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1 मई मजदूर दिवस या मजबूर दिवस.. बहरहाल मुबारक हो- मुकेश श्रीवास की कलम से - revanchal times new

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निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

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Friday, May 1, 2020

1 मई मजदूर दिवस या मजबूर दिवस.. बहरहाल मुबारक हो- मुकेश श्रीवास की कलम से

मजदूरो तुम्हे मुबारक... मजबूरी.. लाचारी.. गरीबी... दुनिया की तमाम जहालते तुम्हारे लिये.... तुमने दुनिया बनायीं ईट से, रेत से या अपनी जवानी से तुम्हे क्या पता...पता है तो सिर्फ इतना की हाँ शाम 7 बजे साहब मजूरी देंगे ..5 बजे से तुम्हारी आँखें रौशनी देखना शुरू करती है...हा ये शाम कुछ बहुत देर से होने लगी है..क्या सचमुच....नहीं बात ये नहीं है तुम्हे थकान जल्दी होने लगी है ...मत थको थकना मत... अभी तुम्हे भागना है बहुत दूर तक जिन्दगी की सलीब लिये अपनी पीठ पर...अरे हाँ महामारी भी तो है .... तो अभी भागना है तुम्हे पैदल अपने गाँव की तरफ ...हो सकता है वो बहुत दूर हो... पर हौसलों से दूर नहीं होगा...बुधिया से मिलने की आस को अपने पंख बनाना और सड़क को आसमान....उस आसमान पर पांव रूपी विमान से उड़ जाना...पर एक बात तो सुन... जाकर वहां करेगा भी क्या...एक बात सोच..सोच अगर वहां खाने को होता..होता तो तू यहाँ क्यों होता ... और एक बात और सुन पैरों के पंचर नहीं बनते...

नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द
रोटियाँ भी मयस्सर हों जिसे काम के बा'द


मजदूर दिवस की शुभकामनाये...कलम के मजदूर मेरे कलमकार साथियों को भी  
Labour Day: 134 साल पहले शुरू हुई मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत, हेमार्केट गोलीकांड के बाद बदली मजदूरों की जिंदगी.... अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मेहनतकश मजदूरों के लिए समर्पित है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजदूरों के बदौलत ही खड़ी होती है, इसके बावजूद आज भी मजदूर हाशिए पर ही हैं. सिर्फ मजदूर दिवस के दिन ही नहीं बल्कि साल के हर दिन मजदूरों के सम्मान और हक में खड़े होने की जरूरत है.
भारत में 1923 में हुई मजदूर दिवस की शुरुआत 
भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 में हुई थी। लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान के नेता और कामरेड सिंगारावेलु चेट्यार के नेतृत्व में मद्रास में पहली बार मजूदर दिवस मनाया गया। चेट्यार के नेतृत्व में मद्रास हाईकोर्ट सामने बड़ा प्रदर्शन किया गया और इस दिन को पूरे भारत में “मजदूर दिवस” के रूप में मनाने का संकल्प लिया। साथ ही छुट्टी का ऐलान किया था

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