रेवांचल टाईम्स - लॉकडाउन से मजदूर और छोटे दुकानदार जो रोज कमाते थे और रोज खाते थे उनके पास बामुश्किल 10 से 15 दिन की व्यवस्था अतिरिक्त होती है मगर 25 दिन से लॉक डाउन लगा है और मजदूर और छोटा दुकानदार का कोई भी आय का साधन नहीं है ऐसे में अब उन्हें घर चलाने के लिए किराना ,सब्जी ,दवाइयो ,के लिए पैसे की आवश्यकता है जबकि कोरोना के कारण उसका मास्क ,सैनिटाइजर और कई प्रकार के काढ़े के साथ साथ प्राथमिक दवाईयों का खर्च और बढ़ गया है अब उसे चिंता इस बात की हो रही है कि इतने दिन तो जैसे तैसे काट लिए अब घर चलाने के लिए पैसे कहां से आएंगे किसी दोस्त या रिश्तेदार से उधार लेने के लिए जाना भी संभव नहीं है क्योंकि बाहर कोरोना कर्फ्यू है और घर में कोई लाकर देने वाला नहीं है अब तो मोहल्ले पड़ोस के लोग भी किसी की कोई मदद नहीं कर सकते क्योंकि उनकी भी वही स्थिति है ऐसे में उन्हें पिछले साल की याद आ रही है जब कुछ समाजसेवी और नेता मदद के लिए आ रहे थे और सरकार के द्वारा भी मदद हो रही थी भले ही लोग उनको कुछ देते हुए फोटो खिंचवा रहे थे मगर कम से कम उनकी मदद तो हो रही थी अभी तो कोई ऐसे लोगों की सुध लेने वाला भी नहीं है क्या हो गया इस समाज को जो अब ऐसे लोगों की तलाश करना भी भूल गए ।
नेता जो सामाजिक,धार्मिक कार्यक्रम में बहुत आगे आगे होते है आज सब उनकी जरूरत है तो कहा है ।
याद रखना चाहिए अब कुछ चुनाव भी आने वाले हैं।दुआएं लेलो।
विनोद दुबे के साथ रेवांचल टाईम्स की रिपोर्ट

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