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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Saturday, December 23, 2023

मिरर लिपि की लेखनी में धनी है मण्डला के अखिलेश, लिख डाली पूरी रामायण उल्टी...


रेवांचल टाईम्स - मण्डला हमारे ग्रंथ और वेद पुराण आदि भले ही भगवान महापुरुषों या बड़े साधु संतों या ऋषि मुनियों ने लिखे हो परंतु इन ग्रंथों को उल्टी लेखनी में लिख कर अखिलेश ने एक नई इबारत लिख दी है। अखिलेश ने सन 1994 में रामायण सात कांड 619 पन्ने 25 दिनों में तो वही गीता सन 1999 में 18 अध्याय 3.5 दिन में लिख कर सबको पहले ही आश्चर्य में डाल चुके है अखिलेश की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर मंडला में हुई कोरोना काल में भी आपकी ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की मदद ने कई लोगों की जान बचाई । 




मण्डला नगर के श्रीराम वार्ड में रहने वाले अखिलेश अग्रवाल (बिल्लू) ने न केवल पूरी गीता और रामचरित मानस को उल्टे अक्षरों में लिखकर कुछ नया काम किया है बल्कि उसने अब तक सैकड़ों किस्से, कहानियों और चुटकुलों की किताबें उलटे अक्षरों में लिखकर लोगों को वितरित भी की है। अखिलेश इस लेखन में महारथी है और वह एक आम इंसान जिस तरह सीधा लिखता है उसे से उल्टा लिखता है। इस उसी गति विधा में पारंगत होने के सवाल पर अखिलेश का कहना है कि यह बचपने में एक गार्डन में लगे आनंद मेले के एक स्टॉल जहां 5 शब्द उल्टे अक्षरों लिखने पर आयोजक 1 रूपये का में 2 रूपये देने का दावा किया जाता था यदि कोई 5 शब्द उलटे अक्षरों में लिख दें। अखिलेश ने बताया उसके पास एक ही रूपये थे और उससे दो रूपये बनाने की जुगत में फटाफट उलटे अक्षरों में पांच नाम लिख डाले । 


बावजूद इसके आयोजकों ने बच्चा समझ कर लेखनी को गलत तो बताया ही साथ ही पैसे भी नहीं दिये। बस यही दिन था जो अखिलेश को इस कला में महारथ होने की प्रेरणा देने का काम किया और आज वह किसी आम इंसान की तरह सीधी लेखनी फर्राटे से उलटी लिखता है। 3 महीने में रामचरितमानस और 13 दिनों में श्रीमद्भगवत गीता उलटे अक्षरों में लिखने वाले अखिलेश ने यूं तो उलटे अक्षरों में में बहुत कुछ लिखा है लेकिन अब उसकी महाभारत लिखने को तमन्ना थी परंतु ऐसा सुनकर की न तो महाभारत लिखा जाता और न ही पढ़ा जाता है सुनकर यह निराश है कि आखिर क्या करें। इस विधा को आगे बढ़ाने के सवाल पर अखिलेश का कहना है कि यदि कोई सीखना चाहे तो वह सहर्ष तैयार हैं। अखिलेश एक घंटे में कम से कम 10 पेज उल्टे अक्षरों से लिखने में महारथ  रखते हैं। अखिलेस इच कला में आज से नहीं बल्कि करीब 30 साल से पारंगत है।

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