नैनपुर में जांच किट की कमी से बढ रहा संक्रमण, लोगों की जा रही जान, जनता मांग रही प्रशासनिक अधिकारी, रोगी कल्याण समिति,व जनप्रतिनिधियों का इस्तीफा
रेवांचल टाइम्स (नैनपुर) :- इस समय मंडला जिले के नैनपुर नगर मे संक्रमित व्यक्तियों के आंकड़े में कमी तो बताई जा रही है। लेकिन यह कमी अच्छे उपचार एवं अच्छी सुविधा से नहीं है, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नैनपुर में जांच किट की कमीं, अधिक से अधिक लोगों की जांच ना होना, और बिना जांच कराएं लोगों का निराश होकर वापस लौट जाने से है। यही कारण है की जांच ना होने की वजह से संक्रमित व्यक्तियों का पता ही नहीं चल पा रहा है।जिससे संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ रहा है। उचित उपचार ना मिलने पर लोग अपनी जानें गंवा रहे हैं। कल नैनपुर नगर में एक ही वार्ड के तीन लोगों ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और लगातार अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते अपनी जान गवाई है। और ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हो रही लापरवाही के चलते अपने परिजनों को खोया है।
नगर के व्यक्तियों सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों मरीजो के स्वास्थ्य समस्याओं का निदान करने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही खुद बीमार हो गया है, इसे कोरोना संक्रमण ने मानो अपनी चपेट में ले लिया है, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक मरीज को धाडस तो दे रहे हैं, लेकिन उपचार के नाम पर केवल धोखा दिया जा रहा है।
संसाधनों की कमी तथा कोरोना संक्रमण की अधिक जांच ना होने की वजह से लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर वापस घर जाना पड़ रहा है। और ऐसे में लोगों की तबीयत बिगड़ रही है और लोग अपनी जान से हाथ धो बैठ रहे हैं।
इसकी चिंता ना तो नगर के बी. एम.ओ.,ना तो नगर सरकार, ना तो प्रशासनिक अधिकारी एस.डी. एम.को है! इन्होंने अभी तक अधिक जांच किट बढ़ाने के लिए किसी प्रकार के प्रयास नहीं किए जिसकी वजह से नगर में शुरुआत से ही कम जांच किट भेजी जा रही है। जिससे संक्रमित व्यक्तियों की जांच कम हो रही है जिससे संक्रमण नगर एवं आसपास के क्षेत्र में अधिक फैल रहा है। मान लिया जाए की नगर नगर का व्यक्ति जागरूक हो गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सोशल मीडिया का आज भी अभाव है। जिसकी वजह से लोग जागरुक नहीं हो पाए हैं। तथा लापरवाही के चलते अपनी जाने गया रहे हैं। और जो लोग ग्रामीण क्षेत्रों से बमुश्किल जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं उन्हें भी यहां से निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
हम सभी इस उम्मीद में है कि बहुत जल्द ही हम इस संकट से जीत जाएंगे लेकिन यह केवल हमारा भ्रम है।
इस तरह लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और जांच किट की कमी यदि होती रही, तो निश्चित ही शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को शमशान बनने में समय नहीं लगेगा।
यहां लगभग सभी संसाधनों की अधिक कमी है, यहां ऑक्सीजन सिलेंडर, फ्लो मीटर एवं अन्य आवश्यक चीजों की समय पर पूर्ति नहीं की जा रही है। समाजसेवियों के द्वारा आपस में धन इकट्ठा करके ऑक्सीजन सिलेंडर एवं फ्लो मीटर की व्यवस्था की गई है। लेकिन नगर के जिम्मेदार प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इस ओर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार अधिकारी नगर के बी. एम.ओ. द्वारा किसी प्रकार की कोई सजगता दिखाई नहीं दे रही है। तथा यह ज्यादा समय अपने प्राइवेट क्लीनिक को ही दे रहे हैं। एसडीएम समस्या का जायजा लेने की बजाए अपने घर पर ही बैठी हुई है। उनके द्वारा अधिक लापरवाही देखी जा रही है। इसकी शिकायत कलेक्टर को की गई थी, तब जाकर कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम अपने एसडीएम हाउस से बाहर निकलीं और सिविल अस्पताल जाकर सुविधाओं का जायजा लिया। लेकिन अभी भी सुविधाओं एवं संसाधनों में अधिक कमी है। सबसे ज्यादा समस्या जांच किट की है, जो कि अति आवश्यक है। जितनी ज्यादा से ज्यादा जांच होगी उतना ही संक्रमण को रोकने में सहायता मिलेगी।
इस पर नगर वासियों का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग इन संबंधित अधिकारियों,जनप्रतिनिधियों, सत्ताधारी पार्टी के मंडल अध्यक्ष, रोगी कल्याण समिति के सदस्य, और विपक्ष के मंडल अध्यक्ष का इस्तीफा मांग रहे हैं।
जांच किट की कमी के चलते अपनी बदहाली एवं यहां आने वाले मरीज अपनी लाचारी एवं दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है, इस समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच के ना होने का दंश नैनपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों व्यक्तियों को झेलना पड़ रहा है,
कहने को तो 10 वर्ष पूर्व घोषणा किया हुआ 100 बिस्तर अस्पताल कुछ समय पहले ही नगर में प्रारंभ किया गया है। सरकार द्वारा लाखों की लागत की बनी नवीन बिल्डिंग का शुभारंभ किया गया था, तो आमजन को लगा था कि अब स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हो सकेगी, इसके पश्चात तो आमजन का विश्वास और पक्का हो गया एवं एक आशा की किरण जगी थी, कि काफी वर्षों से बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का दंश झेल रहा नैनपुर नगर अब उच्च स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ ले सके गा लेकिन कोरोना संक्रमण ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाही की पोल खोल कर रख दी, नगर वासियों को खोनें एवं अधिक संक्रमण बढ़ने के बाद भी स्थिति सुधारने के बजाय और बद से बदतर होती जा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की कमी का होना ढाक के वही तीन पात वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। कोरोना जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारी के मरीज अधिक संख्या में बढ़ रहे हैं। वर्तमान में जांच किट की कमी से संक्रमण अधिक फैल रहा है। जांच किट की कमी एवं प्राथमिक उपचार नहीं होने पर गंभीर स्थिति बन रही है और लोग अपने परिजनों को खो रहे हैं।
नगर की बदहाल व्यवस्था को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन और नगर सरकार ने नैनपुर क्षेत्र की जनता एवं आम नागरिकों को अपने हाल पर मरने के लिए बेसहारा छोड़ दिया है। जबकि शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल गरीब वर्ग के लोग ही पैसों के अभाव में अपना इलाज करवाने आते हैं। बेबस एवं लाचार गरीब वर्ग के मरीज प्रतिदिन संक्रमण की जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहे हैं एवं किट ना होने की वजह से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं।
नगर वासियों का कहना है कि,
"पहले भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल व्यवस्था को बर्दाश्त कर लिया गया। लेकिन इस संकट की घड़ी में इस तरह की लापरवाही बहुत ही निंदनीय है, और शर्मनाक है।"
"अगर प्रशासनिक अधिकारी (बी.एम.ओ./एस.डी.एम.) और जनप्रतिनिधि, रोगी कल्याण समिति के सदस्य, इन सभी में जरा भी शर्म बची है,तो उन्हें मानवता के आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह इस लायक नहीं कि इस पद पर बने रहें। या फिर कलेक्टर को अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर तत्काल इन लापरवाह प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला कर, एक्टिव अधिकारी को नगर में पदस्थ करना चाहिए।"
नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट

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