रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला मुख्यालय में बढ़े आसानी से बोनफिक्स और सफेदा व्हाइटनर सूखते हुए अबोध बालक-बालिकाओं को देखा जा सकता है। नव पीढ़ी नशे के चक्कर में अपना भविष्य खराब कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय मंडला स्थित उदय चौक के गलियारों में रात्रि के समय मासूम बालक- बालिकाओं को नशे की हालत में कहीं भी सोते हुए नजर आ जायेंगे। नशा के हालत में सोते हुए बच्चियों के साथ असामाजिक तत्वों के द्वारा यौन शोषण की घटनाएं भी घट सकती है। ऐसे बालक-बालिकाओं को नशा से दूर रखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम व सुरक्षा के लिए कोई आगे नही आ रहा है। सरकार द्वारा बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए जिला मुख्यालय स्तर पर कोई कारगर मुहिम नहीं चलाया जा रहा है, जिससे नव युवक-युवतियां नशे के गर्त में जा रहे हैं। मंडला मुख्यालय में छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां इस कदर नशे में चूर रहते हैं, जिन्हें अपना खुद का ध्यान नहीं रहता कि वह क्या कर रहे हैं। सरकार बच्चों के प्रति इतना संवेदनशील क्यों नहीं है। कहां गए समाजसेवी और नशा से मुक्ति दिलाने वाले। नशे की हालत में जब बच्चियों के साथ कोई अप्रिय घटना घट जायेगी जब सरकार जागेगी। जिला मुख्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है की नगर की गली कूचे में अबोध बालक-बालिकाओं को बोनफिक्स और सफेदा व्हाइटनर जैसी रासायनिक पदार्थों को कपड़े में लपेटकर सूंघते हुए देखा जा रहा है।
रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला मुख्यालय में बढ़े आसानी से बोनफिक्स और सफेदा व्हाइटनर सूखते हुए अबोध बालक-बालिकाओं को देखा जा सकता है। नव पीढ़ी नशे के चक्कर में अपना भविष्य खराब कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय मंडला स्थित उदय चौक के गलियारों में रात्रि के समय मासूम बालक- बालिकाओं को नशे की हालत में कहीं भी सोते हुए नजर आ जायेंगे। नशा के हालत में सोते हुए बच्चियों के साथ असामाजिक तत्वों के द्वारा यौन शोषण की घटनाएं भी घट सकती है। ऐसे बालक-बालिकाओं को नशा से दूर रखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम व सुरक्षा के लिए कोई आगे नही आ रहा है। सरकार द्वारा बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए जिला मुख्यालय स्तर पर कोई कारगर मुहिम नहीं चलाया जा रहा है, जिससे नव युवक-युवतियां नशे के गर्त में जा रहे हैं। मंडला मुख्यालय में छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां इस कदर नशे में चूर रहते हैं, जिन्हें अपना खुद का ध्यान नहीं रहता कि वह क्या कर रहे हैं। सरकार बच्चों के प्रति इतना संवेदनशील क्यों नहीं है। कहां गए समाजसेवी और नशा से मुक्ति दिलाने वाले। नशे की हालत में जब बच्चियों के साथ कोई अप्रिय घटना घट जायेगी जब सरकार जागेगी। जिला मुख्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है की नगर की गली कूचे में अबोध बालक-बालिकाओं को बोनफिक्स और सफेदा व्हाइटनर जैसी रासायनिक पदार्थों को कपड़े में लपेटकर सूंघते हुए देखा जा रहा है।

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