को पटरी पर लाया जा सके।


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