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हम सब सनातनी हैं हमे अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा स्वयं करनी होगी धर्मसभा पर बोले जगतगुरू शंकराचार्य .17 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक होगा श्रीअष्ट लक्ष्मी महायज्ञ - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Friday, December 15, 2023

हम सब सनातनी हैं हमे अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा स्वयं करनी होगी धर्मसभा पर बोले जगतगुरू शंकराचार्य .17 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक होगा श्रीअष्ट लक्ष्मी महायज्ञ

 



. द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज  हुआ नगर आगमन 

रेवाचंल टाइम्स मण्डला। 17 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक श्रीअष्ट लक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण का संगीतमय आयोजन मेहर बाबा कुटी मैदान देवदरा मण्डला में किया जाना है इस पुनीत कार्य की शुरूआत के अवसर पर शुक्रवार को द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज का महिष्मति नगरी में आगमन हुआ। महाराज श्री का नगर में जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। तद्उपरांत महाराज श्री को कार्यक्रम स्थल लाया गया। जहां पर धर्मप्रेमियों ने पुष्पवर्षा करते हुए उनका भव्य स्वागत किया। यहां  पर जयकारा के साथ सनातन धर्म के नारे लगाए गए धर्मसभा के आरंभ में मुख्य यजमान गोवर्धन प्रसाद अग्रवाल एवं श्रीमति हेमलता अग्रवाल एवं श्री रावत ने महाराजश्री का पादुका पूजन करते हुए संकल्प लिया।  भागवत रसिक कथावाचक पं. रामगोपाल शास्त्री नीलू महाराज वरदान आश्रम अंजनिया ने महाराज श्री को आयोजित अष्ट लक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण के बारे में विस्तार से बताया वहीं महाराज श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर दर्शन से पूजा का फल मिल जाता है। ओम के ऊपर की बिंदू ही मां है वेद-शास्त्रों के अनुसार आचरण करना ही मनुष्यता है। महाराज श्री ने कहा कि जब युग परिवर्तन होता है तब सब कुछ जलमग्न हो जाता है। उस समय सिर्फ  के ऊपर की बिंदु का विलय नही होता यही बिंदु माँ है। जिससे पुन: सृजन होता है संसार के सभी शब्द सभी प्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष वस्तु भी इस माँ शब्द के आगे बौने है। सनातनी हिन्दू हो तो पूजा पद्धति का ज्ञान आवश्यक है। वेद-शास्त्रों के अनुसार आचरण जरूरी है पूजा करना करवाना यज्ञ करना करवाना, गौ सेवा करना गौदान करना आवश्यक है। यह भी कहा कि अध्यात्म में मनुष्य तीन प्रकार के कर्म करता है। धार्मिक कार्य यज्ञ अनुष्ठान इत्यादि इष्ट कर्म होते है। मंदिर, अस्पताल,स्कूल आदि का निर्माण करवाना पूरित कर्म होते हैं। वहीं यज्ञ, अनुष्ठान की दक्षिणा के बाद दी जाने दक्षिणा दत्त कर्म कहलाते हैं। बड़े भाग्य से ये मनुष्य तन प्राप्त हुआ है। वेद शास्त्रों के अनुसार चलना ही मनुष्यता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए ही मनुष्य रूप मिला है लेकिन सत्कर्म करोगे तो मोक्ष मिलेगा। अगर सत्कर्म नहीं करोगे, तो अनेक योनियों में भटकना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करना राजा का काम हैं राजा अगर अच्छा है तो धर्म और सनातन दोनो बचे रहेगे वहीं उन्होंने स्कूलों में धार्मिक पढ़ाई न होने पर चिंता भी व्यक्त की उनका मानना है स्कूलों में धार्मिक पढ़ाई भी होनी चाहिए। सांस्कृति और संस्कार को बचाए रखना आज चुनौती बन गया है। इस दौरान उन्होंने उपस्थितजनों को धर्म-अधर्म मानव सेवा शोषित पीडि़तों की सेवा के साथ ही गौसेवा करने का आव्हान भी किया है। महाराजश्री ने यज्ञ स्थल का भ्रमण करते हुए पुष्प से कुंड स्थल की पूजा भी की इस दौरान यज्ञ के संयोजक और धर्मगुरू पं. नीलू महाराज ने महाराजश्री और उपस्थितजनों बताया कि सोमवार को यज्ञ शाला के अंदर के कलशों  में 35 पवित्र नदियों का जल एवं चार समुद्रों का जल एवं 24 तीर्थों की मिट्टी छोड़ी जायेगी जिनमें नैमिसारन्य, काशी, वृंदावन, चारों धाम, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारिका, बद्रीका धाम, हरिद्वार, रेवा सागर संगम पुष्कर की मिट्टी प्रमुख हैं। जो यहां यज्ञ के दौरान देखने को मिलेगी। सहित लगभग 108 महात्माओं का आगमन होगा। विद्वत विप्र सम्मेलन गीता जयंती उत्सव में श्लोक पाठन प्रतियोगिता विराट सुहागलों का आयोजन आदि सम्पन्न होंगे। यहां पर उत्कृष्ट योग में नवग्रह के पौधे भी स्थापित किए गए। यह यज्ञशाला वैदिक पद्यति से निर्मित की गई है। 9 कुंडीय यज्ञ शाला में पूर्व द्वार पर शंख, दक्षिण द्वार पर चक्र, पश्चिम द्वार पर गदा एवं उत्तर द्वार पर कमल स्थापित किया गया है। वहीं खंभात की खाडी गुजरात से लाए गये अति विशिष्ट श्रीयंत्र का मान सरोवर से लाए गये श्रीयंत्र का अभिषेक होगा और रवि पुष्य योग रविवार से श्रीयंत्र का नित्य अर्चन प्रारंभ हो जायेगा जो यज्ञ पर्यन्त चलेगा। अष्टलक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ में जिस गौर गणेश का पूजन होगा यह गौर गणेश की गोबर की मूर्ति भारत की सबसे बड़ी गौशाला जडखोर राजस्थान की गौशाला से लाई गई है। यज्ञ शाला के अंदर के कलशों  में 35 पवित्र नदियों का जल एवं चार समुद्रों का जल एवं 24 तीर्थों की मिट्टी छोड़ी जायेगी जिनमें नैमिसारन्य, काशी, वृंदावन, चारों धाम, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारिका, बद्रीका धाम, हरिद्वार, रेवा सागर संगम पुष्कर की मिट्टी प्रमुख हैं। जो यहां यज्ञ के दौरान देखने को मिलेगी। धर्मप्रेमियों से तन मन धन से सहयोग करने अपील की गई है। इस दौरान जिले के गणमान्य नागरिक समाजसेवी पत्रकार अधिवक्ता उपस्थित रहे वहीं ब्राम्हण समाज ने महाराज श्री का पुष्पमाला से स्वागत करते हुए महिष्मति नगरी के आगमन पर आभार व्यक्त किया। वहीं महाराज श्री यहां से वरदान आश्रम सेवा समिति अंजनिया के लिए रवाना हुए जहां पर उन्होंने भक्तों से मुलाकात करते हुए विश्राम किया। यहां सैकड़ो की संख्या में धर्मप्रेमी और उनके शिष्य मिलने पहुंचे। 

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