रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य मंडला जिला जो कि प्राकृतिक संपदाओ भरा पड़ा है यहाँ की भौगोलिक परिस्थति की अपनी एक अलग पहचान है चाहे हम जंगलों की बात करें चाहे या कृषि भूमि या पठार क्षेत्र भौगोलिक दृष्टिकोण से मंडला जिला में खनिज संपदा की प्रचुर मात्रा उपलब्धता है जहाँ पर प्राकृतिक सौंदर्यता की भर- मार है पर उसे खनिज माफियाओं के द्वारा दिन रात दोहन कर प्रकृति के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है जिससे जिले की सुंदरता में ग्रहण लगता सा प्रतीत हो रहा है जबकि हमारे जिले में वनों की भरपूर मात्रा है और नदी, नालों में रेत की मात्रा भी भरपूर है और जमीन से निकाले जाने वाले मुर्र्म की भरपूर मात्रा है जिसका भी दोहन माफियाओं के द्वारा रात दिन किया जा रहा है जिससे वनों के क्षेत्रफल में कमी आई है तो वहीं रेत का अवैध दोहन होने से नदी नालों के मूल स्वरूप में भी परिवर्तन आ गया है तथा धरातल के नीचे से निकाली जाने वाली मुर्र्म पत्थर निकाले जाने से बड़े-बड़े पातालकोट नजर आने लगे हैं। लेकिन खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों की आंखों में धृष्टराज की तरह पट्टी बंधी हुई है और कानो में रुई डालकर कार्य करती नजर आती है जहा की बिना अनुमति के जगह जगह भंडारण अवैध रेत का उत्खनन कर शासकीय और निजी भूमि में भंडारण हो रहा है और वही कुछ एक विभाग से अनुमति लेकर भंडारण किये है वह तो अलादीन का चिराग साबित हो रहे हैं जो कभी खत्म होता ही नही दिन में उस भंडारण से रेत बेची जा रही है और सुबह कब देखेगे तो जस की तश रहेगी है। जिले में चल रहे अवैध रूप से क्रेशर संचालित हो रहे हैं जो बिना रोक टोक के और 'बिना पैमाने के खुदाई जारी है और क्रेशर संचालक की जहाँ मर्जी होती है वही खुदाई शुरु कर देता है और क्रेशर के नाम पर जो भूमि लीज में प्राप्त होती है वह सालों जस की तश रहती है पर क्रेशर के आसपास जगह जगह जरूर बड़े बड़े गड्ढे देखने को मिल जाएंगे आखिर खनिज विभाग की चुप्पी और अवैध उत्खनन और परिवहन पर कार्यवाही न करना किस- तरफ इशारा करता है। वही प्रदेश के मुखिया मंचो से घोषणा करते है, और माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करने की बात करते है और जनता ये नही समझ पा रही है कि आखिर कार्यवाही करेगा कौन क्योंकि जिन्हें कार्यवाही की जिम्मेदारी दी है वह खुद अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने और माफ़ियाओं को संरक्षण के साथ साथ मौन सहमति दे रखी है उस के एवज में इन्हें अच्छा खासा नजराना प्राप्त होता है, वही मुखिया के लाख बार कह चुके है कि प्रदेश में अबैध खनिज माफियाओं और माफियां राज को नही बख्शा जायगा लेकिन यह आदेश मंडला जिले में लागू नही होता क्या कि खनिज विभाग खुद संरक्षण दे रहा है, जागरूक लोगो के द्वारा शिकायत की जाती है और अवैध उत्खनन परिवहन पर मीडिया के माध्यम से जानकारी दी जाती है लेकिन खनिज विभाग का सुस्त रवैया कहे या खनिज विभाग की धारिया दिली कहे कि जो माफियाओं पर उनकी नजर जाती ही नही है आखिर ये संरक्षण क़िस्से मिल रहा है इन माफियाओं पर राजस्व विभाग भी चुप्पी साधे बैठा हुआ है। इसके पीछे की वजय क्या यह जनचर्चा का विषय बनी हुई हैं कि जहाँ जिले में खनिज मौजदूगी कही दिखाई ही नही पड़ रही है और खनिज चोर खनिज सम्पदा की खुलेआम चोरी कर रहे है और ये ग्रामीणों को नजर आ रहा है पर जिम्मेदारो को दूर दूर तक नजर नही आ रहा है या फिर कहे कि वह इस ओर देखना ही नही चाह रहे हैं।
Wednesday, September 27, 2023
खनिज माफियाओं के लिए खनिज विभाग बना मिस्टर इंडिया....
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