जिले के जंगल मे मंडरा रहा खतरा
दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग- वन परिछेत्र पश्चिम
करंजिया अंतर्गत वन्ंग्राम चकरार और ठाड़ पथरा की वनभूमि इन दिनों ऊट,भेड़,बकरियों का चरागाह बनकर रह गई है स्थानीय वन अमले के सरपरस्ती मे दूसरे प्रदेशों से अपनी अजीविका तलासने आये हुए खानबदोस् समूह के लोगो द्वारा हजारों की संख्या मे भेड़ बकरियों द्वारा हरे भरे जंगलो को चराया जा रहा है जिससे वनसम्पदा पर खतरा मंडरा रहा है इसके आलावा इनके पास दर्जनों की संख्या मे ऊट भी है जो हरे भरे बेशकीमती पेड़ो की डालियो और तना तक को तोड़कर खाने का काम करते है जिससे पेड़ अल्प आयु मे ही नस्ट हो जाते है वहीं भेड़ बकरिया बरसात के मौसम मे जंगलो मे निकलने वाले नये पौधो को चट कर रही है वन ग्राम मे रहने वाले ग्रामीणो की माने तो इन चौपया पशुओ को जिस वनभूमि पर चराया जाता है।उस स्थान पर इनके मल मूत्र की तेज दुर्गंध के कारण यहां का चारा घरेलू मवेसी कई महीनों तक नही चरते।ऐसा नही है की यह पहला मौका है जब बाहर के राज्यों के पशुअो के लिए एमपी की हरी भरी वनभूमि चारागाह वनी हो। बताया जाता है की कुछ राजस्थानी खाना बदोश घूमक्क्ड़ जाति के लोग प्रतिबर्ष टोलियो मे आकर हजारों की संख्या मे भेड बकरिया लाकर जिले के जंगलो से होकर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जंगलो तक घूम घूम कर रुक रुक कर बजाग,करंजिया ,दक्षिण सामनापुर तक की वनभूमि मे पशुओ को चराते है जिससे ।जिससे वनो मे निकलने वाले नये पौधे हजारों की संख्या मे इनका भोजन बन जाते है और तो और इनके द्वारा खाये हुए पौधो कीं पुनः उत्पत्ति होना मुश्किल है इस सम्बन्ध मे बनवासी बताते है की वन विभाग के कड़े नियम कानून के बाद भी ये घूमक्क्ड़ टोलिया वन क्षेत्रो मे पशुयो को लेकर बेखौफ घुस जाते है अमले को पूरी जानकारी होने के बाद भी आज तक इन पर कोई कार्यवाही नही करना कई सवालों को जन्म देता है बताया तो यह भी। जाता है की जिम्मेदारों के द्वारा वनभूमि मे पशुओ को चराने के एवज मे टेक्स तक वसूला जाता है रविवार को चकरार के जंगलो के रास्ते हजारों भेड,बकरियों के झुंड को ठाड़पथरा के जंगल की वनभूमि मे चराने के उद्देसेय् से ले जाया गया की जहा से ये छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा तक पहुंच जाएंगे।इस सम्बन्ध मे बिभागीय अधिकारियों से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया परन्तु उन्होंने फोन रिसीव नही किया।



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