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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Tuesday, December 28, 2021

कोरोना का बढ़ता कहर, कई राज्यों में सख्त प्रतिबंध लागू, जानिए कब लगाया जाता है फुल लॉकडाउन



कोरोना और उसके नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामले को देखते हुए देश में अधिकांश राज्य सरकार ने सख्ती लगानी शुरू कर दी है. इसके लिए केंद्नीय गृह मंत्रालय ने सख्त हिदायत देते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 के गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए है. कई राज्यों में कोरोना और ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण के कारण नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, वहीं अन्य कई राज्यों ने गाइडलाइंस के तहत सख्ती भी शुरू कर दी है. महाराष्ट्र और दिल्ली में ओमिक्रोन वेरिएंट के सबसे ज्यादा मरीज मिल रहे हैं और अब धीरे-धीरे ये नया वेरिएंट अन्य राज्यों में भी तेजी से पैर पसार रहा है. ऐसे में अगर कोवि- के इस फैलते संक्रमण के कारण मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती है तो लॉकडाउन भी लगाया जा सकता है.

किस आधार पर लिया जाता है फुल लॉकडाउन का फैसला

कोरोना संक्रमण की पॉजिटिविटी दर व मृत्यु दर को देखकर ही किसी भी राज्य या देश में सरकार पूर्ण लॉकडाउन लगाने का फैसला करती है. जब लोगों को दी गई हिदायत के बावजूद संक्रमण फैलने का और मृत्युदर में इजाफा होने का खतरा मंडराने लगता है तो लोगों की जान बचाने के लिए सरकारें लॉकडाउन का फैसला लेती हैं. देश में फिलहाल पॉजिटिविटी दर अभी वैसी नही है कि लॉकडाउन का फैसला लिया जाए. प्रतिबंध लगाए गए हैं स्थिति बिगड़ने पर इसका फैसला भी लिया जा सकता है. अगर संक्रमण दर 3 से 5 फीसदी तक हो जाता है तो हालात काफी चिंताजनक हो जाते हैं.

जानें क्या होती है कोरोना की पॉजिटिविटी रेट
कोविड-19 बीमारी के संबंध में बात करें तो पॉजिटिविटी रेट वह आंकड़ा होता है, जो दर्शाता है कि किए जा रहे कुल परीक्षणों में से कितने सकारात्मक आ रहे हैं. कम सकारात्मकता दर एक अच्छा संकेत होता है, वहीं उच्च पॉजिटिविटी रेट यह बताता है कि संक्रमण तेजी से फैल रहा है. अगर हाई पॉजिटिविटी रेट हो जाए तो फिर अंतिम विकल्प के रूप में लॉकडाउन का फैसला लिया जाता है.

कैसे पता करते हैं पॉजिटिविटी रेट
पॉजिटिविटी रेट की गणना करना बेहद कठिन काम होता है, इसकी सबसे बड़ी वजह है कि कई बार लोग अपना कोरोना टेस्ट भी नहीं कराते हैं. इसकी गणना का फॉर्मूला यह है कि कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोगों की संख्या को कोरोना टेस्ट कराने वाले लोगों की कुल संख्या से विभाजित करके इसे 100 से गुणा किया जाए. ऐसा करने से जो संख्या मिलेगी, वह उस क्षेत्र का पॉजिटिविटी रेट होगा.

ऐसे ही यदि किसी क्षेत्र में पॉजिटिविटी रेट 24 प्रतिशत है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि इस क्षेत्र के 24 प्रतिशत लोग कोरोना पॉजिटिव हैं. बल्कि इसका मतलब यह हुआ कि जो टेस्ट हुए हैं, उनमें से 24 फीसदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं.

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