रेवांचल टाईम्स :- कहते हैं कि 8400000 योनियों में से सबसे श्रेष्ठ योनि मनुष्य की होती है ,जिसे सुर दुर्लभ कहा जाता है | ऐसा जीवन पाकर मनुष्य उत्तम उत्तम जीवन बसर कर पाने के योग्य होता है ।वह अपने और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन कर विश्व वाटिका को समुन्नत करने में अपना योगदान दे सकता है ।लेकिन यह कैसी विडंबना है की व्यक्ति स्वार्थी लोलुप होकरआपाधापी का जीवन जीकर अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करने चला है |
12 जून बाल श्रम निषेध दिवस के लिए समर्पित यह लेख क्या कहता हैयह चिंतन का विषय है ।आज जनसंख्या के बढ़ते बोझ से विश्व के अनेकानेक देश त्रस्त हैं |बेकारी गरीबी बीमारी प्रदूषण और भुखमरी जैसे नाना प्रकार के संकट उत्पन्न हो रहे हैं |समाज में निम्न वर्ग का जीवन कितना दुश्वार होता जा रहा है |
गरीबी बेकारी बीमारी तंगी और भुखमरी से जूझते बच्चे कठिन श्रम करने विवश हैं ।कुछ अनाथ तो कुछ अनचाहे जन्मे बच्चे किसी भी होटल ढाबे मैं छोटू बनकर काम कर रहे हैं |वही बीयर बार और कई ठिकानों पर पिद्दा बन कर तो कहीं चिल्हर बन करजीवन के लिए लिए रोटी जुटाने में लगे हैं | कम उम्र में ही बेटियां अपनी क्षमता से अधिक बोझ ढोने को मजबूर हैं | कुछ बच्चे अत्यधिक पारिवारिक दबाव और तंगी से परेशान होकर घर छोड़ने को मजबूर हैं ।कुछ बच्चे अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए कबाड़ बीनते तो कोई कचरों में ही जीवन की तलाश कर रहे हैं ।ऐसी ही मजबूरियों का फायदा उठाने में लोग कोई कसर नहीं छोड़ते |कम दाम देकर अधिक काम लिया जाता है |
बचपन कितना सु कोमल होता हैसुरक्षित बनाने का दायित्वपरिवार और समाज का है /इसके लिए शासन को भी अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है |तभी बचपन मुस्कुराएगा और देश और समाज का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा |
रेवांचल टाइम्स -मवई से मदन चक्रवर्ती |

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