रेवांचल टाईम्स :- और चुनावों के नतीजे आ गये, भाजपा बंगाल में सेंध लगाने में सफल हुई पर उसके मंसूबे पूरे नहीं हुए | भाजपा का “भारत विजय” का सपना अब दरकने लगेगा आज इसकी सम्भावना और बलवती हो गई है | वैसे भी आज देश जिस दुष्काल के मुहाने पर खड़ा है, वहां एक सरकार की जरूरत है, जो इस लोकतंत्र को चला सके | अभी तो लोकतंत्र जैसे- तैसे चल रहा है | इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन का श्रेय अब भाजपा भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दे रही है | बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावी नतीजों पर आत्ममंथन करेगी। जबकि इससे पहले, उन्होंने दावा किया था कि शुरुआती रुझान अंतिम चुनावी नतीजों की ओर संकेत नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने भाजपा की जीत का भरोसा जताया था। विजयवर्गीय ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बारे में जानकारी ली। भाजपा महासचिव ने केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो और सांसद लॉकेट चटर्जी के मतगणना में पीछे रहने पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की वजह से जीती। ऐसा लग रहा है कि लोगों ने दीदी को पसंद किया। क्या गलती हुई, हम इसकी समीक्षा करेंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सारी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के आगे पराजित हो गई |. चुनावी विश्लेषकों की मानें तो 'बंगाल की बेटी' ममता बनर्जी की तेजतर्रार छवि, बंगाली अस्मिता, महिलाओं और अल्पसंख्यकों का टीएमसी की ओर बड़ा झुकाव का सीधा फायदा तृणमूल को मिला| चुनाव आयोग समेत केंद्रीय एजेंसियों की चुनाव के दौरान जरूरत से ज्यादा दखल भी भाजपा के खिलाफ गया|
भाजपा की बड़ी भारी चुनावी मशीनरी का अकेले मुकाबला कर रहीं ममता बनर्जी का नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान घायल हो जाना निर्णायक बातों में से एक रहा | ममता बनर्जी ने चोट के बावजूद व्हीलचेयर पर जिस तरह से लगातार धुआंधार प्रचार किया और भाजपा नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक हमला बोला, उससे ही यह छवि बनी कि घायल शेरनी ज्यादा मजबूती से मोमोर्चे पर डटी हुई हैं\ ऐसे में सहानुभूति की गुप्त लहर उनके पक्ष में थी जिसे अन्य लोग समझने को तैयार नहीं थे |.
दूसरा कारण -तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा की ध्रुवीकरण की कोशिश को नेस्तान्बूद करने के लिए 'बंगाल को चाहिए अपनी बेटी' का नारा देकर महिला वोटरों को बड़े पैमाने पर अपने पाले में खींचे | इसके विपरीत भाजपा के पास न तो मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा था और ना ही कोई तेजतर्रार महिला नेता जो ममता को उनकी शैली में जवाब दे पाती ममता अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों के बीच भरोसा कायम रखने में कामयाब रहीं कि भाजपा को कोई रोक सकता है तो वो ममता और उनकी पार्टी टी एम् सी है| मुस्लिमों ने भी लेफ्ट-कांग्रेस के साथ शामिल इंडियन सेकुलर फ्रंट की जगह भाजपाको हराने के लिए एकतरफा वोट भी किया| इस वोटों के बंटवारे की विपक्ष की रणनीति ध्वस्त हो गई| भाजपा के बाहरी नेताओं के मम सीधे हमले के मुद्दे को भुनाते हुए टीएमसी ने बांग्ला संस्कृति, बांग्लाभाषा और अस्मिता को हर जगह उभारा| ममता की 50 महिला उम्मीदवारों की रणनीति ने चुनावी मैदान को रोमांचक बना दिया |.
तीसरा कारण –भाजपा ने दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को साथ लाकर हिन्दू वोटों एकजुट करने की कोशिश की | जिससे उसकी सीटें बढ़ी | इसके विपरीत मातुआ समुदाय को पूरी तरह से भाजपा साथ नहीं ला पाई| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव के बीच बांग्लादेश जाना और मातुआ समुदाय से जुड़े मंदिर में जाना भी निष्फल हो गया |राजबंशी और अन्य पिछड़े समुदायों के वोटों में टीएमसी ने बड़ा हिस्सा झटक लिया |
चुनाव प्रचार के दौरान ही समझमे आ गया था कि भाजपा की बंगाल में रणनीति साफ है वो ८० -२० के ध्रुवीकरण के फार्मूले को धार दे रही है, टी एम् सी नेताओं और ममता ने बहुत सावधानी से हर रैली में जोर -शोर से कहा कि भाजपा बंगाल को बांटने की साजिश रच रही है| ममता बनर्जी ने खुद मंदिरों के साथ मस्जिदों में भी जाने का सियासी जोखिम उठाया | कट्टर भाजपा विरोधी वोट एकमुश्त तरीके से टीएमसी के पाले में इससे भी चला गया| जो पराजय का बड़ा कारण बना |
इसके आलावा कुछ और कारण जैसे ममता बनर्जी पर बड़े केंद्रीय नेताओं का सीधा हमला ,दीदी ओ दीदी, दो मई-दीदी गईं, दीदी की स्कूटी नंदीग्राम में गिर गई जैसे बयान भाजपा पर उल्टे पड़े| कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद चुनाव आयोग द्वारा 8 चऱणों में चुनाव कराना, अर्धसैनिक बलों की गोलीबारी में 5 लोगों की मौत, अधिकारियों के तबादलों से ऐसा संकेत गया कि केंद्रीय एजेंसियां चुनाव में ज्यादा दखल दे रही हैं| आत्ममंथन अगर सचमे भजपा करे तो निष्पक्षता से करे, इसी में देश का भला है |
राकेश दुबे

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