रेवांचल टाईम्स - मंडला रविवार को विश्वविख्यात चित्रकार मरहूम सैयद हैदर रज़ा की 7वीं पुण्यतिथि पर उनके चाहने वालों ने पुष्पांजलि अर्पित की। रज़ा समृति में आयोजित चित्रकला कार्यशाला के कलाकार व समवाय में शामिल होने आए देश के विभिन्न कोनों से आए साहित्यकारों ने स्थानीय कब्रिस्तान में सैयद हैदर रज़ा और उनके पिता सैयद मोहम्मद रजी की कब्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय है कि सैयद हैदर रज़ा का लगभग 95 वर्ष की आयु में 23 जुलाई 2016 को दिल्ली में निधन हुआ था। उनकी इच्छा के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को मंडला लाकर उनके वालिद की कब्र के बगल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द ए खाक किया गया था। तब से ही रज़ा फाउंडेशन द्वारा उनके जन्म दिवस पर रज़ा उत्सव और पुण्यतिथि पर रजा स्मृति का आयोजन करती है। इसमें स्थानीय कलकारों के अलावा देश के अलग - अलग क्षेत्रों से आए कलाकार अपनी कला के माध्यम से इस महान चित्रकार को याद करते है। रज़ा साहब की 7वीं पुण्यतिथि पर निवास विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले भी कब्रिस्तान पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
मंडला जिले के पूर्व कलेक्टर डॉ. जगदीश जटिया ने कहा कि रज़ा साहब मंडला के लिए गर्व का विषय है, यही उनका बाल काल गुजरा है। गर्व की बात है कि देश के तीन प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार है, तीनों उनके पास है। ऐसा आदमी जिसने यह तय किया कि यदि मेरी मृत्यु हिंदुस्तान में होती है तो मंडला में दफनाया जाए। वो इसकी माटी से प्रेम करते थे। इतना प्रेम था कि जब वो मंडला पहुंचते थे तो गाड़ी से उतरकर सबसे पहले मंडला जिले की मिट्टी को माथे से लगाते थे। इतना उनका प्यार मोहब्बत थी मंडला के लिए। लोगों ने लोगों ने भी उन्हें सहेंजा है। मेरी रज़ा साहब को श्रद्धांजलि है। रजा फाउंडेशन के कार्यों के जरिए यहां के लोगों प्लेटफार्म मिलेगा, अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिलेगा। यहाँ आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं से स्थानीय कलाकारों को काफी कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
देश के जाने माने पत्रकार ओम थानवी ने कहा कि रज़ा साहब को देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के महान कलाकारों में एक थे। इस तरह के कलाकार थे जिन्होंने केवल चित्र ही नहीं बनाए बल्कि साहित्य और दूसरी कला में भी उनकी बहुत गहरी रुचि थी। जब उनके 100 पूरे हुए तो हम कोरोना से जूझ रहे थे। फिर उसके बाद रज़ा फाउंडेशन ने 100 साल का सिलसिला शुरू किया देश में भी और विदेश में भी। पेरिस में भी जो कार्यक्रम हुआ उसमें भी मैं गया था और मंडला में यह रज़ा स्मृति का जो कार्यक्रम हुआ इसमें इतने कलाकार, साहित्यकार, नृत्यकार, विभिन्न कलाओं में जो रज़ा साहब दिलचस्पी थी उसको पूरा का पूरा रुपाइत करते हुए जो पूरा समूह जमा हुआ है यह मेरे ख्याल में सही किस्म की अकीदत और सही किस्म का सम्मान उनकी समृति में प्रकट करने के लिए आए है। हम लोग जो यहां शरीक हुए उनके लिए बड़ा दिन है। हम सब मिलकर रज़ा साहब को याद करने के लिए एकत्र हुए है।
रज़ा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी अशोक वाजपेयी ने बताया कि आज ही के दिन रज़ा साहब का निधन हुआ था। आज उनकी सातवीं बरसी है। यहां बड़े आयोजन समवाय में 50 से अधिक हिंदी कवि और आलोचक एकत्र हुए, कविता पाठ्य हुआ, कविता पर चर्चा हुई। रज़ा साहब की हिंदी कविता में गहरी रुचि थी, उसके चलते हमने यह आयोजन किया। अगर वह जीवित होते हैं तो उन्हें बहुत प्रसन्नता होती। रज़ा साहब उन बिरले कलाकारों में थे जिनको अपनी कला के अलावा दूसरी कला में भी गहरी दिलचस्पी थी। वो उन लोगों में से थे जिनको इसमें बहुत रुचि थी कि युवा लोग क्या कर रहे हैं और कैसे कुछ ऐसा किया जाए कि युवा लोग रचनात्मक कार्य में लगन के साथ थोड़े बहुत साधनों के साथ काम कर सकें। रज़ा फाउंडेशन उनके इसी मंतव्य को यथाशक्ति, यथासंभव आगे बढ़ाता रहा है। यहां मंडला में भी जहां उनका बचपन बीता और जहां अंतिम भूमि है, पिछले 7 वर्षों में हमने नागरिकों के बीच रजा की उपस्थिति को सिद्ध करने की कोशिश की हैं।


No comments:
Post a Comment