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विजय जवाबदेही तो पराजय परीक्षण का अवसर... - revanchal times new

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Monday, December 4, 2023

विजय जवाबदेही तो पराजय परीक्षण का अवसर...




रेवांचल टाईम्स -विधानसभा चुनाव 2023 हुए सम्पन्न में आये चौका देने वाले नतीजे  वही चुनावी रण में विगत एक दो माह से अधिक समय से जुटे नेता, कार्यकर्ता एवम राजनीति में भावनात्मक रुचि लेने वाले साथियों लोकतंत्र का यह पवित्र पर्व हर पांच वर्ष में एकबार आता है। हर उम्मीदवार, उनके समर्थक चुनावों में जी–जान से जुटकर विजय का पूरा प्रयास करते है। राजनीति के इस खेल में जय–एक हिस्सा है।  इस रण में दो में से एक को ही विजय होना है। दूसरे को पराजित जो विजयी हुए उनका दायित्व है। वे समानरूप से बिना भेदभाव किए जनता जनार्दन की सेवा करे। उनका व्यवहार अधिक विनम्र होना चाहिए। जवाबदेही पूर्ण होना चाहिए। विजयी के अहंकार को अपने से दूर रखे। अंहकार नाश की जड़ है। जिसने भी किया उसे मिटना पड़ा है। आपको मिला दायित्व स्थाई नहीं है। यह चलायमान है। आपसे पहले भी अनेकों इस पद के लिए विजय हुए। एक अच्छे विजेता जनप्रतिनिधि का दायित्व है, वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और नागरिक सुविधाओं की बेहतरी के लिए कार्य करें। ग्रामों की समस्याओं और शहर की औद्योगिक प्रगति पर ध्यान दे। जो पराजित हुए है उनका दायित्व है, वह जीते हुए जनप्रतिनिधि को चैन से नहीं बैठने दे, प्रजात्रांतिक रूप से विपक्ष की तरह जनता  की सेवा में लगे रहे जो जनता के लिए लड़ेगा जनता उनको चाहेगी। लोकतंत्र में जनता निर्माता की भूमिका में होती है। जनता ने इससे पहले भी अच्छे–अच्छे कलंदरो को धूल चटाई है, साधारण से दिखने वाले सड़क के आदमी को विधायक, सांसद तक बना दिया। चुनाव कार्य में  जनप्रतिनिधियों की तरह ही कार्यकर्ता भी तन–मन और धन से जुटता है, वह अपने प्रिय उम्मीदवार को विजयी होता हुआ देखना चाहता है, उसकी मेहनत का विपरित परिणाम उसे भावुक कर सकता है। अनेकों कार्यकर्ता जीत की खुशी में मर्यादाएं भूल जाते है। हार के गम में हिंसक तक हो जाते है। इन भावों पर नियंत्रण की कोशिश करना चाहिए।  लोकतंत्र में अनेकों प्रलोभन है, जो उम्मीदवारों और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा जनता को दिए जाते है, किंतु आपका व्यवहार सबसे बड़ा धन है, आकर्षण है, श्रृंगार है, प्रलोभन है, इस व्यवहार रूपी आकर्षण का दुरुपयोग आपको लंबे समय तक जनता के बीच खलनायक बना सकता है। इसके विपरित आपका उदार और अंहकार रहित व्यवहार आपको जनता के मध्य नायक बना सकता है। जनता आपके व्यवहार को याद रखती है, समय आने पर हिसाब चुकता करती है। हार–जीत ,जय–पराजय सिक्के के दो पहलू है। जीत विनम्रता सिखाती है, पराजय परीक्षण का अवसर है, हार के कारणों की पड़ताल का, कमियों पर को सुधारने का अवसर है। इस अवसर पर कवि शिवमंगल सिंह सुमन की कविता की उक्त पंक्तियां जिसे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेई अक्सर सुनाया करते थै। सुनाने के साथ वे इन पंक्तियों पर अमल भी करते थै। उनका सम्पूर्ण जीवन भारतीय राजनीति में महान किरदार की तरह देखा और समझा जाता है। कवि शिवमंगल सुमन की  कविता जैसे अटल जी के किरदार के लिए ही लिखी गई हो ऐसा प्रतीत होता है, वह पंक्तियां कुछ इस प्रकार है–

’क्या हार में क्या जीत में

किंचित नहीं भयभीत मैं

संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।‚ 

राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा करना होता है। इस हेतु सत्ता से अधिक विपक्ष की जवाबदेही होती है। विपक्ष केवल संसद और विधानसभा में ही नहीं होता विपक्ष सड़क पर जनता के लिए ईमानदार संघर्ष का नाम है। ऐसे अनेकों उदाहरण राजनीति में मौजूद है जब पराजय को परीक्षण का अवसर बनाया गया। अपनी कमियों को परखा गया, अपने व्यवहार को उदार, मानवीय और संवेदनशील बनाकर जनता की लड़ाई उड़ते रहने वाले नेताओं को जनता ने सिर आंखों पर बैठाया है। इस चुनाव में जनता ने अनेकों बडबोले नेताओं, मंत्री, विधायकों को सबक भी सिखाया है। जिनको लगता था, विधायकी, सत्ता तो हमारी बपौती है, जिनके सिर पर सत्ता का मद चढ़ा था, उनके मन ताकत का अहंकार जन्म लेने लगा। ऐसे नेताओं को इस चुनाव में भी और इससे पहले भी जनता ने आसमान से जमीन पर लाकर पटक दिया है। इसलिए जो विजय हुए उन्हें अधिक विन्रम होने की जरूरत है, जो पराजित हुए उन्हें परीक्षण की, पड़ताल की ओर सहजता से पराजय को स्वीकार करने की आवश्कता है। राजनीतिक जीवन में जिन्होंने जीत पर अपनी जिम्मेदारी निभाई जनकार्यो को प्राथमिकता दी, अंहकार को हावी न होने दिया फिर जनता की अदालत में गए फिर विजय हुए। 

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                 नरेंद्र तिवारी ’पत्रकार’

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