दैनिक रेवांचल टाइम्स - अजनियां भक्त प्रह्लाद के त्याग से प्रभावित होकर श्री हरि ने कह दिया कि मैं कभी तुम्हारे वंसज के ऊपर शस्त्र नहीं चलाउंगा और आगे जाकर श्री हरि का भक्त प्रह्लाद का पोत्र बलि के रुप में आया तब वह प्रबल आस्तिक याज्ञिक और दान वीर था वह अपना 100 वां यज्ञ कर रहा था ।जो 100यज्ञ पूर्ण करले वह देव लोक का राजा बन जाता था बलि की ऐसी कोई मनसा नही थी परंतु देवताओं ने श्री विष्णुदेव से प्रार्थना की कि दैत्य कुल का कोई देव लोक का राजा ना बने ऐसी आज्ञा दीजिए। भगवान ने आज्ञा दे दिया और बलि के यहां 52 अंगुल के छोटे रुप में बनकर बलि से वरदान मांगा 3 कदम पृथ्वी को संकल्प द्वारा। देवताओं ने जब प्रार्थना किया था तब भगवान शेष शय्या पर क्षीरसागर में शयन कर रहे थे आज भगवान ने पार्श्व परिवर्तन /करवट बदला था। इसलिए इसका नाम परिवर्तनी एका दशी है ।करवट बदलते समय व्यक्ति जाग जाता है अतः आज की रात्रि जागरण किया जाता है।द्वादशी को भगवान वामनावतार धारण किये थे अतः कल वामन द्वादशी है ।बलि को भगवान देवलोक का राज्य ना देकर पाताल लोक का राज्य प्रदान किया था जिसे महाराज बलि ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था क्योंकि वह भगवान श्री हरि का भक्त था। भगवान क्षीरसागर में सयन कर रहे थे इस कारण से आज के दिन भगवान को विमान /डोला में बिठाकर जल विहार कराया जाता है और जल में ही भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है ।यज्ञ का फल भगवान जरुर प्रदान करते हैं चाहे कोई भी हो।
Monday, September 25, 2023
वरदान आश्रम अंजनिया के पंडित नीलू महाराज के द्वारा
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