रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में जिम्मेदार अधिकारी की साठगांठ से सरकारी भूमि कृषि भूमि सब की सब बेच रहे है और जिला प्रशासन कार्यवाही कर जाँच की बीन बजाते नजर आ रहा पर नगर में बहुत जोरो पर जनचर्चा है कि जो भू माफ़ियाओं को जिला प्रशासन के ही जिम्मेदार क़रीबी बन उनका भला करने में कोई कसर नही कर रहे है तो भला इन पर जाँच करेगा कौन ये बड़ा सवाल बना हुआ है और बहुत से मामले में जाँच हुई भी तो परिणाम सफल जनता के सामने नही आ पाए और वे दफ्तरों में पड़े धूल ख़ा रहे हैं।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में हुआ खेल जानकारी होने के बाद भी सालों दबा कर रखा मामला
मध्य प्रदेश के मुखिया की बातें और उनके वादे झूठे साबित हो चुके हैं। क्योंकि वह कहते कुछ और हैं। और उनके अधिकारी कुछ और करते जिस तरह से नैनपुर तहसील परिसर की भूमि एक माफिया पटवारी प्रदीप उसराठे राजस्व निरीक्षक देवेंद्र नेताम और अधिकारियों ने मिलकर भूमिका विक्रय करवा दिया है। मगर आज दिनांक तक उन पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायत पर जांच की गई मगर पंचनामा भी गोलमोल बनाया गया जिससे साफ होता है ।कि कहीं ना कहीं राजस्व के अधिकारी भूमाफिया और पटवारी प्रदीप उसराठे और आर आई देवेंद्र नेताम को बचा रहे है ।क्योंकि कहीं ना कहीं पैसों का बड़ा खेल हुआ है। वही जिला प्रशासन मौन क्यों मोन बैठा हुआ है। और इतने बड़े घोटाले के बाद भी भू-माफिया और राजस्व के अधिकारियों को संरक्षण दे रहा है जिससे पता चलता है कि कहीं ना कहीं गहरी सांस और पैठ रखने वाले भू माफिया के प्रशासन नतमस्तक हो चुके हैं।जोकि कार्यवाही करने डर रहा है।
भू माफिया ने पटवारी प्रदीप उसरठे और आर आई से मिलकर खेला खेल और करोड़ों कमाए
भू माफिया ने प्लाट तो बहुत बेचें मगर रकबे में ऐसा खेल किया की भूमि कभी कम नहीं हुई क्योंकि प्लाट में विक्रय के बाद रोड में कितनी भूमि गई उसको कभी रकबे से घटाया नही गया और रोड कितनी चोड़ी दी गई है। उसका भी उल्लेख नहीं किया गया है। जिसके कारण भू स्वामी के पास शेष भूमि दर्शा रही है। जबकि जानकर बता रहे है। इनके पास की भूमि पहले ही बिक चुकी है। टुकड़ों में प्लाट बनाकर नगर के विभिन्न वाहों में हजारों प्लाट बेचे जा चुके हैं। परंतु आज तक भूमाफियो ने मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता 1999 की धारा 59 एवं 172 के प्रावधानों के तहत अनुज्ञा नहीं ली है और नही मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण कराया है। तथा शर्तों व नियम 1999 अधिसूचना क्र. एफ 1-15- 98 वाईस पं. 2 दिनांक 12 अप्रैल 1999 मध्य प्रदेश पंचायत राजस्व अधिनियम 1993/ क्रं. एक सून 1994 की धारा 61 क से 61-छ के साथ पठित धारा 95 भूमि में आ गए हैं जिससे वे गम्भीर चिंता रजिस्ट्रीकरण शुल्क जमा नहीं किया गया है।
रेरा और ग्रामीण एवं नगर निवेश कार्यकाल से बिना पंजीयन नही कालोनी फिर प्रशासन मोन क्यों
नैनपुर नगर में जो भी अवैध कालोनी में प्लाट विक्रय किया जा रहा है। उसमे एक कालोनी संयुक्त संचालक ग्रामीण एवं नगर निवेश से प्लाट का नक्शा अनुमोदित कराया गया है। नही रेरा से कालोनाइजर का पंजीयन भी नही है। और भू माफिया ने शासकीय भूमि बेच डाली वही विवाद ना होता तो यह बात कभी खुलकर नही आती और सीमांकन होने से भू माफिया की पोल खुल गई। वही इतना होने के बाद भी भू माफिया के रहा है। मैने कोई शासकीय भूमि नही बेची है। प्लाट शासकीय की उप धारा 1 के तहत कालोनाइजर का रजिस्ट्रेशन और बेच डाली सैकड़ों एकड़ भूमि विक्रय की जा चुकी है। मगर जिला प्रशासन मोन सहमति दिखाई दे रही है ।
पूर्व पटवारी प्रदीप उसराठे और राजस्व निरीक्षक ने शासकीय भूमि का किया बंदरवाट और करोड़ों की परिवार के नाम पर संपति अर्जित जी
नैनपुर नगर में इन दिनों राजस्व विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की सह पर सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन का तोल मोल कर फर्जी पंजीयन कराया जा रहा है जिसमे हल्का पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक की काली करतूतों का खुलासा हो रहा है? सिविल लाइन वार्ड क्रमांक 2 नैनपुर की है जिसका खुलासा 25 जुलाई 2023 को डीजीपीएस मशीन से सीमांकन होने के बाद में दुबे हुए हैं। हुआ है। सीमांकन की रिपोर्ट तहसीलदार नैनपुर के समक्ष प्रस्तुत किया जाना शेष है। उक्त मामले में नैनपुर के भूमि क्रेता विक्रेता दोनों की नींद उड़ गई है। करीब 10 से 12 ऐसे क्रेता भूमि स्वामी हैं जिन्होंने अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई का लाखों रुपये खर्च कर अपनी छत बनाने प्रयास किया। परंतु उनकी इच्छा शक्ति कमजोर हो गई जब तहसील व अन्य शासकीय भूमि का रूपये भी हाथ से गये और भूमि भी सभी को डर यह भी बना हुआ है। कि कहीं गया है। जिला प्रशासन इस मामले में धोखा धडी का मामला बनाने के आदेश जारी न कर दे। मामला बना तो नैनपुर के धन्नासेठों के नाम पर एफआईआर होना तय है। वही नगर की जनता इंतजार कर रही है। की अपराध दर्ज कब होगा
20 वर्षों से चल रहा भूमाफियाओं का गोरखधंधा नगर में भूमाफियो के द्वारा कृषि भूमि को खरीद कर प्लाट बना कर महंगे दामों में बेच रहा है। माफिया
वही इनके द्वारा लम्बे समय से भूमि बिक्री कर करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान मध्य प्रदेश शासन को पहुंचाया जाता आ रहा हैं। यह कृत्य एक नहीं नगर के अनेक भूमाफिआ करते आ रहे है। इन परिस्थितियों पर जिला प्रशासन भूमाफियाओं पर कार्यवाही नही करना एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। इनको राजस्व विभाग क्यों बचा रहा है। जबकि सबसे ज्यादा शासकीय भूमि बेचने का मामला दर्ज होना चाहिए


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