रेवांचल टाइम्स - मंडला जिला आदिवासी बाहुल्य होने के नाते सदैव चर्चा में बना ही रहता है..
वही कहीं जनपदों में भ्रस्टो के भ्रष्टाचार, हो या फिर सरकारी धन में गबन के मामले हों या फिर अवैध रूप से हो रहे उत्खनन हों या फिर खनन के साथ साथ रेत चोरी का हो.
जिले के कोने कोने में माफिया तंत्र चरम सीमा को पार कर चुका है..किसी भी तरह से शासन प्रशासन माफियाओं का कारवाई नहीं कर पा रही है..
विकास खण्ड घुघरी भी इन मामलों में सबसे आगे नजर आता है और यहां पर खनिज विभाग हो या शासन प्रशासन इनकी उदासीनता देखने ही मिलती है फर्जी बिलों का अंबार लगाकर शासन की राशि जो कि जनता के हित के लिए होती है वहीं बिना दुकान के राजनीतिक संरक्षण प्राप्त फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का आहरण करते हैं और जब इनकी खबरें प्रकाशित होतीं हैं तो जांच अधिकारी भी लीपापोती करके जांच में वसूली निकाल कर जांच खत्म कर देते हैं..जिससे फर्जी ट्रेडर्स और संचालन करता जानते हैं कि केवल जांच होगी वसूली होगी बाकि तो अपना काम चल ही रहा है..
आखिर शासन प्रशासन की नजरों में ये अपराध या गबन करने की सजा का प्रावधान है या नहीं..
जनता शिकायत पर शिकायत करती है लेकिन जांच अधिकारी गोलमाल करके अपनी जांच और फर्जी ट्रेडर्स के संचालकों को माफ करती नजर आती है जिससे जनता भी हताश हो चुकी है..
विकास खण्ड घुघरी की ग्राम पंचायत घुघरी के बर्राटोला में शासकीय प्राथमिक शाला का भवन साक्षी स्टोन क्रेशर की ब्लासटिंग से जर्जर हो चुका है लेकिन शासन प्रशासन एवं खनिज विभाग भी इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाया..
ब्लासटिंग के पत्थर स्कूल की बाउंड्रीवाल तक आते हैं जिसकी शिकायत ग्रामीण जनों ने कितनी ही बार खनिज विभाग, कलेक्टर मैडम यहां तक खण्ड शिक्षा अधिकारी को भी की है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है..
अवैध रूप से संचालित क्रेशर घुघरी में मनमाने तरीके से ब्लासटिंग और खनन करने में इतने मसरूफ हैं कि मासूम बच्चों पर भी इनको दया नहीं आती बच्चों को पत्थर लग जाये या कोई बच्चा गंभीर रूप से घायल हो सकता है..
इसकी भी क्रेशर मालिकों को कोई चिंता नहीं है, ये तो केवल नोटों की चकाचौंध में मासूमों के जीवन के साथ खिलवाड करते नजर आ रहे हैं..
आखिर इन सब की जांच और क्रेशर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एन जी टी के नियम के तहत कौन कार्यवाही करेगा और इन क्रेशरों से निकल रही धूल के गुब्बारे से डस्ट प्रदूषण से स्कूलों में पढ़ रहे नवनिहालो का भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है इन नवनिहालो के सुनहरे भविष्य को देखते हुए कौन जिम्मेदार स्कूलों के आसपास लगे क्रेशरों को कब दूर शिफ्ट किया जायेगा और शासन प्रशासन इन पर आख़िर कब करेगा...
इनका कहना है -
स्कूल भवन जर्जर हो चुका है और पास में ही क्रेशर है जिसमें किसी भी समय ब्लासटिंग करने लगते हैं जिनके पत्थर स्कूल की दीवार तक आते हैं.
बच्चों को अंदर रखते हैं तो भवन गिरने का डर और बाहर निकालते हैं तो पत्थर लगने का डर..
जर्जर भवन की मरम्मत के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी को आवेदन भी दिया है और ग्रामीणों ने खनिज विभाग और खण्ड शिक्षा अधिकारी को भी अवगत कराया है और लिखित शिकायत भी दी है लेकिन आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की न कार्रवाई हो पायी और न मरम्मत हुई जिसके चलते हमें बच्चों की पढाई के लिए निजी भवन जो कि पालक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष के घर में लगाना पड़ रहा है..
सरोज महोबिया
शिक्षिका
प्राथमिक शाला बर्राटोला..



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