कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा शायद विभाग और प्रशासन कर रहा हादसे का इंतज़ार
रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में हर वह कार्य जो गलत है उसे जिम्मेदारो के द्वारा सही किया जा रहा है और केवल कागज़ो में दिखाया जा रहा और वाहवाही लूटी जा रही है और मौके में कुछ और नजर आता हैं।
वही जानकारी के अनुसार शासन प्रशासन एक ओर जहाँ पर बच्चे बच्चीयो अच्छी से अच्छी शिक्षा देंने का प्रयास कर रही है और अपनी हर तरह की कोशिश करने के बाद स्कूल और शिक्षा विभाग को तरह तरह की सुविधाजनक वस्तु बच्चों को प्रदान करने में लगी है लेकिन आज भी कुछ स्थानों में केवल यह सारी सुविधाएँ केवल कागज में ही सीमित रह गई हैं..
वही शिक्षा विभाग की लापरवाही और उदासीनता का ऐसा ही एक मामला सामने आया है कि ग्राम डोंगरमंडला जो कि घुघरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आता है यहां पर शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही और बच्चों के जीवन को ताक में रखकर स्कूल चलाए जा रहे हैं..
स्कूल की मरम्मत और न स्कूल की दीवारों की मरम्मत हुई है बल्कि छत को पिल्लर लगाकर भवन को रखा गया है और स्कूल भवन से तीन किलोमीटर दूर कीचड़ से होते हुए एक निजी भवन में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है.
जर्जर जर्जर स्कूल की छत किसी भी समय गिर सकती है लेकिन शिक्षक अपनी नौकरी करके अपना काम करके आगे बढ रहे है और इन शिक्षकों न अपनी और नहीं बच्चों की चिंता है कभी भी हादसा हो सकता है। और शायद जिम्मेदार किसी हादसे का ही इंतज़ार कर रहे है कि जब कोई बड़ा हादसा हो फिर जो जिम्मेदार कुंभकर्णी नीद में सोए हूए है जाग कर फिर नये नियम कानून बताएंगे वही जानकारी के अनुसार घुघरी विकास खण्ड में ही बीते कुछ वर्ष पहले ही ऐसा एक हादसा हुआ था जहां पर स्कूल की छत गिर गई थी जिसमे कुछ स्कूल में पढ़ने वालों छात्र छात्रों को चोटें आई थी और वह बात पुरानी हो गई है जिम्मेदार भी भूल गए है और शिक्षा विभाग भी पर अब जिन स्कूलों का मरम्मत कार्य होना था वह आज भी वैसे की वैसे है और जो सही सलामत थे उनमें लाखो का मरम्मत कार्य जारी है और जो कार्य चल रहे वह भी विभाग के चाहेते ठेकेदार है जो सरकारी धन में जम कर लीप पोत कर अपनी जेबें भर रहे है और वह शिक्षा विभाग के न सहायक आयुक्त को नजर आ रहा है और न ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को कयोंकि सब का अपना अपना हिस्सा फिक्स है वही जानकारी के अनुसार शिक्षक अपने मनमाने स्थानो में स्थान्तरण कराकर जा सकता है बस सेटिंग तकड़ी होनी चाहिए और फाइल का बजन भी अच्छा होना चाहिए भले ही जिस स्कूल से शिक्षक का स्थानांतरण हो रहा है उस स्कूल में शिक्षक रहे या न रहे अथिति शिक्षक जो है वह सँभाल लेंगे।
वही जानकारी के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में संचालित स्कूलों में शिक्षक भी समय मे नही पहुँच रहे है, समय मे स्कूलों में बच्चे पहुँच रहे है और स्कूल का ताला खोल कर साफ सफाई करते है और खुद ही स्कूल की प्रार्थना कर अपनी अपनी कक्षा में बैठ जाते है तब जाकर शिक्षक शाला पहुँच रहे है और फिर तीन बजे से बस का इंतजार कर समय से पहले ही शाला छोड़ अपने घरों के लिए निकल जाते है अपडाउन के चक्कर मे आज सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है और शिक्षकों के मनमाने समय में आने जाने के कारण सही पढ़ाई नही हो पा रही है और शिकायत के बाद भी इन शिक्षकों पर कार्यवाही न होना ये बड़ी बात है। वही जान को हथेली में रख बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने में मजबूर हैं। डोंगरमंडला के मंगलाटोला में स्कूल की छत कभी भी गिर सकती है जिसको लेकर सरकारी भवन को छोड़ कर एक निजी भवन में शाला का संचालन किया जा रहा है शाला की स्थिति अच्छी नही होने के कारण बच्चों कीचड़ और बारिश में गीले होते हुए दूर तक जाना पड़ता है जिसकी सरपंच को जानकारी दी जा चुकी है स्कूल और कुकराकाल कटंगी के स्कूल में छत को लोहे कि पिल्लर पर टिकोना लगाकर थामा गया है..जो किसी भी समय गिर सकता है, घुघरी विकास खंड में ऐसे बहुत सी शालाये है जहां पर बच्चे जर्जर छत के नीचे पढ़ाई करने मजबूर है। या फिर निजी भवन या फिर किसी पेड़ के नीचे
इनका कहना है -
मैं खुद गया हूं स्कूल देखने और मैने जाकर देखा है कि स्कूल के भवन की हालत गंभीर ज्यादा जर्जर हो चुकी है और लोहे के पिल्लर लगाकर स्कूल की छत को बनाया गया हैं जो कि किसी भी समय गिर सकती हैं और सरकारी भवन की जगह घर में स्कूल लगाए जा रहे हैं..
शिक्षकों को भी देखा है कि समय.पर नहीं आते और हफ्ते में 2-3 ही आते हैं जिनमें मीना बर्मन विवेक कार्तिकेय अजय ठाकुर सतीश खैरवार अतुल सिंगौर हैं जिनके नाम सहित मैंने लिखित शिकायत भी की है जनपद से लेकर जिला तक कार्रवाई का आश्वासन बस मिला है कार्रवाई हुई नहीं है..
मुकेश मार्को
जनपद सदस्य डोंगरमंडला..



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