रेवांचल टाईम्स - मंडला जिला मुख्यालय मंडला में यातायात बढ़ने के साथ-साथ आवारा पशुओं ने और भी संकट आम राहगीरों के लिए बढ़ा दिया है। अनेक बार नगर प्रशासन और जिला प्रशासन को समाचार पत्र के माध्यम से सच का आईना दिखाने के बाद भी यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने में असफल हो रहें हैं। इसी तरह आवारा पशुओं ने भी आम राहगीरों के लिए संकट बढ़ा दिया है। एक तरफ बढ़ते यातायात के बीच आवारा पशुओं की भीड़ ने दुर्घटना को खुलेआम आमंत्रण देकर आम लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं।
शहर के यातायात के बीच दो सांडों में होने लगता है मल युद्ध
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय की मुख्य सड़कों में बढ़े यातायात और बढ़े मवेशियों की भीड़ को देखकर ऐसा लगता है कि यहां पर कोई प्रशासनिक व्यवस्था नही है। जिला मुख्यालय मंडला की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चकनाचूर दिखाई दे रही हैं। ना मवेशियों की भीड़ को नियंत्रण किया जा रहा है ना ही यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। जिसके चलते कोई भी नियम का पालन करने को तैयार नहीं है। यातायात के बीच आवारा पशुओं के अलावा अनेक सांडों के बीच में मल युद्ध होने लगता है जिससे आम राहगीरों के अलावा चलते वाहनों व खड़े वाहनों को भारी क्षति पहुंचाई जाती है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि से लेकर शासकीय अधिकारी कर्मचारियों का भी जिला मुख्यालय के मुख्य सड़कों से आवागमन होता हैं। उनके द्वारा भी यातायात के बीच शहर की सभी सड़कों में आवारा पशुओं के झुंड देखते होंगे, इसके बाद भी सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है। जिला मुख्यालय की ऐसी कोई भी सड़कें नहीं होंगी जहां पर अव्यवस्था के बीच आवारा पशुओं की भीड़ देखी ना गई हो।
पशुपालकों के विरुद्ध की जानी चाहिए कार्यवाही
नगर प्रशासन को चाहिए कि जिला मुख्यालय के सड़कों के बीच आवारा विचरण कर रहे पालतू पशुओं के कान में लगे टैग की फोटो लेकर सर्च करने पर पशुपालकों के नाम और आधार नम्बर ओपन होने पर पशुपालकों को एक निश्चित आर्थिक दण्ड का नोटिस भेजकर कार्यवाही करने से नगर प्रशासन को आर्थिक इनकम के के अलावा पशुपालकों में सुधार भी होगा, जिससे पशुपालक अपने पशुओं को नियंत्रण में रख सकेंगे। इसके अलावा जिन पशुओं के कान में टैंक नही होगा, ऐसे पशुओं को समाजसेवी संस्थाओं के कांजी हाउस के सुपुर्द कर देना चाहिए, जिससे यातायात व्यवस्था दुरुस्त और सुदृढ़ हाने के साथ-साथ आम राहगीरों को आवारा पशुओं की भीड़ से राहत भी मिलेंगी। लेकिन नगर प्रशासन का ध्यान और हाकागैंग का इस ओर कोई भु ध्यान देने में दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते लगातार शहर की व्यवस्था चौपट होने के साथ-साथ इसका खामियाजा आम लोगों को भोगना पड़ रहा हैं।


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