रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में आख़िर किस तरह से सरकारी तंत्र लापरवाह हुआ है ये तो कोई चल रहे योजनाओं के निर्माण कार्य को देखे जहां पर सरकारी धन को अपनी बकैती समझ कर निर्माण कार्यो में भूसा भर कर अपनी जेब भर रहे है। जिले में जल संरक्षण के नाम पर शासन की धन की होली | किस तरह खेली जा रही है जिसकी एक तस्वीर सामने आई है। जल संरक्षण के नाम पर बनाया गया स्टापडेम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया और भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चलते इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी की गई जिसका नतीजा यह निकला की जल संरक्षण तो हुआ नहीं बल्कि उक्त स्थल पर बना स्टापडेम धराशाई हो गया। अब सवाल ये उठता है कि शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले ऐसे लोगों पर ठोस कार्यवाही क्यों नहीं होती? मनरेगा योजना से लगभग 15 लाख की लागत से यह स्टापडेम बनाया गया था। अब आनन फानन में इस बात की जानकारी तकनीकी अधिकारी को लगी तो उन्होंने अपनी करतूतों को छुपाने के लिए तेजी से | काम लगाकर उक्त धराशाई स्टापडेम को व्यवस्थित करने का काम प्रारंभ कर दिया है। इस घटिया निर्माण को करने के लिए तत्कालीन एसडीओ गोस्वामी ने सहमती दी थी। ग्रामीणों की मांग है कि शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले इन गैर जिम्मेदारों पर ठोस कार्यवाही जिला प्रशासन के द्वारा की जानी की माँग की जा रही हैं।
वही जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत बिछिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत खलोड़ी के ब्लॉक टोला चुहारी नाला में 15 लाख की लागत से तीन-चार महीने पहले बना स्टाफ डेम पहली बरसात में धाराशाई हो गया है। इस निर्माण कार्य को करने के लिए ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया गया था जहां सरपंच, सचिव एवं एसडीओ और इंजीनियर की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया। जो पानी का तेज बहाव नहीं सह पाया और वह टुकड़े-टुकड़े होकर लुड़क गया। जब इस बात की जानकारी ग्राम पंचायत के लोगों को लगी तो उन्होंने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों पर आरोप लगाया कि घटिया निर्माण किये जाने के कारण उक्त स्टापडेम नाले के पानी का बहाव नहीं सह पाया।
नाम के लिए रहती है ग्राम पंचायत एजेंसी ठेकेदार भ्रष्टाचार कर आगे बढ़ते है।
वही ग्रामीणों ने बताया कि विछिया जनपद पंचायत के अंतर्गत इस क्षेत्र में मनरेगा एवं अमृत सरोवर योजना से जल संरक्षण के नाम पर अनेक निर्माण कार्य कराये गये। इन निर्माण कार्यों को कराने के लिए एजेंसी ग्राम पंचायत रहती है, लेकिन वह सिर्फ नाम के लिए, बल्कि काम तकनीकी अधिकारियों की चहेते ठेकेदार निर्माण का ठेका लेकर घटिया कार्य कराते हैं। निर्माण की गुणवत्ता में कमी इसलिए हो जाती है क्योंकि निर्माण कार्य के लिए जितनी राशि शासन से स्वीकृत होती है वह राशि का 50 प्रतिशत कमीशन में जिम्मेदार लोगों में बंट जाती है। इसलिए जिले में जल संरक्षण के नाम पर जिले में जितने भी निर्माण कार्य कराये गये हैं उनकी जांच करने पर स्पष्ट हो जायेगा कि उन निर्माण कार्यों में कितनी गुणवत्ता से इन निर्माण कार्यों को अंजाम दिया गया है।
वही प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन उड़ रही आदेशों की धज्जियां आये दिन विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रशासनिक अमले को बार-बार निर्देश दे रहे हैं कि अमृत सरोबर सहित मनरेगा, पीएम आवास के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवता में कमी न की जाये यदि कोई भी निर्माण कार्य में धांधली होती है तो उनके विरूद्ध ठोस कार्यवाही की जाये। यह बात वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिला प्रशासन को निर्देश दिये गये। शायद सीएम के निर्देशों से जिले के कर्मचारियों को कोई लेना देना नहीं है।
वही जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत भुआ बिछिया की ग्राम पंचायत खलोड़ी के ब्लॉक टोला में स्थित चुहारी नाला में करीब 15 लाख की लागत से स्टापडेम का निर्माण कार्य विगत तीन माह पहले कराया गया था। जहां गुणवत्ता के अभाव में यह स्टापडेम बह गया। अब कार्यवाही के डर से उसे पुनः बनाये जाने का काम बड़ी तेजी से किया जा रहा है। जबकि यही निर्माण गुणवत्ता से किया होता तो आज ऐसे हालात न होते।
बिछिया सीईओ दे रहे भ्रष्टाचारी लोगों को खुला संरक्षण शिकायत में नही होती कोई कार्यवाही
वही सूत्रों की माने तो जनपद पंचायत बिछिया के अंतर्गत हुए स्टापडेम एवं अमृत सरोवर के घटिया निर्माण को लेकर अनेकों बार मीडिया में समाचार प्रकाशित किये, वहीं दूरसंचार के माध्यम से संबंधित अधिकारी को अवगत भी कराया गया, लेकिन न तो जांच हुई और न ही संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही की गई। कमीशन ख़ोरी के चलते चहेते कथित ठेकेदार द्वारा मिलकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है, वहीं उपयंत्री अधिकारियों को खुश करने के लिए आए दिन हो रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं। वही सूत्र बताते हैं कि हो रहे निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का हिस्सा उन तक भी पहुंच रहा है। एस्टीमेट हटकर हो रहा निर्माण कार्य : क्षेत्र के लोग जिन्हें तकनीकी ज्ञान है उनके द्वारा बताया गया कि 60 सेमी स्टीमेट में वर्णित है एवं बाडीवॉल, विंग बॉल एवं कट ऑफ बॉल सबका एक साथ बेसमेट का कार्य किया जाना था। लेकिन तकनीकी अमले व कथित ठेकेदार व्दारा आपस में साठगांठ कर जहा अर्थवर्क के बाडी कार्य में बिना खुदाई के वर्णित दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर कार्य किया गया, वहीं स्टापडेम में सबसे महत्वपूर्ण अपस्टीम अप्रोन एवं डाउन स्टीम अप्रोन एवं उसके आगे कि वाल का निर्माण कार्य होना था। उनके लिए भी खुदाई कार्य नही किया गया साथ ही जितना निर्माण कार्य हुआ वह गुणवत्ता से नहीं किया। जिस कारण उक्त स्टापडेम बह गया। और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया भुआ बिछिया जनपद की ग्राम पंचायतों में खुल कर ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यो में ठेकेदारों के द्वारा लीपा पोती की जा रही है और अधिकांश ग्राम पंचायतों में तो जनपद सदस्य और ग्राम के ही उपसरपंच मेम्बर खुल के ठेकेदारी की जा रही है और जनपद के उपयंत्री अनुविभागीय अधिकारी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सब पता है कि ग्राम पंचायतों में निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत केवल नाम की है और जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के दबाब के चलते खुली ठेकेदार की जा रही है और सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो रही हैं।

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