दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला, जिले एक तरफ जहाँ शिक्षा का स्तर दिन व दिन गिर रहा है और विकास खण्ड में बैठें खण्ड शिक्षा अधिकारी आये करते तुगलकी फरमान जारी जिससे हो रही है शिक्षकों को परेशानी वही हर 15 दिन में निकाल रहे नए संकुल कार्यालय के तुगलकी आदेश वर्तमान में दो पदों के प्रभारी हैं विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया विकासखंड के कुछ जन शिक्षक कर रहे मनमानी जन शिक्षकों को मूल शाला में दी जानी चाहिए पदस्थापना
वही जानकारी के अनुसार अंजनिया शनिवार को बिछिया विकासखंड में एक नया मामला सामने आया है। यह मामला विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया कुलदीप कठल के द्वारा अंजनिया संकुल कार्यालय के प्रभार में बार-बार फेर बदल करने के आदेश से संबंधित है।
ज्ञात हो कि गत वर्ष तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंजनिया संकुल केंद्र के रूप में स्थापित रहा है। लेकिन पिछले वर्ष इस स्कूल के सी.एम. राइज स्कूल में चयनित हो जाने के कारण वर्तमान सत्र में लगभग 6 महीने पहले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय औरई को अंजनिया का संकुल बना दिया गया था। फिर आनन - फानन 30 नवंबर को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंजनिया के प्राचार्य के नाम से संकुल प्रभारी बनने का आदेश विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया द्वारा कर दिया जाता है। फिर ऐसा क्या हुआ जो विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया को मात्र 15 दिन बाद 14 दिसंबर को पुनः नया आदेश डालना पड़ता है जिसमें संकुल कार्यालय का प्रभार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माधोपुर के प्राचार्य को दे दिया जाता है। क्या विकासखंड शिक्षा अधिकारी परिपक्व नहीं है जो ऐसे निर्णय बेफिजूल ले रहे हैं?
यह कहना है संकुल अंजनिया के अंतर्गत कार्य करने वाले शिक्षकों का।
अंजनिया संकुल विगत 6 महीनों से तमाशाबिन बनकर रह गया है।विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया के नित्य नवीन तुगलकी आदेश के कारण संकुल कर्मचारियों को आए दिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
शासकीय शिक्षकों ने यह भी बताया है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी के कुछ खास जन शिक्षक से संपर्क हो जाने के कारण हर 15 दिन में उन्हें निर्णय लेने पड़ रहे हैं।
शिक्षकों का यह भी आरोप है कि कुछ जन शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंजनिया को संकुल कार्यालय नहीं बनने देना चाहते क्योंकि उनके वसूली कार्यक्रम और कमियां उजागर हो जाएंगी।
हाल ही में मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा भी की है कि सभी बड़े पदों जैसे विकास खंड शिक्षा अधिकारी पी.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण अधिकारियों को बनाया जाएगा। जिससे नियमों का पूर्ण पालन करते हुए शासकीय क्रियाकलाप उचित ढंग से किया जा सकेंगे। ऐसे में विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा तुगलकी आदेश जारी करना उनकी बुद्धिमता पर ठेंगा दिखाता हुआ प्रतीत होता है।
वैसे भी विकास शिक्षा अधिकारी बिछिया कुलदीप कठल का पुराने कुछ मामलों में प्रचलित नाम रहा है। जब से इन्होंने प्रभार लिया है प्रतिनियुक्तियों का दौर चालू हो गया है जिस स्कूल में शिक्षकों की आवश्यकता नहीं थी वहां भी जानबूझकर प्रतिनियुक्तियां द्वारा अतिरिक्त शिक्षकों की भर्ती कर ली गई है। यह सब काम जन शिक्षकों के द्वारा ही संभव हो पा रहा है।
