रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में वन विभाग कर्मी अपने कार्य के प्रति कितने लापरवाह है इसका अंदाजा आप बरेला वन परिक्षेत्र के जंगलों में हुई घटना से लगा सक्ते है और सायद इसी वजह से वनों में अवैध कटाई व सागौन तस्करी नही रुक रही है। इस वनपरिक्षेत्र में लगातार सागौन तस्करी व वन्य जीवों की शिकार के मामले अक्सर सामने आते रहतें है लेकिन उसके बाउजूद जिम्मेदार वनकर्मी खानापूर्ति करतें हुए पूरे मामले को दबा देते है। ऐसा कुछ इस घटना में होते नजर आरहा है बीते दिनों वनपरिक्षेत्र बरेला के अंतर्गत ग्रामीणों ने हजारों घनमीटर सागौन की लड़कियां पकड़वाई थी लेकिन आज दिनांक तक उक्त लकड़ियों को जंगल से उठाकर जप्त नही किया गया है।
ग्रामीणों ने पकड़वाई थी सागौन की लकड़ियां
बीते शुक्रवार को ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र बरेला के जमठार पौड़ी बीट के जंगल में हजारों घनमीटर लकड़ियां पकड़वाई व वीडियो जारी कर मीडिया कर्मियों को सूचित किया था वही टीवी चैनलों व अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद वन अमला सक्रिय हुआ और ग्रामीणों की बताई हुई जगहों पर जाकर लकड़ियों को जप्त कर कार्यवाही की बात कही थी लेकिन आज दिनांक तक पूरी लकड़ियां जप्त नही हो पाई जप्ती के नाम पर वनकर्मी खालापूर्ती करने में लगे हुए। जबकि अगले दिन आकर सामान्य वन मंडल अधिकारी ने लकड़ियों को जप्त कर उचित कार्यवाही की बात कही थी लेकिन उसके बाउजूद आज वनकर्मी ने लकड़ियों को जप्त नही किया है।
सागौन की लकड़ियां जल्दी जप्त नही हुई तो हो सक्ति है गायब
जमठार, पौड़ी और लालपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया वनकर्मी लकड़ियों को जप्ती करने व सागौन तस्करों को पकड़ने में लापरवाही बरत रहें है जिसके चलते ग्रामीणों आशंका जताई है अगर जंगल से जल्दी लकड़ियां जप्त नही हुई तो सागौन तस्कर उन लकड़ियों को वहाँ से गायब कर सक्ते है साथ ही वनकर्मी वन माफियाओं को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रहा है। साथ ही ग्रामीणों ने बताया इस क्षेत्र में अबतक जितने भी वनकर्मी रहे उन सभी से पूछताछ की जाए जिससें सागौन तस्करों को पकड़ने में आसानी होगी।
इनका कहना है...
वही जब बरेला वन परिक्षेत्र अधिकारी अधिकारी कटारे से फोन पर बात की गई तो उनका कहना था लकड़ियां जप्त हुई है लेकिन कितनी हुई है इसके बारे में मुझे अभी किलियर नही पता। आप थोड़ी देर में फोन लगाए जब रेंजर साहब को कुछ देर बाद फोन लगाया गया तो उनका फोन कवरेज के बाहर बताने लगा।
वही अब सवाल यह उठता कि चार दिनों में जप्ती क्यों नही हुई है अगर हुई है तो कितनी हुई है साथ ही परिक्षेत्र अधिकारी की बात चीत से आप अंदाजा लगा सक्ते है कि वन विभाग कर्मी अपने कार्य के प्रति कितने गंभीर है। इसी लापरवाही व लचर रवैया की वजह से गांव वाले आशंका जता रहे है कही लकड़ियां गायब नही हो जाए।


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