रेवांचल टाईम्स - मण्डला, जिला मुख्यालय से लगे देवदरा के मेहर बाबा कुटी प्रागंण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान रविवार को रूकमणी विवाह का आयोजन किया गया। यहां पर नेहरू स्मारक से विधि विधान से बारात निकाली गई जिसमें कु. प्रांजल चौरसिया कृष्ण के रूप में नजर आई जिन्हें बग्गी में बैठाकर गाजे बाजे के साथ कार्यक्रम स्थल लाया गया जहां पर रूकमणी के रूप में कु. मेहंदी अग्रवाल के साथ विवाह का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में वर पक्ष के ओर से संजय चौरसिया अतिथि बनें वहीं वधु पक्ष से नीरज अग्रवाल स्वागत करते नजर आए। यहां पर सैकड़ो की संख्या में धर्मप्रेमी बारात में शामिल हुए जहां पर जमकर नाच गाना किया गया। दोनो पक्ष के धर्मप्रेमियों ने हर्ष उल्लास के साथ विवाह सम्पन्न कराया गया इस दौरान धर्मगुरू पंडित नीलू महाराज एवं कल्पतरू कल्पना माता ने विधि विधान से रूकमणी कृष्ण का विवाह कराया जहां पर लोगों ने भगवान के पांव पखारे कथा के दौरान पंडित नीलू महाराज ने आज के इस आयोजन पर कहा कि जीवन में समर्पण भाव होना चाहिए। कथा में वर्णन आता है कि संमुख हुए जीव मोहे जवाई जन्म कोटि अघ ना सही अर्थात भगवान का यह सत्य वचन है कि यदि जीव मुझे समर्पण कर देता है, तन मन से समर्पित हो जाता है तब में उसके समस्त पाप ताप साप उसी समय नष्ट कर देता हूं। हमें भगवान के प्रति समर्पण होना चाहिए। हम शरीर से संसार के कार्य करें। अपने मन और बुद्धि से प्रभु के हो कर रहे। उनका स्मरण और उनका धन्यवाद करते रहना चाहिए। यही सास्वत भजन, त्याग ओर तपस्या है। ऐसे जीव की सद्गति निश्चित रूप से हो जाती है यही भाव सबसे उत्तम है। माता रुक्मणी ने भी समर्पण भाव से श्री कृष्ण को याद कर सर्वस्व मान कर विवाह निवेदन किया। जिसके बाद श्री कृष्ण ने लीला कर माता रुक्मणी से विवाह किया। इस अवसर पर धूमधाम से श्री कृष्ण की बारात निकाली गई। कृष्ण-रुक्मणी विवाह की झांकी सजाई गई। संगीतमय भजनों पर महिला श्रृद्धालु मंत्र मुग्ध होकर जमकर झूमे। उन्होंने बताया कि ग्वाल कृष्ण ने अपने मामा का नहीं बल्कि उसके अहंकार का वध किया। द्वापर युग में जब कंस का अत्याचार बढ़ाए तब भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में श्रीकृष्ण का जन्म लेकर बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने के बाद अंत में पापी कंस का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से छुटकारा दिलाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा नरेश के रूप में विराजमान होने के साथ देवी रूकमणी से धूमधाम से विवाह किया। मंच पर जैसे ही श्रीकृष्ण-रूकमणी का प्रार्दूभाव हुआ। श्रीहरि के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। कथा वाचक द्वारा उद्घोषित मंत्रोचार के बीच जैसे ही विवाह का कार्य संपन्न हुआ तो श्रद्धालुओं की भीड़ ने पुष्प वर्षा की। पंडाल में सारा जनमानस भाव विभोर होकर झूम उठा। वहीं अष्ट लक्ष्मी महायज्ञ के दौरान सिवनी जिले से ब्रजलाल कहार शिक्षक एवं राकेश बैस शिक्षक अपने विद्यार्थीयों के साथ कथा स्थल पहुंचे जहां पर पंडित नीलू महाराज ने उन्हें सनातन धर्म के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में सत्संग का होना बहुत जरूरी है। सत्संग करने से हमें अच्छे संस्कार आते हैं। जिससे विचार अच्छे होते हैं और विचार अच्छा होने से मन अच्छा होगा। अच्छा मन से भगवान तो प्रसन्न होते ही हैं। साथ ही कार्य क्षेत्र में भी उन्नति होती है। इस दौरान शिक्षकों का सम्मान किया गया वहीं अलीपुर से आए कालका पटैल और जामगांव से आए रवि बैष्णव का मंच से सम्मान किया गया। बता दें कि 17 दिसम्बर से अष्टलक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन किया जा रहा है। जिसका समापन आज किया जाएगा। यहां पर महायज्ञ की पूर्ण अहूति होगी वहीं देर शाम महापुराण का भी समापन होगा जिसके पश्चात् भण्डारा का भी आयोजन होगा। धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने अपील की गई है।
Sunday, December 24, 2023
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माता रूकमणी ने भी समर्पण भाव से श्री कृष्ण को याद कर सर्वस्व मान किया विवाह बारात में झूमे धर्मप्रेमी...
माता रूकमणी ने भी समर्पण भाव से श्री कृष्ण को याद कर सर्वस्व मान किया विवाह बारात में झूमे धर्मप्रेमी...
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