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बंधुआ मजदूरी के दौरान 16 वर्षीय नाबालिग से सामूहिक बलात्कार – बड़वानी लौट पीड़िता, मजदूर और आदिवासी समाज शासन-प्रशासन से कर रहे कार्यवाही की मांग... - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Thursday, February 24, 2022

बंधुआ मजदूरी के दौरान 16 वर्षीय नाबालिग से सामूहिक बलात्कार – बड़वानी लौट पीड़िता, मजदूर और आदिवासी समाज शासन-प्रशासन से कर रहे कार्यवाही की मांग...




रेवांचल टाईम्स - एक नाबालिक युवती के साथ किया गया शर्मनाम कार्य महाराष्ट्र के सतारा जिले में बंधुआ मजदूरी में फंसे गाँव सिवनी (बड़वानी) के आदिवासी सुरक्षित वापस घर लौटने पर 17.02.22 को पाटी थाने पहुंचे और एक 16 वर्षीय युवती द्वारा बंधुआ मजदूरी के दौरान उसके साथ ठेकेदारों द्वारा समूहिक बलात्कार की शिकायत से आदिवासी महिलाओं के साथ मजदूरी के दौरान होने वाली प्रताड़णा की रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई उजागर हुई है । कर्ज़ के बदले इन आदिवासियों को गन्ना कटाई के काम के लिए  ठेकेदारों द्वारा उनके स्वयं के गाँव, से ग्राम भूइंज सतारा, ले जया गया था, जहां सभी दिन मे 16 घंटे काम करते थे । नवम्बर में एक दिन सुबह 4 बजे पानी भरने गयी पीड़िता को ठेकेदार गणेश भोंसले, जीतू भोंसले और एक अन्य व्यक्ति द्वारा अपहरण कर कई बार सामूहिक बलात्कार किया गया । वह 4 महीने की गर्भवती थी, और बलात्कार के कारण युवती का गर्भपात हो गया और उसके कपड़े खून से भर चुके थे । ठेकेदारों द्वारा पीड़िता को उसको और उसके परिवार को जान से मार देने की धमकी दी गई । 6 दिन तक पीड़िता का खून बहता रहा, जिसके के बावजूद उसे लगातार काम करने के लिए मजबूर किया गया । ठेकेदार की दबंगाई देखते हुए, अंजान जगह में भयभीत मजदूरों द्वारा थाने में रिपोर्ट नहीं किया जा सका । 


जनवरी महीने में एक बार फिर, संक्रांति के छुट्टी के दिन, पीड़िता का अपहरण कर समूहिक बलात्कार किया गया । कई घंटे ठेकेदार से विनती करने के बाद अंततः आदिवासी मजदूर पैदल थाना के लिए निकले । पर मजदूरों के पहुंचने के पहले ही गणेश भोसले और जीतू भोंसले पीड़िता को डरा धमका कर  उनके पक्ष में झूठे बयान देने के लिए मजबूर कर चुके थे । आदिवासियों द्वारा शिकायत करने पर पुलिस ने उन्हीं को थाने में बंद करने की धमकी दे कर भागा दिया । इसके बाद मजदूरों ने जागृत आदिवासी दलित संगठन के कार्यकर्ताओं को अपनी स्थिति के बारे में अवगत किया जिसके बाद संगठन और पुलिस के सहयोग से सभी मजदूर कुछ दिन पहले सूरक्षित लौट पाए और फिर पीड़ित युवती, इस भयानक अनुभव से सहमी एवं डरी होने के बावजूद अपने परिजन और अन्य मजदूर के साथ पाटी थाने में शिकायत दर्ज करने पहुंची और ठेकेदारों पर कार्यवाही और उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाई । 


एक अन्य घटना

       नजदीकी जिले खरगोन से बेलगावी में गन्ना कटाई का काम करने गए आदिवासियों के समूह में 3 महिलाओं और 3 नाबालिग लड़कियों का ठेकेदारों द्वारा कई बार बलात्कार किया गया था, जिसके खिलाफ उन्होने माह दिसंबर में बेलगावी से बच निकलकर लौटते ही, घर जाने से पहले, झिरनिया थाने मे रिपोर्ट लिखने पहुंचे । पर पुलिस द्वारा लगभग एक महीने बाद ही एफ़आईआर दर्ज की गई, जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है । महिलाओं पर बंधुआ मजदूरी, बेगारी और यौन उत्पीड़न की दोहरी मार पड़ रही है, जिसके प्रति शासन-प्रशासन की उदासीनता आदिवासी समाज के खिलाफ उत्पीड़न ही है ।  


गन्ना कटाई के काम के लिए मध्य प्रदेश के निमाड से हजारों की संख्या में नौजवान आदिवासी दंपति अपने बच्चों के साथ महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक तक पलायन करने के लिए मजबूर है । शक्कर फ़ैक्टरियों के लिए काम करने वाले ठेकेदारों द्वारा इन मजदूरों को 30-40 हजार रुपए का कर्ज देकर लाया जाता है । मजदूरों को इस आश्वासन के साथ लाया जाता है कि मात्र 3 महीने का काम होगा, और अच्छी मजदूरी मिलेगी, जिसमे कर्ज भी खत्म हो जाएगा, और ऊपर से उनकी कमाई भी हो जाएगी । पर कार्य स्थल पहुँचते ही, खेत में प्लास्टिक के टपरियों में रहते हुए, उन्हें सुबह दिन उगते से ही शाम के 6 बजे तक गन्ना काटने का काम करना पड़ता है, जिसके बाद देर रात – कभी एक-दो बजे रात तक – गन्नों को गाड़ियों में भरने का काम करना होता है । कमरतोड़ काम के बावजूद इन मजदूरों को न ही कोई मजदूरी दी जाती है, न ही उनके काम का कोई हिसाब – ठेकेदार या सेठ जब तक कहे, उतने महीनों तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है । 


हाल ही में बड़वानी के लगभग 250-300 मजदूर महाराष्ट्रा एवं कर्नाटक में बंधुआ मजदूरी से छूट कर लौटे है, और बंधुआ मजदूरी और यौन शोषण, बलात्कार करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही की मांग उठा रहे है । परंतु, पुलिस-प्रशासन द्वारा मजदूरों की शिकायत पर कोई भी दंडात्मक कार्यवाही अभी तक नहीं की गई है, जबकि आदिवासियों के ऐसे शोषण के खिलाफ धारा 370, 374 भादस के साथ बंधित श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, अत्याचार निवारण अधिनियम, और अंतरराजीय प्रवासी कामगार अधिनियम के तहत गिरफ्तारी होनी चाहिए । यदि यह कार्यवाही नहीं किया गया तो कुछ माह बाद फिर से ठेकेदार कर्ज़ दे कर बंधुआ मजदूरी के रूप मे आदिवासियों को धकेलेंगे और यही शोषन का चक्रव्युह फिर से शुरू होगा !              

                  जागृत आदिवासी दलित संगठन

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