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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Thursday, April 8, 2021

नैनपुर में गरीब मजदूरों के अतिक्रमण तो हटाए गए,लेकिन प्रशासन रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं पर क्यों नहीं कस रहा शिकंजा




रेवांचल टाइम्स :- ऐसा सोचना की कानून सबके लिए बराबर है..तो लोगों को जल्द से जल्द इस सोच को बदल लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो नैनपुर स्थित वार्ड नंबर 14 में सरकारी जमीन पर काबिज रसूखदार जमीन चोर का उदाहरण सुनकर लोगों को अपनी सोच बदलने में मजबूर होना पडेगा।


नैनपुर के वार्ड नंबर 14 के स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले हम लोगों के घरों और झोपड़ियों को अवैध कब्जा बताकर तहसीलदार ने जेसीबी लगाकर तोड़ दिया। लेकिन रसूखदारों के मकानों को नहीं गिराया गया। और उन्हें नोटिस थमाकर निर्माण को बन्द करने के साथ खुद से तोड़ने को कहा गया। बाद में समझ में आया कि रसूखदार जमीन चोरों को दिया गये नोटिस की कार्रवाई केवल दिखावा मात्र था। क्योंकि नोटिस मिलने के बाद भी ना तो निर्माण कार्य ही बन्द हुआ और ना ही तहसीलदार ने दुबारा कार्रवाई की।


बता दें कि नैनपुर नगर के रेवांचल टाइम्स के पत्रकार शालू अली द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में वार्ड नंबर 14 कि सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे की जानकारी दी गई थी।

इस शिकायत को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन द्वारा नैनपुर नगर तहसीलदार को प्रेषित किया गया था। जिसमें तहसीलदार ने काफी दिनों बाद शिकायत पर कार्यवाही की लेकिन वह केवल खानापूर्ति थी। 

वहां पर स्थित गरीब मजदूरों के मकान तो गिराए गए लेकिन, रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के मकान को हाथ भी नहीं लगाया गया।

जबकि वह पूर्णतः अवैध मकान है।

शिकायतकर्ता द्वारा पूछने पर तहसीलदार ने जवाब दिया की मेरे द्वारा अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया है और लगभग 15 दिनों बाद यदि वह मकान नहीं गिराते हैं तो प्रशासन द्वारा मकान पर अतिक्रमण किया जाएगा लेकिन आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही तहसीलदार द्वारा नहीं की गई आज दिनांक तक रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं के मकान नहीं गिराए गए आखिर ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों ?


आखिर क्या वजह है की तहसीलदार महोदय वार्ड नंबर 14 में रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के अवैध निर्माण को ढहाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। शिकायतकर्ता द्वारा बार बार पूछने पर गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए तहसीलदार का कहना है की मेरे द्वारा नोटिस दिया गया है तथा 15 दिन के बाद कार्यवाही की जाएगी लेकिन आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई अवैध निर्माण करने वाले रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर नहीं की गई है जब नोटिस देना ही था तो उन गरीब मजदूरों को नोटिस क्यों नहीं दिया गया बल्कि आनन-फानन में उनके मकान गिराने में इतनी जल्दी क्यों।


ऐसा प्रतीत होता है कि तोड़फोड़ कार्रवाई करने वाले कर्मचारी और अधिकारी की स्थानीय रसूखदार जमीन चोर के साथ आपसी सांठगांठ है, शायद  तगड़े कमीशन की लालच में आकर रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ताओं के अवैध मकानों पर जेसीबी नहीं चलाई गई। यही कारण है कि नगर में हो रहे अवैध निर्माण कार्य को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता। केवल नोटिस देकर कब्जा से हटने को कहा गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि राजस्व अधिकारियों को यह भी जानकारी है की इस सरकारी भूमि पर किस तरह से नगर के रसूखदार और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कब्जा किया हुआ है और किस-किस ने किया है क्योंकि बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी के सांठगांठ के यह धड़ल्ले से किया गया सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण असंभव है। बावजूद एसके निगम ने कोई नोटिस जारी नहीं किया। जाहिर सी बात है कि मोटी मलाई और सांठगांठ के चलते इन अवैध मकानों पर जेसीबी का चलना नामुमकिन है।


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