रेवांचल टाइम्स :- आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के शहरी युवाओं और बच्चों के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में पबजी गेम (प्लेयर अननोन बेटर ग्राउंड) का जुनून बढ़ता जा रहा है। इस गेम को खेलने की वजह से बच्चे मनोरोगी हो रहे हैं। जिसे लेकर परिजन चिंतित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पहले बच्चे और नौजवान प्राचीन विरासती खेल गिल्ली डंडा, फुटबाल, हॉकी, कबड्डी खेलते दिखाई देते थे। लेकिन, जब से उनकी जिदगी में मोबाइल फोन आया है उस दिन से यह विरासती खेल लुप्त होते जा रहे हैं। और मोबाइल पर खेले जाने वाले गेम उनकी मानसिकता पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं।
16 से 18 घंटे गेम खेल रहे युवा
जिले के के ग्रामीण क्षेत्र में अधिक संख्या में युवाओं पर पबजी गेम का जुनून इस कदर सवार है कि वह 24 घंटे में 16 से 18 घंटे तक यह गेम खेलते दिखाई देते हैं। हालात यह है कि यदि उनके परिजन उन्हें रोक कर उनका मोबाइल ले लेते हैं तो वह गुस्से में आ कर कभी-कभी अपना फोन तोड़ देता है। पबजी खेलने से रोकने के कारण ऐसी कई घटनाएं कई परिवारों में अक्सर सुनाई आती हैं। परिजनों के अनुसार वह अपने बच्चों के पबजी गेम के जुनून से इतने दुखी हैं कि, उन को कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा कि वह अपने बच्चों को इस बुरी आदत से छुटकारा कैसे दिलाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई और ऐसे मामले हैं जहां बच्चे और युवा मोबाइल पर गेम खेलने में ज्यादा समय बीता रहे हैं।
पबजी जैसे गेम युवाओं को वर्चुअल लाइफ जीने में विवश करते हैं। गेम को ज्यादा समय देने पर इंटरनेट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। वर्चुअल मोड पर वाॅयलेंस (मार-पीट) देखने का असर निजी जीवन पर पड़ने लगा है। गेम की नयी स्ट्रैटजी बनाने में समय देते हैं।
नींद नहीं आने की बीमारी बढ़ रही है। गुस्सा और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं आम हो गयी हैं।
पबजी गेम खेलने के आदी बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। जो कि चिंता का विषय है। बच्चों को इस से बचाने के लिए परिजनों को विशेष ध्यान देना होगा। ख्याल रखना होगा कि उन का बच्चा मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल तो नहीं कर रहा। मोबाइल पर गेम खेलने से बच्चे जहां मनोरोगी हो रहे हैं वहां शारीरिक तौर पर भी कमजोर हो रहे हैं। इससे बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। यदि कोई बच्चा या युवा इस गेम का आदी हो गया है तो यह उसके शरीर, मस्तिष्क एवं भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
पब जी सिर्फ टाइमपास का एक गेम है। इसे गेम कि तरह खेलें लोगो से गेम की वजह से लड़ाई कर लेना, बेहस करना, समान तोड़ देना या मां बाप को चिल्लाना मूर्खता की निशानी है।
✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट ✒️

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