जन शिक्षकों द्वारा ही मनमाने ढंग से अतिथि शिक्षकों की भर्ती हर बार कर ली जाती है जिसकी जांच की जाए तो बहुत से अतिथि शिक्षक नियम के विरुद्ध भर्ती किए गए हैं। इन जन शिक्षकों के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिक्षकों को राजनीतिक दबाव भी मिल जाता है। इस कारण उन्हें न चाहते हुए भी शांत रहना पड़ता है। शिक्षक संघ ने तो यह भी मांग रखी है कि जन शिक्षकों को बदला जाना चाहिए और नए जन शिक्षकों की भर्ती की जानी चाहिए जिससे पुराने तौर - तरीकों को बदला जा सके।
वही जानकारी के अनुसार अंजनिया संकुल के तमाम शिक्षकों ने अंजनिया संकुल कार्यालय को माधोपुर में स्थानांतरित करने के आदेश को गलत बताया है। शिक्षकों का कहना है कि अंजनिया से 23 किलोमीटर दूर बटवार और धमनगांव तक के विद्यालय अंजनिया संकुल अंतर्गत आते हैं यदि उन्हें माधोपुर आना होगा तो थोड़ी बहुत परेशानियां तो होगी ही। और माधोपुर पहले से ही संकुल कार्यालय है जिसमें लगभग आधे सैकड़े से अधिक विद्यालय शामिल हैं। यदि इसके बाद भी अंजनिया संकुल को माधोपुर संकुल में जोड़ा जाता है तो अंजनिया संकुल के लगभग 90 विद्यालय माधोपुर में जुड़ने से कार्य प्रणाली में परेशानियों का सामना तो जरूर करना पड़ेगा। जब अंजनिया संकुल कार्यालय पहले से स्थापित रहा है तो इसे बदलने का उद्देश्य कतई समझ में नहीं आ रहा।
वही अंजनिया संकुल के तमाम शिक्षकों ने अंजनिया संकुल कार्यालय को माधोपुर में स्थानांतरित करने के आदेश को गलत बताया है। शिक्षकों का कहना है कि अंजनिया से 23 किलोमीटर दूर बटवार और धमनगांव तक के विद्यालय अंजनिया संकुल अंतर्गत आते हैं यदि उन्हें माधोपुर आना होगा तो थोड़ी परेशानियां तो होगी ही। और माधोपुर पहले से ही संकुल कार्यालय है जिसमें लगभग आधे सैकड़े से अधिक विद्यालय शामिल हैं। यदि इसके बाद भी अंजनिया संकुल को माधोपुर संकुल में जोड़ा जाता है तो अंजनिया संकुल के लगभग 90 विद्यालय माधोपुर में जुड़ने से कार्य प्रणाली में परेशानियों का सामना तो जरूर करना पड़ेगा। जब अंजनिया संकुल कार्यालय पहले से रहा है तो इसे बदलने का उद्देश्य कतई समझ में नहीं आ रहा। एक बात और भी सामने आई है कि जब शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य को संकुल प्रभारी बनाया गया और उन्हें जिम्मेदारी देने से पहले ही उन्हें प्रभार से अलग करके माधोपुर प्राचार्य को अचानक संकुल क्यों बनाया गया है? क्या जान शिक्षकों के कहने मात्र से विकासखंड शिक्षा अधिकारी ऐसे आदेश पारित कर देते हैं।
इनका कहना है....
मुझे आपके द्वारा अंजनिया संकुल कार्यालय के प्राचार्य के प्रभार में बार - बार फेरबदल का मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है। इसके कारणों को मैं बिछिया विकासखंड शिक्षा अधिकारी से बात करने के बाद ही जान सकूंगा तत्पश्चात ही कोई उचित कदम उठाया जा सकता है।
मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि अंजनिया संकुल का कार्यालय पूर्व की तरह यथावत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंजनिया में ही रहे।
कमलेश तेकाम,
अध्यक्ष शिक्षा समिति एवं उपाध्यक्ष
जिला पंचायत मंडला


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