रेवांचल टाइम्स -चौरई(छिंदवाड़ा)-----कोविड छिंदवाड़ा जिला प्रभारी मंत्री श्री भदौरिया से चौरई के पूर्व विधायक व वर्तमान विधायक की बात हुई थी जिसमे जिले के समुदायिक केंद्र में ही प्राथमिक उपचार के लिए कोविड केयर खोले जा रहे है बी एम ओ नितिन बम्हणे बताया कि समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चौरई में 50 बेड में से 32 बेड प्रारम्भ किया जा रहा है। 24*7 डयूटी पे स्टॉप रहेगा जिसमे एक चार अन्य स्टॉप रहेगा एक ऍम बी बी एस, एक आयुष्मान डॉक्टर तत्काल ड्यूटी पे रहेंगे खाना ,नास्ता की पूरी व्यवस्था मरीजो लिये कर दी गई है जहां उन्होंने चौरई क्षेत्र में बढ़ रहे कोरोना के केसों को काबू करने के लिए 50 बेड के अस्थाई कोविड सेंटर बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सीएचसी के माध्यम से आदिवासी छात्रावास नवेगांव में कोरोना का कोविड वार्ड बनाया गया है साथ ही, पीड़ितों को सामुदायिक उपचार चौरई में बनाए गए कोविड सेंटर पर दिया जाएगा। अगर केस सीरियस होगा, तो जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में भेज दिया जाएगा।
छिंदवाड़ा जिले की चौरई तहसील क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। चौरई नगर की जनसंख्या 20 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में तहसील में 89 ग्राम पंचायत के गांव हैं। एक बहुत बढ़ा क्षेत्र है इलाज के नाम पर महज एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चौरई है। जिसमे दो महिला डॉक्टर तीन पुरुष डॉक्टर है अभी तक न यहां कोरोना की जांच हुई और न फीवर क्लीनिक बनाया गया। साथ ही, सिर्फ वैक्सीनेशन का स्थाई सेंटर है।
जिले के लगभग सभी मुख्यालय तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों में फीवर क्लीनिक बनाए गए हैं, लेकिन चौरई क्षेत्र का फीवर क्लीनिक नही है। जो आसपास क्षेत्र के लगभग करीब 60 से 70 किमी दूर तक के मरीज यहां आते है। ऐसे में क्षेत्र की जनता ब्लॉक मुख्यालय न जाकर, जिला मुख्यालय से सीधे चले जाते है।
विकास में रोड़ा स्वयं स्थानीय नेता जो अपनी रोटी व शेखी बखारने के चक्कर मे सुविधा नही हो पा रही है
गौरतलब है, अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा चौरई की जनता स्वयं विकास आर्थिक रूप से सुदढ़ है। क्योंकि सामूहिक कार्य में सबका सहयोग प्रशासन को मिलना चाहिए, लेकिन चौरई नगर की चुरकुट नेतागिरी अच्छे कामो को न करते न होने देते , जबकि इलाज के लिए लोग 20 से 30 किमी. की दूरी तय कर लेंगे, पर विकास की बात आएगी, तो रोड़ा जरूर बनेगा।
डॉक्टरो के लिए काला पानी बना चौरई क्षेत्र
दावा है, चौरई क्षेत्र में हर वर्ग की सरकारी कार्यालयों में दखलंदाजी है। ऐसे में तहसील कार्यालय, ब्लॉक ऑफिस, ट्रेजरी कार्यालय, महिला बाल विकास और पुलिस थाने में अच्छे लोगों को कार्य नहीं किया जाता। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक से लेकर स्टाफ नर्स चौरई को कालापानी की सजा मानते हैं। हर दिन यहां लोगों को विरोध का सामना करना पड़ता है। स्टेट हाइवे पे होने के कारण आये दिन एक्सीडेंट का केस आते रहते है ऐसे में रसूखदार अधिकारी ही यहां टिक पाते हैं। जो टिक जाते है वो अपने मर्जी के मालिक हो जाते है अब जनता जाए तो जाए कहा ,जनता का मरना हर हाल में ही होता है बाकी ट्रंसफर करा लेते हैं या नौकरी छोड़ देते हैं।

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