पशुपालन विभाग डिंडोरी के उपसंचालक डॉक्टर मंसूरी ने मुख्यमंत्री दुधारू पशु इकाई योजना(बैंगाचक) को मज़ाक बना दिया है नियम अनुसार सभी गाय देशी नस्ल के होने थे, गाय तंदरुस्त होने थे, गाय एक ब्यात के होने थे, गाय एक दिन मे कम से कम 6 से 7 लीटर देती हो। गाय ओर बछडा स्वस्थ होने थे, पर जब रेवांचल टाइम्स की टीम "जल्दा बोना गाव" पहुंची और पशु मालिकों से पूछा गया.....
संवाददाता - क्या पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया की आपको कोन सी गाय दी जा रही है
पशुमालिक - नहीl
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संवाददाता - हर गाय के साथ बछ्ड़ा दिया गया है।
पशुमालिक - हा l
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संवाददाता - क्या आपको बताया गया की गाय कितने लीटर दूध देगी।
पशुमालिक - हा पशुपालन विभाग के अधिकारी ने बताया की 6 से 7 लीटर देगी। पर सच्चाई ये की जब से हमे ये गाय मिली है तब से आज तक कोई भी गाय 7 लीटर दूध नही दी है
पशुपालन विभाग डिंडोरी के डॉक्टर मंसूरी ओर उसके साथ आये तीन चार डॉक्टर ओर ठेकेदार ने हमसें झूठ बोला की ये सभी गाय अच्छी है ओर 6 से 7 लीटर दूध जरूर देगी।
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संवाददाता - गाय देने से पहले आपको दूध चार बार तक उत्पादन(दुहकर) कर दिखाया गया था?
पशुमालिक - एक बार भी दूध उत्पादन(दुहकर) कर नही दिखाया गया।
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संवाददाता - जब आप लोगो को ये गाय दिये जा रहे थे तब ये गाय ऐसे हि कमजोर थे?
पशुमालिक - हा इससे भी बेकार स्थिति मे थे अभी चारा भूसा लिखा कर गाय को ठीक स्थिति मे ले आये है
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संवाददाता - जब आप लोगो को गाय दिये जा रहे थे तब कोई गाय या बछडा बीमार थे?
पशुमालिक - ये तो नही पता पर बहुत सारे गाय बहुत कमजोर लग रहे थे बटने के दो तिन बाद कुछ लोगो के गायों की मृत्यु हो गई थी ओर कुछ बछ्डो के भी मृत्यु हो गई थी। फिर बाद मे पता चला था बहुत सारे गाय बीमार थे बाद मे डॉक्टर आये ओर इलाज किये तो अभी ठीक है पर कुछ गाय बीमार है।
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संवाददाता - सभी पशुमालिक दूध बेचते है ?
पशुमालिक - नही...क्यों की बहुत सारे गाय ऐसे है जो दिन मे एक-दो लीटर हि दूध देती है अगर हम बेचने के लिए दूध निकाल लेंगे फिर बछ्डे को क्या पिलाएंगे। इसलिए दूध नही निकाल रहे है। ओर दूध बेचने का सोच भी नहीं रहे है बेचने लायक दूध हि नहीं होता तो क्या करे।
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संवाददाता - क्या आप लोग इन गायो से संतुष्ट हो।
पशुमालिक - बिल्कुल भी नही, हमे दुधारू गाय नही मिले। विभाग के बड़े अधिकारी ने हमसें झूठ बोला की ये गाय 6 से 7 लीटर दूध देंगे। शुरु मे जब हमे मिले तो हम ख़ुश थे सोचते थे की अब ज्यादा मजदूरी कामों मे नहीं जाना पड़ेगा दूध से हि अपना परिवार अच्छे से चलाएंगे पर गायों को चारा भूसा खिला खिला कर मेहनत हि कर रहे है फायदा कुछ नहीं हो रहा है। इतना दूध नहीं होता की हम लोगो की दिन की मजदूरी निकल सके। पहले ये गाय नही थे तो पति पत्नी कई कामों मे मजदूरी करने चले जाते थे पर अब ये गायों के वजह से एक व्यक्ति को घर मे हि रहना पड़ता है हम सिर्फ मेहनत हि रहे है आमदनी कुछ नही हो रहा है ये गायों को बदल कर अच्छा दूध देने वाले गाय देते तो अच्छा होता।
निजी स्वार्थ के लिए प्रभारी उपसंचालक ने सरकार को किया बदनाम
मुख्यमंत्री दुधारू पशु इकाई योजना को शुरु करते समय बैंगा जनजाति महिला ओर उनके परिवार के जीवन को ध्यान मे रख कर बनाया गया होगा इसलिए तो सभी महिलाओं को स्वसहायता समूह से जोड़ा गया और उन सभी महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया गया। पर पशुपालन विभाग के प्रभारी उप संचालक ने हद हि कर दिया अपनी निजी स्वार्थ के लिए सरकार के इस योजना से खिलवाड़ कर सरकार को बदनाम कर दिया।



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