रेवांचल टाइम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में स्वस्थ व्यवस्था लचर और वेंटीलेटर में पहुँच चुकी है और निक्कमे जनप्रतिनिधियों ने तो कसम ख़ा रखी है कि जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी केवल उनकी जेब का ख्याल रखे और जो लगे करे गरीब मरता है तो मेरे इन्हें क्या क्योंकि इन गरीबों की याद केवल पांच साल में एक बार ही आती है जब इन्हें इनका बोट की जरूरत होती है फिर तो ये कैसे है कौन इन्हें लूट रहा है कोई मतलब नही है ये फिर अपनी शौक सपाट में इतना मशुरफ हो जाते हैं कि इन्हें गरीबों के साथ क्या हो रहा है कोई मतलब नहीं जिम्मेदार आँख बंद कर लिए है या फिर देखना नही चाहते इसी अनदेखी के चलते आज जिले की स्वास्थ्य केंद्रों में कोई भी अपना इलाज नही करना चाहता या कहे कि पदस्थ अधिकारी कर्मचारी ग़रीबो का इलाज ही नही करना चाहते है क्योंकि अस्पताल में एक डॉक्टर तो किसी मे वो भी नही अगर डॉक्टर मिल भी गया तो दवाई गोली नही मिलती है या फिर नाम के इस सरकारी अस्पताल में पैसा दो तब जाकर इलाज होना संभव होता नही तो भटकते रहो जिसका फायदा ग्रामीण इलाके में बैठे अबैध तरीके से संचालित किलिनिक और बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टरों की बल्ले बल्ले है और सरकारी व्यवस्था का पूरा फायदा उठा रहे है और ग्रामीण की जिंदगी से खिलवाड़ करते हुए नित्य नये प्रयोग कर रहे है ना तो इनके पास डिग्री है और ना ही लायसेंस इन्हें तो प्रांरभिक इलाज करने का लाइसेंस है और किसी झोलाछाप के पास लाइसेंस है तो वह किसी और पद्धति का है और ईलाज किसी और पद्धति से कर रहा है जिन्हें इन्हें रोकने की जबाबदारी दी गई है वह जिम्मेदार घोड़े बेच कर सो रहे है। इन अबैध चिकित्सकों न कोई कहने वाला है और न कोई कार्यवाही करने वाला है तो डर किस बात का जो होगा देखा जाएगा कि तर्ज में सब चल रहा है। और बेचारे भोलेभाले ग्रामीण इनसे इलाज करवा कर असमय मौत के गाल में समा जाते है।
वही केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार शासन प्रशासन गाँव गाँव हर हाल में स्वास्थ्य को लेकर हमेशा नए नए उपकरण दवाइयां वाहन और भी कई तरह की सुविधा उपलब्ध करा रही है प्रदेश के मुखिया भी स्वास्थ्य को लेकर हर संभव प्रयास करते नजर आते हैं लेकिन शायद यह केवल बातों और कागज तक ही सीमित है..
ऐसा एक मामला घुघरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सामने आया है जहां पर न डाक्टर मिलते हैं और न दवाई
एम्बुलेंस है तो वो डाक्टर को घूमने के लिए है पेड़ पौधे ढोने के लिए है.
