रेवांचल टाईम्स डेस्क - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला जिसे पवित्र नगरी का दर्जा प्राप्त मंडला नगरी जो की माँ नर्मदा की गोद में बसी हुई है।
वही इस नगरी के लोग बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के और आस्था पर विश्वास रखते है। पर विगत कुछ वर्ष से इस पवित्र नगरी को ग्रहण लगा नजर आ रहा है। इस नगर का वातावरण दूषित हो गया है। अबैध क़ारोबारियों के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हो। पवित्र नगरी को इन अबैध कारोबारियों के द्वारा तरह तरह के कृत्य किये जा रहे है जिससे यह पवित्र नगरी अब अपवित्र होती नजर आ रही है। अब इस जिले से अवैध रेत उत्खनन व परिवहन, सूखा नशा, देशी विदेशी शराब के साथ साथ अतिक्रमण, सामाजिक बुराई जैसे जुआ, सट्टा, भू- माफ़िया, माफ़ियाराज अपराधी गतिविधि जैसे कार्यो का संचालन दिन व दिन बढ़ती जा रही है। जिसके कारण अपराध व अपराधियों का ग्राफ बढ़ते नजर आ रहा है।
वही अब धीरे -धीरे पवित्र नगरी मंडला में एवं आस पास के कस्बो मैं एक अपराध जो कि जिस्म फरोसी का व्यवसाय बड़ी तेजी से फलफूल रहा है, जो कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की जानकारी में होते हुये भी यह अपराध खुलेआम संचालित हो रहा है। जिसमें नगर की प्रमुख लाजों होटलों एवं ढाबों व कान्हा नेशनल पार्क की रिसोर्ट होटलों में खुले आम जिस्मफरोशी का व्यापार बखूबी संचालित हो रहा है, जिसमें स्थानीय जिम्मेदार व युवकों के द्वारा बखूबी लक्जरी वाहनों से इंदौर, जबलपुर, नागपुर, व अन्य बड़े शहरों से संबंध रख कर उन शहरों की लड़कियां को इस कृत्य में लिप्त है उन्हें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई व कम उम्रों की लड़कियों की फोटो व एलबम दिखाकर व्यवसाईयो, ग्राहकों के आकर्षित करते है और आर्डर लिया जाता है, जिसके एवज में आर्डर बुक किये जाते है और ग्राहकों से इनकी पसंद अनुसार एक मोटी राशि ली जाती है साथ ही बुक किये गए ग्राहक के बताये हुये पते पर सकुशल, चौपाहियों वाहनों से लड़कियों को पहुंचाया जाता है, और उनकी सुरक्षा का पूरा जिम्मा इन दलालों का होता है।
वहीं यह इस महिष्मती नगरी में चंद रुपयों के चलते व निजी स्वार्थ के कारण यह सामाजिक अपराध अब नासूर बनता नजर आ रहा है एवं
इस महिष्मति नगरी के जिम्मेदार सामाजिक संगठन जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों ने आख़िर क्यो चुप्पी साध रखी हुई है, कही इसके पीछे इन जिम्मेदारों का निजी स्वार्थ तो नहीं है ? जो जानकर भी जान बने हुये है। और अब धार्मिक नगरी धीर - धीरे अपराधियों, भू माफियाओं के चंगुल में फसती नजर आ रहा है, वहीं जिला प्रशासन व जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। क्या यह सामाजिक बुराई नजर नहीं आती अब यह धीरे-धीरे जन चर्चा का विषय बना हुआ |
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