भारत में गाय को मां कहा जाता है और उसकी पूजा की जाती है. पहली रोटी गौ माता को खिलाई जाती है. यहां तक कि हिंदू पुराणों में धर्म को भी गौ रूप में दर्शाया गया है. भगवान श्रीकृष्ण ने तो खुद गाय की सेवा की और उनका निवास भी गोलोक में ही माना जाता है. हर मनोकामना को पूरी करने वाली कामधेनु भी गाय ही है. इस तरह गाय को इतना महत्वपूर्ण और पूजनीय माने जाने के पीछे कई कारण हैं. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि गाय को मां ही क्यों कहा गया है, गाय के साथ अन्य कोई रिश्ता क्यों नहीं जोड़ा गया.
धरती पर सबसे पहले आई थी गाय
शास्त्रों के अनुसार, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे तो उन्होंने धरती पर सबसे पहले गाय को ही भेजा था. साथ ही गाय का दूध ही वो चीज होती है जो नवजात बच्चे को पिलाया जा सकता है. इसके अलावा सभी जानवरों में केवल गाय ही ऐसी जानवर है जो मां शब्द का उच्चारण करती है, इसलिए यह भी माना जाता है कि मां शब्द की उत्पत्ति भी गौवंश से हुई है.
शिशु के लिए सबसे अच्छा होता है गाय का दूध
कई बार नवजात बच्चों को विभिन्न कारणवश मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है. ऐसे में उसे गाय का दूध ही पिलाया जाता है. गाय का दूध सुपाच्य होता है और यह बेहद पोषक होता है. गाय के दूध में 16 प्रकार के मिनरल्स होते हैं. आयुर्वेद के अनुसार भी मां के दूध के बाद बच्चे के लिए गाय का दूध ही सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. इस तरह गाय की मदद से ही बच्चे का पोषण होता है इसलिए गाय को मां का दर्जा दिया गया है.
गौ पूजन से पूरी होती हैं सारी इच्छाएं
हिंदू धर्म-शास्त्रों के अनुसार गौ माता की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. घर में सुख-समृद्धि आती है. जिन घरों में गाय रहती है वहां हमेशा सुख-शांति रहती है. गाय की सेवा करने को श्रेष्ठ कार्य माना गया है. साथ ही रोजाना पहली रोटी गाय को खिलाने से अपार सुख-समृद्धि मिलती है, सारे देवी-देवता कृपा करते हैं.

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