पानी की व्यवस्था पिछले छह महीने से नहीं है..बैड की हालत बुरी है और डाक्टर राउंड पर भी नहीं आते दवाई देने वाले मंडला से अप-डाउन करते हैं जिससे आम जनता परेशान हो रही है.सुबह से लोग लाइन में लगे रहते हैं लेकिन न दवाई समय पर मिलती न ईलाज ठीक से होता है और इसी के चलते मरीज झोलाछाप डाक्टर के पास जाकर अपनी जान जोखिम में डालकर ईलाज कराते नजर आ रहे हैं और झोलाछापों के कतार लगी रहती है।
वही सरकारी अस्पताल के जनरल वार्ड में देखें तो न पानी की व्यवस्था है न किसी प्रकार की साफ सफाई नल तो मानो सूखे पड़े हैं किसी मरीज को पानी की आवश्यकता पड़े तो बाहर से पानी लाना पड़ता है, पिछले दिनों इन्ही अनियमितता के चलते डाक्टर लक्ष्मण सिंह उइके को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था जिसकी जांच के पश्चात उन्हे निलंबित भी किया गया था लेकिन शायद घुघरी स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और अप डाउन के सिस्टम के चलते यहां के अधिकारी कर्मचारियों को न स्थानीय विधायक महोदय का डर है और न ही शासन प्रशासन का जरा भी डर पदस्थ अधिकारी कर्मचारी शासन से तन्खा तो पूरी लेते हैं लेकिन काम के मामले आधा भी नहीं करते घुघरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हमेशा से किसी न किसी रूप में चर्चा में बना रहता है चाहे एम्बुलेंस की चर्चा हो या जिम्मेदारो के अप डाउन की चाहे डाक्टर नदारद रहने की लेकिन इनके बाद भी शासन प्रशासन और जिले में बैठे अधिकारीगण कुंभकर्ण की नींद से नहीं जाग रहे है और न ही स्थनीय विधायक नारायण सिंह पट्टा कुछ इन निक्कमे अधिकारियों पर कुछ कार्यवाही करवा पा रहे है जिस्से ग्रामीणों पर विधायक कर आक्रोश पनप रहा है और आगामी होने वाले विधानसभा चुनाव में सबक सिखाने का मन बना लिया घुघरी के 84 गांवों में लचर स्वस्थ व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का नतीजा ये की ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था का कोई लाभ नही मिल पा रहा है और कोई शिकवा शिकायत होती भी है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद मामले कि लीपापोती कर अपना काम पूर्ण करने में लगे रहते हैं। यहीं हाल बिछिया विधानसभा के भुआ बिछिया मवई का भी जनता का अब जनप्रतिनिधियों और विधायक से मोह भंग हो गया है जनता अब केवल जिला प्रशासन से गुहार लगा रही है कि बेलाग़ाम हुए जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी पर लगाम लागये जिससे ग्रामीण की जनता को सरकारी व्यवस्था का लाभ मिल सके और अधिकारीगण घुघरी भुआ बिछिया और मवई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ध्यान नहीं देते और इन क्षेत्र की जनता अस्पताल के रवैये से परेशान रहती है..
आखिर इन अस्पतालो में किसकी मनमानी से डाक्टर और पूरा स्टाफ लापरवाह नजर आता है। और मरीज परेशान होकर झोलाछाप डॉक्टरों की शरण मे जा रहे है या कहे कि सरकारी चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार लोग स्थनीय झोलाछाप डॉक्टरों से सांठगांठ कर मरीजो को उनके यहाँ जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने तो गाँधी जी के तीन बंदर बन बैठे हैं।
इनका कहना है
यहां पर पानी की कोई सुविधा नहीं है पानी पीना हो तो अस्पताल के सामने नल है वहीं से भरकर लाना पडता है बाथरूम में भी पानी की सुविधा नहीं है..
किरन उइके
भर्ती मरीज निवासी बनेहरी
मैं तीन दिनों से यहां हूं लेकिन नर्स आती हैं बस डाक्टर देखने तक नहीं आते और समय का तो पता ही नहीं 11-12 बजे आते हैं..
शेववती बाई
भर्ती मरीज
निवासी गर्रैया..
मेरी पत्नि को सुबह किसी कीड़े ने काटा था तो मैं उसको लेकर अस्पताल आया सुबह लगभग 10 बजे करीब आया तो देखा कि अस्पताल खुला ही नहीं है उसके बाद 10:30 बजे के करीब पर्ची बनी तो डाक्टर नहीं मिले फिर एक नर्स ने इलाज कर भर्ती किया तो दवाई लेने दवाई के कमरे में गया तो वहा पर ताला लगा था दवाई देने के लिए जो कर्मचारी हैं उनका पता नहीं..
न मैडम न सर बाद में ताला तोड़कर हमें और जो लाइन में लगे हुए मरीज थे उनको दवाई मिली जिम्मेदार मंडला से आना जाना करते हैं तो समय पर कोई नहीं मिलता और जनता परेशान होती है..
राजा पट्टा
समाज सेवी घुघरी.



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